बीकानेर के ऐतिहासिक कसौटी नाथ महादेव शिव मंदिर की कहानी जहाँ हुंमायू ने ली थी शरण

Kasoti Nath Mahadev Mandir : राजस्थान तो पहले से ही ऐतिहासिक इमारतों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। अगर हम बीकानेर शहर की बात करे तो यहां सैकड़ों ऐसे मंदिर है जो ऐतिहासिक रुप से काफी प्रसिद्ध है। शहर के कुछ मंदिरों का इतिहास काफी रोचक है। इन्हीं में से एक है नाथसागर स्थित कसौटीनाथ महादेव शिव मंदिर (Kasauti Nath Mahadev Mandir) । शहर के अंदरूनी भाग में नत्थूसर गेट के परकोटे से बाहर नाथ सागर तालाब पर बना यह मंदिर जमीन से लगभग तीस फीट की ऊंचाई पर है। इस मंदिर से कई तरह के इतिहास जुड़े हुए है। मंदिर के पुजारी के अनुसार मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में हुई ।

उस समय के महाराजा गजसिंह ने इसका पुनरुद्धार करवाया। इस मंदिर का नाम गजपेतश्वर महादेव के नाम से है। इस मंदिर के नीचे एक काली माँ का भी मंदिर है, लेकिन इसे बंद किया गया है। इस मंदिर पिछले काफी दिनों से पूजा अर्चना करने वाले पंडित रामअवतार छंगाणी के मुताबिक यह शिव मंदिर नाथ संप्रदाय के तपोस्थली के रुप है। यहां पर इस समुदाय की विशेष आस्था है और इस संप्रदाय से जुड़े लोगों की यह तपोस्थली है। मंदिर के प्रांगण में ही एक तालाब है, जिसे नाथसागर तालाब कहा जाता है।

हुमायूं ने मंदिर में ली थी शरण

बताया जाता है कि हुमायूं ने इस मंदिर में शरण ली थी। मुगल शासक ने शेरशाह सूरी से पराजित होने के बाद चुपचाप यहां शरण शरण ली थी। मंदिर के बाहर देवस्थान विभाग की तरफ से मंदिर के इतिहास से जुड़े तथ्यों पर आधारित बोर्ड में भी इस बात को दर्शाया गया है। मंदिर में नाथ समुदाय के साधु-संत मंदिर के एक तालाब में ही नहाते थे और यहां पर साधना करते थे। यह मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।

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