दिव्यांग हैं मगर हौसले से हारी नहीं नगमा- बेहतरीन तीरअंदाजी से प्रदेश को दी नई ऊंचाई!

Bikaner Archer Divya Story: नगमा दिव्यांग, बीकानेर राजस्थान।
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रास्ता दिखाने वाला,
मसीहा बन जाता है।
ऐसा हौसला हो जिसमें,
ऐसा श्रेय नगमा को जाता है।

दिव्यांग सफाई कर्मचारी की सफलता का झंडा
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं, जिसके सिर पर पिता का साया नहीं है, वह नगर निगम में कार्मिक है तथा दिव्यांग हैं, लेकिन उन्हीं के  हौसले और जज्बे से राजस्थान का नाम बुलंदियों पर पहुंचा है।

परिवार और परिचय।
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bikaner archer
बीकानेर की दिव्यांग तथा नगर निगम कार्मिक नगमा (Nagma) ने विजय से बात करते हुए अपनी पूरी कहानी साझा की। उसने बताया कि मैं कैंसर से पीड़ित रही हूं तथा दिव्यांग भी हूं। मेरे पिता का साया मेरे सिर से बचपन में ही उठ गया था।, पर मैंने हिम्मत नहीं हारी। और मैंने ठान लिया कि मुझे कुछ करना है। नगमा ने अपनी बीमारी से संबंधित बात करते हुए बताया कि मैंने कैंसर पर विजय हासिल की उसके बाद में जब मैं ऑफिस गई तो वहां पर मुझे भैया ने प्रोत्साहित किया।
नगमा ने बताया की आज से दस वर्ष पहले पिताजी (Bikaner Archer Divya Story) का मेरे सिर से साया उठ गया था। लेकिन मेरा पूरा परिवार मेरे साथ में था। उन्होंने मुझे इतना प्रोत्साहित किया कि तुम सब से अच्छी हो,और बहुत अच्छा कर रही है। और उसी प्रोत्साहन ने आज मेरी पहचान बनाई है।

मेडल।
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archer
नगमा ने विजय से बात करते हुए बताया कि मैंने फोर्थ आर्चरी इवेंट में सिल्वर मेडल जीता है। यह प्रतियोगिता हरियाणा के जींद में आयोजित की गई थी। नगमा ने बताया कि मैं जब जब हारी हूं मेरे घर वालों ने कभी हार नहीं मानी। और उन्होंने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया कि तुम आगे बढ़ रही हो। यह तुम्हारी हार नहीं है यह तुम्हारी जीत है।
तुम जिस समाज से आती हो उस समाज में लड़कियों का बाहर निकलना लगभग बंद होता है उस को आपने किस प्रकार फेस किया। इसके जवाब में नगमा कहती है, कि इसमें मेरे घरवालों का सबसे बड़ा सहयोग रहा है। उन्होंने कभी भी समाज की प्रवाह नहीं की। और मुझे प्रोत्साहित करते रहे। मैं सभी परिवार जनों से माता-पिताओ को यही संदेश देना चाहती हूं कि अपनी बच्चियों पर भरोसा करे और आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित करें।

दुखी की भाषा दुखी समझे।
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नगर निगम कार्यालय में काम करने वाले दिव्यांग मिथुन से बात करने पर वे कहते कि नगमा हमेशा कहती रहती है, कि मेरा प्रमोशन करवाओ। तब मैंने नगमा को इस इवेंट हेतु प्रोत्साहित किया और आज नगमा की पहचान राष्ट्रीय लेवल पर किसी से छुपी हुई नहीं है।
मिथुन स्वयं दिव्यांग है और उन्होंने नगमा के दुख को समझा व आदमी होने के नाते एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए नगमा को सही राह दिखाई। उन्होंने बताया कि नगमा ने मात्र छ महीने में पूरे देश में अपना नाम कर दिया। अब क्वालिफिकेशन के हिसाब इनको नई जॉब भी मिलेगी,प्रमोशन होगा और पैसे मिलेंगे। मिथुन जी कहते हैं कि ऑफिस में नगमा बहुत अच्छी पढ़ी हुई, अनुशासन प्रिय और बात करने में सब से अच्छी लड़की है।
इन सब बातों को देखते हुए मैंने इनको इस इवेंट हेतु प्रेरित किया , (Bikaner Archer Divya Story) और इसने गुरुजनों के सहयोग से उस कार्य को सफल करके दिखा दिया। नगमा के कोचने विजय से बात करते हुए बताया कि हमारे यहां पर मिथुन भी तीरंदाजी करता था।उसने एक दिन मेरे को बताया, हमारे ऑफिस में एक लड़की है मैं उसको कल लेकर आऊंगा तो दूसरे दिन नगमा अपने गार्जियन के साथ हमारे यहां पर आईऔर डॉक्टर की सलाह के उपरांत इसने तीरंदाजी करनी शुरू की और छ महीने में बीकानेर को मेडल लाकर दे दिया।

अन्य।
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nagma

कोच साहब ने बताया कि हमारे यहां पर जो (Bikaner Archer Divya Story)  टीम है, वह बिना भेदभाव और मेहनत से काम करती है। इसलिए सभी माता-पिताओं से मेरा अनुरोध है कि अपने बच्चों को भेजें। पता नहीं किसकी किस्मत में क्या लिखा हुआ है,कोशिश करो। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अपने विचार।
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गुरु ही माता पिता,
गुरु ही भगवान है।
लगन और मेहनत का जज्बा,
हम सब का सम्मान है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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