Connect with us

चित्तौड़गढ़

चितौड़गढ़ री राणी पद्मावती समेत 1600 लुगाइयाँ रो जोहर रो मार्मिक विरतांत, असल क्षत्राणियां री गाथा

Published

on

राजस्थान रे चित्तौड़गढ़ रै किलां रो इतिहास घणौ ही रोचक है।राणी पद्मावती रे जीवण री कहाणी वीरता, त्याग, सम्मान अर नै दिखावै। राजस्थान रै इतिहास म्है अगर कोई राणी रो इतिहास गौरवमयी है तो वो है राणी पद्मावती रो जीवण विरतांत। राणी पद्मावती, चित्तौड़गढ़ रे राजा रतनसिंह जी री राणी हा।इतिहासकारां री माना तो पद्मावती एक काल्पनिक नाम हिज है पण मलिक मुहम्मद जायसी री लिख्योड़ी ‘पद्मावत’ में राजा रतनसिंह री पटराणी पद्मावती ही कहीजै।

राणी पद्मावती रै जीवण री ज्यादातर बातां जायसी री लिख्योड़ी पद्मावत मूं ही सावळ मानी जावै।जायसी रै आखरां उँ पद्मावती सिंहल द्वीप रै राजा गंधर्वसेन अर पटराणी चंपावती री बेटी ही।पण इण लोक में आज ई पद्मावती नैं पूंगळ री मानीजै अर ओखाणौ है के – “तू कांई पूंगळ री पदमणी है?

चित्तौड़गढ़ रा राजा रतनसिंह कैई बरसां ताई योगी रै भेस में बठै रैवण री घणी कोसिसां पछै पद्मावती नै आपरी राणी बणा’र चित्तौड़गढ़ ले आया।राणी पद्मावती अथाह खूबसूरत ही।एक बार राजा रतनसिंह सूं अपमानित कवि, पंडित अर तांत्रिक राघव चेतन रे मुख सूं राणी पद्मावती रै रूप रो बखान सुण’र दिल्ली रो सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़गढ़ माथै आक्रमण कर देवे। अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़गढ़ री पुख्ता सुरक्षा रा इंतजाम देख न निराश हो जावे।

आठ महिनां तांई यु’द्ध करिया पछै भी अलाउद्दीन खिलजी जीत नई सक्यौ अर उणनै पाछौ जाणौ पड़े। पण खिलजी री पद्मावती नै देखण री चाह बढ़ती ही जावे, जिण वजै सूं वो रावल रतन सिंह नैं एक संदेस भेजे के वो पदमावती नैं एकर देखणौ चावै।अर राणी पद्मावती सूं वो एक भाई री हैसियत सूं मिलणौ चावै।केई चीजां सोच प्रा खिलजी री बात मान लेवै।

राणी पद्मावती मन मा’र आ बात मान लेवे। पण एक सरत राखै, के सुल्तान राणी नै सामै मुंडे नीं देख सकै, बस सीसै में राणी री एक झलक ईज देख सकेला। विसेस तैयारी री साथै खिलजी राणी नै देखे अर राणी री सुंदरता नै देख मुरछत हो हो जावै अर ठान लेवै के वा राणी ने कीकर भी पा’नै रहेवेला। खिलजी आपरै डेरा में पाछा आवता राजा रतन सिंह नै छल सूं बंदी बणा लेवे अर राजा ने मुक्त करणै रे सारूं सरत में पद्मावती री माँग करे।

जणे पद्मावती ई आपरै मान सम्मान रै ख़ातर छल रो साहरो लेण गोरा – बादल री मदद सूं घणेई वीरां रै सागे भेस बदळ’र राणी पद्मावती री सहेलियाँ बण पालकियाँ सूं दिल्ली पूग राजा रतनसिंह नै मुक्त करा लेवे। पण जद इण छल रो खिलजी नै पतो लागे, खिलजी पद्मावती रे सागे आयोड़ा सैंग राजपूतां माथै आ’क्रमण कर देवे। जिणमें सैंग राजपूत योद्धा मा’र दिया जावै, पण पद्मावती राजा नै ले’र चित्तोड़ पूग जावै।

इण हार सूं खिलजी क्रोधित हो ने चित्तौड़ माथै चढ़ाई कर देवै। किलै रे भीतर वो प्रवेश नीं कर सके जणै वो किलो तोड़नै रो आदेस देवे। किलो तोड़ियाँ नई टूटे। जणै खिलजी पूरे किला री घेराबंदी कर देवे। जिकाउं किला रे मांयनै खाणै अर पाणी री कमी होवण लाग जावै। अंत में राजा रतनसिंह किला रा दरवाजा खोलनै अर आखरी दम तक से’ना ने ल’ड़नै रो आदेस दे देवे। पद्मावती इण आदेस नै सावळ कोनी माने। पद्मावती कैवे के खिलजी री इतरी मोटी से’ना रे सामै चित्तौड़ री भूखी ती’री से’ना री हार हो जासी।रतनसिंह जद यु’द्ध रे मैदान सूं पाछा नई आवै जणे राणी पद्मावती किला रो दरवाजो भीतर सूं बन्द कर नै सगळी सोलह सौ लुगाइयाँ साथै आपरै मान सम्मान, आपरी मर्यादा नै बचावण रे सारूं जौहर कर खुद नै भसम कर लेवे।खिलजी नै राख़ रे सिवा कीं हाथ नीं लागे।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

   
    >