सरदारशहर में दो ईंटों से तैयार किया गया तेजाजी महाराज का विशालकाय मंदिर, जानें इसका रहस्य!

Bandau Tejaji Maharaj Temple: बनडाऊ, सरदारशहर, चूरू, राजस्थान।
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तेजाजी को आसरो,
विश्वास की है जीत।
जिसका जहां पर काम हो,
वहीं पड़ जाती है रीत।

दो ईंट से विशालकाय भवन तक का सफर।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे स्थान पर ले चलता हूं, जहां पर कुछ समय पहले दो ईंट से जिस मंदिर की स्थापना हुई थी।वह आज ऐसा विशालकाय मंदिर तैयार हो चुका है, जिस को देखकर आप दंग रह जाएंगे।

स्थान और परिचय।
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राजस्थान (Rajasthan) में चुरू जिले के सरदारशहर तहसील में बनडाऊ गांव में तेजाजी महाराज (Tejaji Maharaj) का एक ऐसा विशालकाय मंदिर है, जहां के पुजारी ने संवाददाता चुन्नीलाल से बात कर वहां की परिस्थितियों और मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताया। वहां पर बैठे हुए पुजारी ने अपना नाम रामप्रताप बताया और कहा कि यदि बाबा की कृपा हो तो दो ईंटों से महल तैयार हो जाता है। नहीं तो दो ईंट भी गायब हो जाती है। यह तो बस धोलिया जाट की कृपा का प्रताप है।
उन्होंने बताया कि इस कलयुग में शिव जी महाराज के वरदान से तेजाजी महाराज की पूजा हो रही है। तेजाजी महाराज लोगों का भला करते हैं, तरह-तरह के चमत्कार दिखाते हैं तब इस मंदिर का निर्माण हुआ है।
तेजाजी महाराज ने लोगों का भला किस प्रकार किया है,का जवाब देते हुए रामप्रताप जी कहते हैं कि आपके सामने आज यह दस साल का बच्चा देख रहे हो, इसका पैर बिल्कुल टेडा मेडा था। जो एक छोटे से ऑपरेशन से बिल्कुल सीधा हो गया है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की परिवार में परेशानी होने पर तेजाजी महाराज की भभूत से बिल्कुल परेशानी मिट जाती है। Bandau Tejaji Maharaj Temple
उन्होंने बताया कि जो नशे का आदी हो गया उसका नशा भी तेजाजी महाराज की कृपा से छूट जाता है। और हर प्रकार के कष्ट का भी यहां पर निवारण होता है। यहां पर लोगों का कैंसर भी ठीक हुआ है।

मेला कब लगता है।
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tejaji mandir news
मेला कब लगता है इसके जवाब में उन्होंने बताया कि महीने में सात दिन लोगों की मेला की भीड़ जमा होती है। द्वितीया, दशमी, चतुर्दशी तथा पूनम। एक पखवाड़े में चार तथा दूसरे पखवाड़े में तीन दिन तेजाजी महाराज का मेला लगता है।
आपको यह लगन कब लगी इसके जवाब में राम प्रताप जी कहते हैं कि मुझे बचपन से ही तेजाजी की भक्ति का दिल से प्रेम था। पहले मुझे ऐसे ही लगता था कि हल जोतने से पहले तेजाजी का नाम लेते हैं, लेकिन असल में फिर मुझे ज्ञान हुआ की तेजाजी में ही वह करामात है, जो आज किसानों की उन्नति हो रही है। और हर पशु सुख शांति के साथ जीवन यापन कर रहा है।
तेजाजी महाराज की पूजा का नियम किस प्रकार पूरा किया जाता है। इसके जवाब में वह कहते हैं कि गाय की पूजा उनकी भक्ति का एक मात्र बिंदु है। तेजाजी महाराज के इतिहास के बारे में बताते हुए वह कहते हैं कि उनका जन्म विक्रम संवत 1130 में हुआ था। और उनकी माताजी ने शिव जी महाराज की सेवा की थी। जिससे उन्होंने प्रसन्न होकर पुत्र भी दिया और साथ में यह भी वरदान दिया कि वह विलक्षण शक्ति पुरुष कलयुग में लोगों का भला करेंगे।

नाग देवता को बचाया।
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तेजाजी का जन्म खरनाल में एक जाट के घर में हुआ था।उनकी शादी एक साल की छोटी उम्र में ही कर दी गई थी। जब बड़े हुए तो भाभी ने बोल मारे और तेजाजी महाराज ससुराल में अपनी पत्नी को लेने के लिए गए। वहां लाछा गुजरी की गाय लाने के लिए डाकूओ से लड़ाई, नाग देवता को जलती अग्नि से बाहर निकाला तो वह क्रुद्ध होगए और तेजाजी महाराज को डस लिया और वरदान दिया।

अन्य।
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तेजाजी महाराज अपने नियम पर अडिग रहे, तभी शिव जी महाराज की कृपा से उनको कलयुग में दुनिया पूजती है। इस मंदिर की स्थापना को पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। और यह सब विकास लोगों का कष्ट निवारण होने के कारण हुआ है।
तेजाजी महाराज की जय हो।

अपने विचार।
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कुछ हुआ तो विश्वास हुआ,
विश्वास में अद्भुत ताकत।
सोच जब शुद्ध हो जाए,
तो बदल जाती है नजाकत।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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