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बीकानेर

गरीबी में बचपन गुजारा, मेहनत से पहले प्रयास में बने IAS, किसान के बेटे के आगे आसमां भी पड़ा छोटा

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आपने सुना होगा कि जिनके सपनों में उड़ान होती है उनके लिए आसमां भी छोटा पड़ जाता है। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताएंगे जो हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

हम बात कर रहे हैं बीकानेर जिले के अड़सीसर पंचायत के गांव सोमासर के रहने वाले रामरतन सारण की जिनकी कहानी बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि रामरतन ने बेहद गरीबी में अपना जीवन गुजारकर मेहनत से साबित कर दिया कि किसी भी मुकाम को हासिल करना आसान होता है।

किसान का बेटा बना आईएएस

रामरतन सारण के पिता नोरंग राम सारण एक किसान थे। 6 बच्चों का पालन पोषण नोरंग राम किसानी व खेती से करते थे। रामरतन सारण 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता खेती करके ही अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। उनके पिता ने कभी भी अपने बच्चों की शिक्षा के आड़े उनकी गरीबी को नहीं आने दिया।

ऐसी रही रामरतन की शिक्षा

रामरतन सारण की शिक्षा की बात करें तो उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आगे की शिक्षा के लिए डूंगरपुर, बीकानेर व जयपुर में पढ़ाई की।

रामरतन ने पहले प्रयास में पास की आईएएस की परीक्षा

रामरतन सारण के बारे में बताएं तो उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की कठिन परीक्षा को पास कर लिया था। सोमासर गांव के रहने वाले रामरतन ने ऑल इंडिया में 922वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद वह आईएएस अफसर बन गए। साथ ही आपको बताएं तो इससे पहले भी राम रतन ने एक बार आरएएस की परीक्षा को पास कर लिया था।

कामयाब है पूरा परिवार

राम रतन सारण 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। वह इस वक्त आईएएस की ट्रेनिंग कर रहे हैं। वहीं उनके भाई बहनों की बात करें तो उनके एक भाई इस वक्त पटवारी है। उनका दूसरा भाई किस्तूराराम पंचायत समिति सदस्य हैं।

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