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बीकानेर

राजस्थान के बीकानेरी ताऊ के नखराले ऊँट और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान से जुड़ा जबरदस्त किस्सा

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bikaner tau story

सिनेमा जगत की कलाएं देखो,
कैसी इनकी रचना है।
सूझबूझ से काम करो,
धोखे से इनके बचना है।

शाहरुख खान ने ऊंट की मजदूरी के पैसे खाए।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे फिल्मी स्टार की बात बता रहा हूं। जो बीकानेरी ताऊ (Bikaneri Tau) के ऊंट की मजदूरी के पैसे खा गया। दस दिन तक साथ में काम किया और जितने करतब ऊंट से करवाने चाहिए थे, वह फिल्मों में दिखाए, लेकिन मजदूरी देने के समय पर पीठ दिखा दी।

बीकानेरी ताऊ ने बताया मेरी उम्र 78 वर्ष है और जब मैं 16 वर्ष का था तब से ऊंटों को रखता हूं। उनकी देखभाल करता हूं। काफी दिन पहले की बात है कि शाहरुख खान की टीम एक बड़ी सी गाड़ी लेकर मेरे पास घर पर आए। उन्होंने मुझे जयपुर में चल रही शूटिंग में चलने को कहा। मैंने कहा मैं ₹1000 लूंगा। तो उन्होंने कहा कि ठीक है।

मैं वहां पर 10 दिन तक रहा। खाने पीने ठहरने का अच्छा प्रबंध था। फिल्म की शूटिंग पूरी होने पर पैसे बाद में देने का नाम लिया, और आज तक नहीं दिए। ऊंट महोत्सव (Camel Festival) की शुरुआत भी इन्ही बाबाजी ने करवाई थी और ऊंट सजाने में, ऊंट को इशारों पर नचाने मैं इनका कोई सानी नहीं है। आज राजस्थान का राज्य पशु ऊंट है। इसको बचाने में इनका विशेष योगदान है। इन्होंने शाहरुख खान और धर्मेंद्र जैसे कलाकारों के साथ में ऊंट को लेकर फिल्मों में काम किया है।

शाहरुख खान (Shahrukh Khan) को देखने की बात पर उन्होंने कहा कि 10 दिन तक साथ में काम कर रहे थे, तो देखना कहां बाकी रह गया।हीरोइन के बारे में पूछने पर कहा कि बहुत औरतें घूम रही थी वहां पर, उसके बारे में मुझे मालूम नहीं है।

बाबा जी ने कहा कि दूसरी पिक्चर धर्मेंद्र (Actor Dharmendra) के साथ में जूनागढ़ (Junagarh) में की थी जिसका नाम है क्षत्रिय। इस पिक्चर में धर्मेंद्र के साथ में 20 दिन रहा था। एक बार ऊंट महोत्सव में बाबा जी ने कहा कि मैं प्रथम आऊंगा। इसका जवाब देते हुए वह कहते हैं कि मैं ही ऊंट को इशारों पर नचा सकता हूं इसलिए मुझे पूरा विश्वास था कि मैं फर्स्ट आऊंगा। बाबा जी ने यह सारे करतब करके दिखाएं।

ऊंटों की नस्ल के बारे में बताते हुए बाबा जी कहते हैं कि राजस्थान में सांचौर में उच्च कोटि के ऊंट पाए जाते हैं। ऐसे ऊंट आपको कहीं नहीं मिलेंगे। इसलिए मैं वहीं से लाता हूं।आज तक लगभग 600 ऊंट मैं रख चुका हूं।

झलको टीम को धन्यवाद देते हुए एक दर्शक ने कहा कि राजस्थान का नाम आते ही रेगिस्तानी जहाज के नाम से विख्यात ऊंट का स्मरण स्वतः ही आ जाता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि इस प्राणी को बचाने के लिए अथक प्रयास करने चाहिए। ऊंट पालकों के लिए विशेष योजना होनी चाहिए।

ऊंट की सजावट में काम आने वाले गोरबंद के बारे में बताते हुए बाबा जी कहते हैं कि यही है वह गोरबंद नखरालो (Gorband Nakhralo)। जिसके ऊपर गीत भी गाया जाता है।

” जय हो रेगिस्तान के जहाज की। ”

अपने विचार।
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राजस्थान का ऊंट,
रेगिस्तानी जहाज कहलाता है।
सीधा-साधा मालिक इसका,
ऊंट घास पत्ती खाता है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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