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चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ का सांवलिया सेठ मंदिर जहां होती है मोर मुकुट बंसी वाले की पूजा, 450 साल पुराना है इतिहास

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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के मंडिया में 450 साल पुराने सेठ सांवलिया मंदिर का अपना इतिहास है जहां मोर मुकुट बंसी वाले की पूजा होती है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण मेवाड़ के राजपरिवार ने करवाया था।

यह मंदिर चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से लगभग 41 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ है जिससे नजदीकी एयरपोर्ट की दूरी 61 किलोमीटर है।

मीरा बाई से जुड़े हैं मंदिर के तार

मंदिर को लेकर एक दावा किया जाता है कि सेठ सांवरिया मंदिर के तार मीराबाई से जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि मीराबाई जिस गिरधर गोपाल की पूजा करती थी। वही गिरधर गोपाल इस मंदिर में मौजूद सेठ सांवलिया है।

मन्दिर को लेकर है कई मान्यताएं

आपको बता दें कि चित्तौड़गढ़ के सेठ सांवलिया मंदिर को लेकर कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं। यहां माना जाता है कि जो व्यक्ति जितना धन या दान चढ़ाता है उसे उस दान का कई गुना मिलता है। इसी के चलते कई लोग खेती, व्यापार और अपनी तनख्वाह सेठ सांवलिया को चढ़ाते हैं।

कई लोग अपने व्यापार और अपनी तनख्वाह का हिस्सा चढ़ाने के लिए सेठ सांवलिया मंदिर में आते हैं। लोग इस मंदिर में आस्था रखते हैं और मानते हैं कि सांवलिया सेठ को चढ़ाया हुआ हिस्सा उन्हें कई गुना के रूप में मिलेगा।

हर महीने भरता है मेला

वहीं हम आपको बताएं तो सेठ सांवलिया मंदिर में हर महीने अमावस्या के एक दिन पहले यानी चतुर्दशी को भंडारा खुलता है। अमावस्या के दिन इस मंदिर में मेला शुरू होता है। इसी दौरान लोग अपने दान की राशि या व्यापार के हिस्से को चढ़ाने के लिए इस मंदिर में आते हैं। इसके अलावा दीपावली के दौरान यह भंडारा 2 महीने के लिए खुलता है और होली के दौरान यह भंडारा 45 दिनों तक चलता है।

विदेशों से भी दान देते हैं लोग

वहीं हम आपको बताएं तो सेठ सांवलिया मंदिर के श्रद्धालु भारत के अलावा विदेश से भी अपना हिस्सा चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी की मानें तो मंदिर में डॉलर, पाउंड, रियाल, दिनार, नाइजीरियन नीरा में भी चढ़ावा आता है। एक अनुमान के मुताबिक मंदिर में हर महीने 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

अच्छे कामों में लगाया जाता है पैसा

सेठ सांवलिया मंदिर में देश-विदेश से लोग अपनी कमाई का हिस्सा चढ़ाने के लिए आते हैं लेकिन आपको जानकर खुशी होगी कि मंदिर में आया चढ़ावा मंदिर ट्रस्ट किसी अच्छे कार्य के लिए इस्तेमाल करता है। मंदिर ट्रस्ट में शामिल एक कार्यकर्ता ने बताया कि मंदिर में दान की गई राशि को सेवा कार्य के लिए खर्च किया जाता है।

उन्होंने बताया कि मंदिर ट्रस्ट सेवा और विकास कार्यों के लिए इन पैसों का इस्तेमाल करती है। ट्रस्ट शिक्षा, अस्पताल, धर्म, विकास व मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के लिए इन पैसों को खर्च करती है।

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