सड़क से माचिस चुग के छोटा सा बच्चा बन गया माचिस बॉय, बाप दादा के शौक को बनाया कला

लीक लीक गाड़ी चले,
लिक ही लिक कपूत।
बिना लिक के तीन है,
शायर सिंह सपूत।

कोई काम छोटा नहीं होता।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे शख्स से रूबरू करवा रहा हूं जिसने लगभग सौ साल पहले तक की माचिसो को इकठ्ठी कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

परिचय और परिवार का सहयोग।
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डूडी पेट्रोल पंप के पीछे बीकानेर (Bikaner) में रहने वाले भानु (Bhanu) ने सुदेश से बात करते हुए बताया कि तरह-तरह की माचिस इकठ्ठी करने का काम मेरे दादाजी भी करते थे। मेरे पापा भी करते है। लेकिन एक दिन मेरी दादी ने सबको कचरे में फेंक दिया। यह मुझे भी बहुत बुरा लगा और मैं सब को वापस ले आया। इस समय हमारे पास में बाइस सौ प्रकार की माचिसों का कलेक्शन है। मेरे मामा जी को भी यह शोक है।

भानु की बहन ने सुदेश से बात करते हुए बताया कि मेरे नाना जी को भी माचिस इकठ्ठी करने का शौक था। और मेरे मामा जी को भी है। लेकिन एक बार सफाई करते हुए मेरी नानी जी ने भी सबको फेंक दिया था।

आपके कॉलेज के साथियों की क्या राय है।
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सुदेश से बात करते हुए भानु ने बताया कि मेरे दोस्तों की राय मेरे लिए अच्छी नहीं है। वह बार-बार मुझे बुरा भला कहते हैं। कि क्या कचरे में खोज रहा है। कितना बुरा काम कर रहा है। यह अच्छी बात नहीं है। तू बड़ा हो गया है। यह गंदे काम मत कर आदि आदि।

भानु ने कहा कि अब मेरा सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। अब मैं यह काम बड़ी शान से करूंगा। मैं मेरे दोस्तों को भी बताऊंगा कि दुनिया में कोई भी काम छोटा नहीं होता है। हर काम अपने आप में अलग है,और बड़ा होता है।

आपने अब इतना बड़ा प्लेटफार्म जब इसको प्रोवाइड करवाया है, तो आगे अब और काम करने में यह गर्व महसूस करेगा। समाज में लोग डिमोटिवेट करने वाले बहुत ज्यादा है। अब वही मित्र जो इस की बुराई करते थे। गर्व से इसका साथ देंगे और इसकी प्रशंसा भी करेंगे।

भानु का बचपन।
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भानु की बहन ने अपने भाई के बचपन के बारे में बताया कि यह बहुत ही शरारती किस्म का लड़का है। जब उससे पूछा कि किस प्रकार की शरारत करता है। तो उसने बताया कि यह किसी से बात करने के बाद में पीछे से उसकी एक्टिंग करना, उसकी नकल करना, में माहिर है। सुदेश ने 15 साल के भानु को बीकानेर का माचिस मैन बना दिया।

सुदेश ने सब को संबोधित करते हुए कहा कि भानु बीकानेर का एक यूनिक लड़का है। जिसने इतना बड़ा काम किया है। इस तरह किसी चीज की लगन लगना और उसको पूरा करना बहुत बड़ा काम है। किस चीज का शौक है, के बारे में भानु ने बताया कि मुझे शतरंज का शौक है। इसके अलावा क्या करते हैं, के जवाब में भानु कहते हैं कि बोतल का रेपर, चिप्स का रैपर, यह भी मैं इकट्ठे करता हूं और इस किताब के अंदर चिपकाउगा।

अपनी संस्कृति के बारे में पूछने पर भानु की बहन ने बताया कि पाश्चात्य संस्कृति वाले हमारी संस्कृति को अपना रहे है हमारी संस्कृति सबसे अच्छी संस्कृति है।लेकिन हमारी संस्कृति में बच्चे के ऊपर थोपने का काम करते हैं, यह अच्छा नहीं है।

जबकि पाश्चात्य संस्कृति में बच्चे की रूचि के अनुसार काम करना माता-पिता को अच्छा लगता है। वहां के लोगों ने बड़ी-बड़ी नौकरियों का स्वाद चख लिया। इसलिए वह शकुन की जिंदगी के लिए रूचि के अनुसार काम करना अच्छा समझते हैं। जबकि हमारे यहां इससे उल्टा है, जो गलत है। अंत में भानु ने बताया कि अपनी रूचि के अनुसार सबको कुछ अलग हटकर काम करना चाहिए।

अपने विचार।
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काम कोई छोटा नहीं,
छोटे होते हैं विचार।
रूचि के अनुसार काम करो,
करो सोच विचार।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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