1100 साल पुराना मेनाल प्रसिद्ध शिव मंदिर खो रहा अपना अस्तित्व-3 पिलर्स पर टिककर बचा रहा पहचान

Menal Shiv Temple- किसी इमारत का यदि जीर्णोद्धार न किया जाए तो संभव है, वह अपने अस्तित्व को खो देगी। ऐतिहासिक इमारतें अपना मूल कब तक बचा सकती हैं, अगर उन पर ध्यान नहीं दिया जाए तो, सदियों पुरानी खड़ी इमारतें मरम्मत की दरकार करती हैं। राजस्थान की एक मशहूर धरोहर भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) से अपने संरक्षण की दरकार कर रही है। जीर्णोद्धार के नाम पर स्मारक तीन लोहे के पाइपों पर टिकी है। देश की 100 श्रेष्ठ स्मारकों की फेहरिस्त में शामिल मेनाल में 11वीं सदी का प्रसिद्ध शिव मंदिर अपने संरक्षण की फरियाद लगाए खड़ा है।

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शिव प्राचीन मंदिर का शिखर तीन जैक पर टिका हुआ है, इससे न केवल स्मारक स्थल खतरे में है, बल्कि यह लोगों के लिए भी खतरा बना हुआ है। विभाग की लापरवाही श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बनकर खड़ी है, हजारों श्रद्धालु यहां गर्भ गृह के दर्शन करने आते हैं, लेकिन एक भय के साथ- श्रद्धालु दर्शन करते हुए शिव-शंभू का नाम जपते हुए बाहर चले जाते हैं।

शिखर के लैंटर में दरार आ गई, जिस कारण यहां जैक लगाकर लेंटर को रोकने के लिए काम चलाऊ इंतजाम किया हुआ है, जो कि स्मारक और श्रद्धालु दोनों के लिए एक बड़ा खतरा है। 100 मशहूर स्मारकों की लिस्ट में शामिल स्मारक के ये हाल एएसआई (ASI) और सरकार पर सवाल खड़े करता है।

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इतिहासकारों की माने तो मेनाल का यह प्रसिद्ध शिव मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर का निर्माण केवल पत्थर से हुआ है। साथ ही इसमें खूबसूरत भित्ति चित्रों को भी उकेरा गया है। यहां नंदी जी की एक बड़ी प्रतिमा है, जो हजारों श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है।

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मंदिर (Menal Shiv Temple) के बाहरी हिस्से में बेजोड़ शिल्पकला से मूर्तियां और आकृतियां उकेरी हुई हैं। यह मंदिर खुजराहो मंदिर जैसा लगता है। साथ ही प्रकृति भी मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाती है। डेढ़ सौ फीट ऊंचाई से गिरने वाला जलप्रपात मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाता है। देशभर के लाखों पर्यटक यहां आते हैं।

वहीं, स्मारक की जर्जर हालात को लेकर भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग के संरक्षक सहायक प्रेमचंद शर्मा कहते हैं कि मेनाल (Menal) का प्राचीन शिव मंदिर संरक्षित सूची में शामिल है। मंदिर के शिखर के नीचे पत्थर निर्मित तीन लैंटर में दरार के चलते जैक की मदद ली गई है, ये जैक सालों पहले लगाए गए थे, इन्हें जल्द हटाकर जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया जाएगा।

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