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बीकानेर

दिव्यांग पति पत्नी की ऐसी जबरदस्त जोड़ी जिन्होंने पैरा गेम्स में जीत लगा दिए मेडलों की झड़ी

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कोलायत के दिव्यांग है वो, दिल में उनके आग है।
मेडल्स की झड़ी लगा दी, यह बीकानेर का भाग है।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको अपने दिव्य अंग खोने वाले अर्थात दिव्यांग दंपति से रूबरू करवा रहा हूं। जिन्होंने कोलायत तहसील (Kolayat Tehsil) का, बीकानेर (Bikaner) जिले और राजस्थान (Rajasthan) का नाम रोशन कर एक इतिहास बनाया है। चक विजय सिंह पुरा के रहने वाले श्री किशन बिश्नोई (Kishan Bishnoi) ने 2015 में बस दुर्घटना के दौरान अपने एक पैर को खो दिया था।

श्री किशन इससे पहले बिल्कुल स्वस्थ था, लेकिन अब 61 परसेंट विकलांग घोषित हो गया। उनकी पत्नी 3 साल की उम्र से पोलियो ग्रस्त होने के बाद में अब 60 परसेंट विकलांग है। सुदेश से बात करते हुए श्री किशन ने बताया कि हमारे दो बच्चे हैं एक लड़का 13 साल का और लड़की 11 साल की है। मैं इस समय पैरा स्पोर्ट्स में गोला फेंक, भाला फेंक की तैयारी कर रहा हूं।

उन्होंने 2019 में सिल्वर और गोल्ड मेडल जीता है, जबकि उसकी पत्नी डिस्क थ्रो में सिल्वर मेडलिस्ट (Gold Medalist) है। बीएसटीसी होल्डर उनकी पत्नी ने रीट का पेपर देने की वजह से एक मेडल से वंचित होना बताया। सुदेश ने जब पूछा कि आपके दो बच्चे हैं आप घर पर बैठ कर आराम कर सकती हैं। के जवाब में वह कहती हैं कि मैं खेलने की इच्छुक हूं। मेरे सास ससुर का सहयोग हमारे साथ है। और बच्चों को मोटिवेट करने के लिए हम दोनों ने ही यह रास्ता अपनाया है।

लोगों की राय।
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लोगों की राय के बारे में पूछने पर वह कहती, कि शुरुआत में बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ता है। ताने भी सुनने पड़ते हैं, शर्म भी आती है, लेकिन सब को दरकिनार कर जब मेडल जीता तो,. लोगों की जबान अपने आप बंद हो गई।

आपने कभी अपने आप को दिव्यांग समझ कर कमजोर समझने के सवाल पर वह कहती है कि हमने कभी अपने आप को कमजोर नहीं माना। हम दोनों अपने आप को सामान्य मानते हैं, और वैसे ही काम करते हैं। हमारे बच्चों को भी हमारे ऊपर बहुत प्राउड है।

बच्चों को आप क्या कहेंगे।
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श्री किशन की पत्नी ने श्री किशन के दुर्घटना में खोये पैर के पल पर अपने विचार और हिम्मत का बखान किया। और समाज में व्याप्त बुराइयों का विरोध करते हुए अपने बच्चों को भी संबोधन में कहा, कि आज हम जिस प्रकार टीवी पर हैं, उसी प्रकार सब अपनी हिम्मत से टीवी पर आ सकते हैं। और समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं।

आत्महत्याओं के जवाब में वह कहती हैं कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। यह बुजदिली है, आप समाज को कुछ काम करके दिखाओ। आत्महत्या तो कोई भी बुजदिल कर सकता है। अपने गुरु रामअवतार जी का शुक्रिया अदा करते हुए वह कहती है कि उन्होंने हमको नई राह दिखाई है, और आगे बढ़ने का जज्बा पैदा किया है।

उन्होंने बताया की खेलने के लिए मैं जयपुर (Jaipur), जोधपुर (Jodhpur), हनुमानगढ़ (Hanumangarh) सब जगह गई हूं, और मेरे पति भी हमेशा मेरे साथ में रहे हैं।हमारे गुरुजी भी लगभग हमारे साथ में जाते हैं। और उत्साहित करते रहते हैं।आर्थिक परेशानी आती है,लेकिन सास ससुर और गुरुजी का पूरा सह योग हमारे साथ में है। इसलिए मिलजुल कर उस समस्या का समाधान कर लेते हैं।

अन्य।
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वर्तमान में कोलायत बैंक में कार्यरत केशियर श्री राम अवतार जी सेन ने बात करते हुए बताया कि जब यह मेरे बैंक में आए थे, तो मैंने इनसे विस्तार से बात की और फिर इनको खेलने के लिए मोटिवेट किया। आज डेढ़ लाख रुपया श्री किशन जी को तथा ₹50000 इनकी श्रीमती जी को मेडल जीतने पर मिल चुके हैं। शुरुआत में मैंने इनको अपनी बहन बनाया और उसके बाद में ही खेल के मैदान में सिखाना शुरू किया। जिससे किसी के भी मन में उल्टे भाव ना आए।

अपने विचार।
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अंग चाहे भंग हो गया,
मन तो साबूत है।
मन में ऐसा जज्बा भरा,
जैसे कोई दूत है।

विद्याधर तेतरवाल ,
मोतीसर।

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