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बीकानेर

लूणकरणसर झील : मरूभूमि का वो सौंदर्य जहां साल भर शौक से आते हैं विदेशी पक्षियों के झुंड

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राजस्थान वैसे तो मरूभूमि है लेकिन यहां कई इलाकों में पुरानी झीलें प्रदेश की सुन्दरता में चार चांद लगाती है। आज हम बात करेंगे लूणकरणसर झील की जो बीकानेर के उत्तर-पूर्व में लगभग 80 किमी दूर स्थित है। लूणकरणसर झील के पानी में लवणीयता की कमी है अत: बहुत थोड़ी मात्रा में नमक बनाया जाता है। यह झील 6 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है।

लूणकरणसर की नमक झील में अपनी रंगत बिखेरते हुए स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी और खींचती है। गौरतलब है लगातार तीसरे साल फ्लेमिंगो ने लूणकरणसर में अपना डेरा जमाया है। नमकीन झील में इन दिनों हजारों की संख्या में डेमोइसेल क्रेन (कुरजां) का प्रवास रहता है। फिर भी उन सबके बीच ग्रेटर फ्लेमिंगो महज दर्जन भर संख्या में ही सही, पर अपनी विशिष्ट मौजूदगी दर्ज करवाने में सफल है।

कहां से आते हैं यहां पक्षी

राजहंस परिवार की छह जातियों में सबसे बड़े इस पक्षी का यूं तो मूल रूप से यूरोपीय देश एवं दक्षिण एशिया से संबंध जुड़ा है, पर भारत में भी कई जगह इन्हें झुंड में देखा जा सकता है।

कच्छ-गुजरात से होकर ये कुरजां के साथ लूणकरणसर में ठहरते हैं। पाकिस्तान, मध्य एवं दक्षिणी अमेरिका, कैरेबियन तथा दक्षिणी यूरोप के तटीय इलाकों और खारे पानी की झीलों में विशेष रूप से इनका वास रहता है। ग्रेटर फ्लेमिंगो के अलावा कुरजां, बारहेडेडगूज सहित और भी कई प्रजातियां लूणकरणसर में के मनक में मिठास बिखेरती है।

फ्लेमिंगो समंदर के खारे पानी और नमकीन झीलों में रहना पसंद करते हैं। सर्दियों में भोजन की तलाश में यह लूणकरणसर तक आ जाते हैं। वहीं प्रजनन भी एक मुख्य कारण है। कुशल तैराक राजहंस पक्षी का साइंटिफिक नाम फोनिको पीटर्स रोजेज है जिनकी उपस्थिति से हाइवे से गुजरते प्रत्येक व्यक्ति का ध्यान एक बार ही सही लेकिन झील की ओर चला ही जाता है।

झील अब हो रही प्रदूषित

लूणकरणसर झील को विदेशी पक्षियों की शरणस्थली माना जाता है लेकिन इन दिनों नमक की परत से ढकी झील का अस्तित्व खतरे में है। दरअसल झील के शहर किनारे बने होने के चलते गंदा पानी नाले के द्वारा इस झील में गिरता है जिसके कारण झील का पानी काला होने लगा है। मृत पशु भी भारी तादाद में यहां नजर आते हैं।

नतीजन भयंकर बदबू झील भरी रहती है। अस्तित्व पर मंडराते खतरे से पक्षी सहमे हैं। अगर झील में गंदे पानी के निकास की यही व्यवस्था रही तो निश्चित तौर पर यह खूबसूरत स्थल एक दिन वीरान हो जाएगा।

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