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बीकानेर

बीकानेर के देवी सिंह भाटी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, नरेंद्र मोदी के लिए कह दी ये बड़ी बात

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devi singh bhati

नियत गंदी व्यवस्था गंदी,
गंदा करे व्यवहार।
बेटा बेटी होवे कोनी,
थाली बजावे हर बार।

बेटा बेटी होवे कोनी और थाली बजा दो।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं। जिसने बीकानेर (Bikaner) की राजनीति में एक नया आयाम स्थापित किया और आज भी अपने कार्य और अपने सिद्धांतों के प्रति सजग है। बीकानेर की कोलायत (Kolayat) से सात बार विधायक बने भाजपा (BJP) के पूर्व सिंचाई मंत्री तथा दिग्गज नेता देवी सिंह जी भाटी (Devi Singh Bhati) से हुई वार्ता के अंश यहां पर आपके सामने रख रहा हूं।

प्रशासन गांवों की ओर।
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प्रशासन गांवों की ओर विषय पर सुदेश से बात करते हुए देवी सिंह जी भाटी कहते हैं कि प्रशासन को गांवों की तरफ लाने की नौबत क्यों आई।इसका साफ-साफ मतलब यह है कि सरकार का कोई भी महकमा अपना काम समय पर नहीं करता है।

अतिक्रमण की बात पर देवी सिंह जी कहते हैं कि एक तरफ तो आप ने भारी वाहन को शहर में आने से रोका है और दूसरी तरफ पूरे शहर के अंदर भारी वाहन खड़े हैं। ये कैसी व्यवस्था है, इस व्यवस्था से दुर्घटना होती है,और आम जनता का जीना दूभर हो गया है।

भाटी साहब कहते हैं कि अभी 15 दिसंबर 2021 को राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने निर्णय लिया है कि 30 साल पुराने गोचर भूमि या चारागाह के कब्जे को पट्टा देकर नियमित किया जाए। तो जिस समय कब्जा हुआ था उस समय पटवारी या गिरदावर क्या कर रहे थे।हर व्यक्ति अपनी ड्यूटी की चिंता करता है कि कोई मुझे ना छेड़े।

उन्होंने बताया एक बहुत ही सोचने योग्य बात है कि क्या कलेक्टर (Collector) और एसपी (SP) की ड्यूटी 10 से 5 की होती है, जो बाबू की तरह आते हैं और चले जाते हैं। उनकी ड्यूटी 24 घंटे की है। वो कभी भी कहीं भी पब्लिक के बीच में जाकर जनता के दुख और सुख का पता लगाएं और उसी के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने बताया कि यह अभियान फेल है। लोग इससे नाराज है। क्योंकि इस अभियान में भी किसी व्यक्ति का काम नहीं होता है।

यातायात सप्ताह मनाना या कहीं भीड़ होने पर हल्का बल प्रयोग करना। ये अव्यवस्था का हिस्सा है, हल्का बल प्रयोग करना क्यों पड़े, यदि प्रारंभ में ही पांच व्यक्तियों से बात करके उस मसले को निपटा दिया जाए।उन्होंने बताया कि घड़साना में किसानों ने नहर में पानी नहीं आने की आवाज उठाई ,लेकिन सरकार ने नहीं सुनी। अंत में बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई और छः व्यक्ति मारे गए, क्या यही व्यवस्था है।

उन्होंने बताया कि किसी भी मसले के शुरू में बात नहीं करना, अंग्रेजों वाली परिपाटी है। यदि समय पर बात कर ली जाए तो सामान्य व्यक्ति को समय पर न्याय मिल जाए और बात आगे नहीं बढ़े।

नाकाम स्वच्छता अभियान।
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भाटी साहब ने बताया कि कलेक्टर ऑफिस के बराबर वाली नाली और नगरपालिका के सामने का कचरा और गंदगी, इनके थोथे दावे का सबूत है। दो गज दूरी मास्क जरूरी के बड़े बड़े होर्डिंग लगाने से करोना नहीं जाएगा। यह अभियान सफल होगा जब पूरे शहर में सफाई होगी और सही व्यवस्था होगी। चुनाव की रैली होती है जिसमें लाखों व्यक्ति आते हैं, उसकी किसी को चिंता ही नहीं है।

गजनेर फाटक  पर भारी भीड़ को देखते हुए तथा लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुल बनाने का ज्ञापन मैं पहले भी दे चुका हूं। और आगे भी मैंने इस पर धरना देने का मानस बना रखा है। इसी प्रकार रणधीसर में आई प्राकृतिक आपदा अर्थात बहुत गहरे गड्ढे की तरफ भी सरकार का ध्यान अभी तक नहीं गया है। उन्होंने कहा कि इस सरकार में किसी की जवाबदेही नहीं है।

देवी सिंह जी भाटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन सेवा की तारीफ करते हुए उनके कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा की जनता के बीच रहने वाले व्यक्ति को ही टिकट मिलना चाहिए। ना की चापलूसी करने वाले को। सुदेश ने बसलपुर स्कूल के अंदर स्टाफ नहीं होने का जिक्र करते हुए बताया कि वहां पर लगभग 500 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में स्टाफ नहीं है, और रोज लड़ाई झगड़ा होना, यह सब सरकार की अव्यवस्था का नतीजा है।

अन्य।
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उन्होंने बताया कि यह प्रजातंत्र की प्रणाली ही खराब है। धीरूभाई अंबानी पेट्रोल पंप पर काम करता था, फिर अदानी उसके वहां नौकरी करता था। आज वो दुनिया की एक नंबर अर्थ व्यवस्था के मालिक हैं, तो यह क्या है।

एक समय था जब गांव के अंदर खेतीबाड़ी, पशुपालन, चारागाह आदि के व्यवस्थित ढांचे से सब तरीके से रहते थे। इसलिए समाज को आगे आना चाहिए और अपने पूर्व के ढांचे को व्यवस्थित तरीके से अपनाकर सही दिशा तय करनी चाहिए। शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। देवी सिंह जी भाटी ने झलको मीडिया समाचारों की तारीख की और कहा कि आप किसी समस्या की तह तक जाते हो यह बहुत बड़ी बात है।

अपने विचार।
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हरियाली हरा सोना है,
यह धरती मां का गहना है।
पशुपालन है हीरा मोती,
यह विद्वानों का कहना है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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