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बीकानेर

दिव्यांग बच्चों के लिए बैंक कर्मचारी बना मसीहा, गरीबों को गोल्ड मेडलिस्ट बना शिखर पर पहुंचाया

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अनाथो के नाथ बने,
जिगर देखो उस बंदे का।
स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी,
कहीं काम नहीं कोई चंदे का।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं। जिसने अपने स्वयं का खर्चा लगा कर एक शहर को आगे बढ़ने की एक नई दिशा प्रदान दी है। सुदेश से बात करते हुए पंजाब नेशनल बैंक के रामअवतार सेन ने बताया कि मैं पीएनबी बैंक में हेड कैशियर के पद पर यहां कोलायत में 2015 से काम कर रहा हूं।

आपके दिमाग में यह कैसे आया।
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उन्होंने बताया कि मैं सुबह 10:00 बजे से लेकर के 5:00 बजे तक 70–80 लाख रुपया के बीच में से निकलकर हारा थका जब घर पहुंचता हूं तो मुझे मेरी पत्नी का पूरा सपोर्ट मिलता है कि आपको जो करना है वह करो ।हमारा पूरा सहयोग है। मेरे पिताजी सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारी है, जिनका मुझे फुल सपोर्ट है। वो कहते है कि जो कुछ आपको दूसरों की भलाई के लिए करना है वह करो। मेरा फुल सपोर्ट आपके साथ है। मेरे बड़े भाई साहब भी मेरे लिए आदर्श है।

जिनके कर कदमों पर चल कर मुझे एक नई सीख मिली है। मैं नेशनल खिलाड़ी हूं। मैंने सोचा कि बैंक में कोई गेम्स वगैरह नहीं होते हैं। इसलिए मेरी योग्यता यदि किसी के काम आ सके तो उसका भरपूर उपयोग करना चाहिए। मुझे ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिला, लेकिन मैं कुछ करना चाहता हूं वह कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि हमको अब तक कोलायत के अंदर कभी किस जगह, कभी किस जगह कोई ग्राउंड नहीं होने की वजह से भटकना पड़ता है। लेकिन फिर भी दिव्यांग बच्चों को खेल के मैदान में चुन चुन करके उतारा और साधारण बच्चों में भी मेरी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का जुनून पैदा किया। मैंने उन बच्चों के द्वारा कोलायत को अब तक तीन सौ स्वर्ण पदक से ज्यादा दे चुका हूं।

दिव्यांग बच्चों के लिए खास।
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राम अवतार जी ने सुदेश से बात करते हुए बताया कि मेरे बैंक में जितने भी दिव्यांग बच्चे आते थे, मैंने उन सब को मोटिवेट किया, और मेरे खेल के मैदान में बुलाया, और दूसरे बच्चों को भी मैंने फोन करके बुलाया। आज मेरे पास में 26 या 27 दिव्यांग बच्चे हैं जिन्होंने खेल को एक नई दिशा दी है। और उन्हें जीने का एक नया सहारा मिला है।
इसके अलावा 35 + के बच्चे भी मैंने खेल से जोड़े हैं। और उन्होंने भी अपने क्षेत्र के अंदर नए-नए कीर्तिमान स्थापित की है।

उन्होंने बताया की जिला स्तर पर 300 से ज्यादा गोल्ड मेडलिस्ट है। राज्य स्तर पर दो सौ से ज्यादा गोल्ड मेडलिस्ट तथा नेशनल खेलने वाले 5–6 खिलाड़ी हैं जिनमें से एक को सिंचाई विभाग में सर्विस भी मिल चुकी है।

खेल मैदान।
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खेल के मैदान के बारे में पूछने पर रामअवतार जी बताते हैं कि यह कोलायत की बिष्ट धर्मशाला है उनका यह प्लाट है। जिसमें मैं बच्चों को खिलाता हूं।मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, कि उन्होंने मुझे यह खेलने के लिए दे रखा है।

वहां के सामान्य नागरिकों ने बताया कि सैन साहब अपनी जेब से सत्तर अस्सी हजार सालाना खर्च करते हैं, जो भी खिलाड़ी बाहर खेलने के लिए जाते हैं, उनको आर्थिक सहायता भी देते हैं। लेकिन खेल का मैदान नहीं होना यहां के लिए एक अभिशाप बना हुआ है। यह बहुत ही दुखद है, कि पिछले 5 साल से कोई भी इस बात को नहीं सुन रहा है।

अन्य।
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राम अवतार जी ने बच्चों के भविष्य के लिए और कोलायत के लिए अपना प्रमोशन छोड़ने की भी घोषणा की। यदि मैं प्रमोशन ले लूंगा तो मेरा स्थानांतरण हो जाएगा। प्रशासन से आग्रह है कि बच्चों के भविष्य के लिए जल्दी से जल्दी खेल के मैदान की उचित व्यवस्था कराएं।

अपने विचार।
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ऐसे गुणी धर्मी बनो तुम,
जो दूसरों को हंसा सको।
खुद का पेट तो सब भरते हैं,
पर दूसरों को खिला सको।

विद्याधर तेतरवाल,
मोती सर।

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