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चित्तौड़गढ़

जानें! क्यों शादी के दिन धरती फटी और जमींदार की बेटी धरती में समा गई,आवरी माता मंदिर की कहानी

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आज हम आपको कहानी बताएंगे चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) के भदेसर (Bhadesr) में मौजूद आवरी माता मंदिर (Avari Mata Mandir) की। लगभग 750 साल पुराने आवरी माता मंदिर की खूबसूरती हर भक्तों का मन मोह लेती है। आसावरा गांव (Asawara Village) के समीप मौजूद इस मंदिर के आसपास पहाड़िया झरने मौजूद है। खूबसूरती का एक बेहतरीन दृश्य मंदिर के आसपास है। वही मंदिर के पास एक तालाब भी बहती है। बताया जाता है कि तालाब का पानी बेहद पवित्र है।

हनुमान जी की भी होती है पूजा

राजस्थान (Rajasthan) की खूबसूरती और चित्तौड़ की धरती पर बसे आवरी मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है। वही मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति मौजूद है। मंदिर में आवरी माता की पूजा-अर्चना बेहद खास तरीके से होती है। रोजाना माता को फूल व गहनों से सजाया जाता है और हर दिन कई सैकड़ों भक्त माता के मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

इतिहास है बेहद खास

मंदिर का इतिहास से बेहद खास है। मंदिर के इतिहास के बारे में हम आपको बताएं तो मिली जानकारी के मुताबिक भदेसर शहर में एक जमींदार रहता था जिसका नाम आवाजी था। आवाजी के एक पुत्री थी जिसका नाम केसर था और एक पुत्र के अलावा उस जमीदार के सात पुत्र भी थे। कहते हैं कि एक रोज जमींदार आवाजी ने अपने पुत्रों को अपनी पुत्री केसर के लिए एक सुयोग्य वर देखने के लिए भेजा।

जिसके बाद सभी सातों पुत्र अलग-अलग जगह गए और सभी ने अलग अलग जगह उनकी बहन केसर का रिश्ता तय कर दिया। बाद में केसर ने अपनी कुलदेवी की आराधना पूजा करना शुरू किया और अपनी कुलदेवी से यह समस्या का हल निकालने की मदद मांगी।

कहते हैं कि जिस दिन केसर की शादी होनी थी उस दिन न जाने क्या चमत्कार हुआ और शादी के दिन धरती फट गई। जिसके बाद जमींदार की बेटी केसर उस धरती में समा गई। बेटी को जमीन में समाते हुए देख जमींदार आवाजी ने अपनी पुत्री को पकड़ना चाहा और उसके हाथ में बेटी का पल्लू आ गया,

जिसके बाद नाराज होकर केसर ने अपने पिता को श्राप दिया। कहा जाता है कि आवाजी ने श्राप से मुक्ति के लिए ही मंदिर का निर्माण करवाया था। जिसे आज आवरी माता मंदिर के नाम से जाना जाता है।

लकवे का होता है इलाज

आवरी माता मंदिर में पोलियो और लकवे के रोगियों को ठीक करने की मान्यता है। कहते हैं कि पोलियो और लकवे के ग्रस्त मरीज जब इस मंदिर में पहुंचते हैं, तो वह स्वस्थ होकर वापस अपने घर जाते हैं। शरीर के जिस अंग में पोलियो की या लकवे की शिकायत होती है, ठीक होने के बाद भक्त उसे के जैसा सोने चांदी का अंग बना कर माता को भेंट चढ़ाते हैं। मंदिर में दुर्गा पूजा नवरात्रि हनुमान जयंती के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है और इस दिन माता के मंदिर में मेला भरता है।

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