7 बेटियों ने अपने 95 साल के बाप के लिए किया कुछ ऐसा की आप आंसू नहीं रोक पाओगे

आज तक हमने यही सुना था कि बेटे पिता को कंधा देते है, पिता की चिता को मुखाग्नि देते है। लेकिन राजस्थान के बूंदी से एक ऐसी खबर आई है जिसको देखकर कोई भी यही कहेगा कि बेटी हो तो ऐसी।

दरअसल, राजस्थान (Rajasthan) के बूंदी (Bundi) जिले में 7 बेटियों ने बेटा का फर्ज निभाते हुए अपने पिता की अर्थी को कंधा देने से लेकर मुखाग्नि तक दी।

इन महिलाओं ने रूढ़िवादी समाज में पुत्र द्वारा दी मुखाग्नि देने की चली आ रही परंपरा तो तोड़ते हुए एक बेटी होने का फर्ज निभाया।

हिण्डोली (Hindoli) कस्बे के बाबाजी का बरड़ा मोहल्ले में 95 साल के बुजुर्ग रामदेव कलाल का निधन हो गया।

पिता की मौत के बाद रामदेव की 7 बेटियां कमला, मोहनी, श्यामा, गीता, मूर्ति, पूजा और ममता आगे आईं और पिता की चिता को मुखाग्नि दी।

इन 7 बेटियां ने अपने पिता का अंतिम संस्कार अपने हाथों से किया। बेटियों के इस फैसले का कस्बे के बुजुर्गों ने भी समर्थन किया।

सदियों से चली आ रही परंपरा को इन महिलाओं ने तोड़कर ये साबित कर दिया कि धर्म और कर्तव्य से बड़ी कोई परंपरा नहीं होती।

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