छोटी उम्र में बड़ा मुकाम, 18 की उम्र में बना फ्लाईंग अफसर- चूरू के हेमंत स्वामी की प्रेरक कहानी

Bejwa Hemant Swami: हेमंत स्वामी बैजवा, राजगढ़, चूरू (Rajgarh Churu)।
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गांव छोटा है तो क्या हुआ,
आसमान तो बड़ा है।
हौसलों के पर लगा,
तेरा जमीर खड़ा है।

18 साल का लड़का आसमान को नापने लगा।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे नवयुवक से रूबरू करवा रहा हूं, जिसके हौसलों की उड़ान ने पूरे समाज को आश्चर्यचकित कर दिया। छोटी सी उम्र में उसने वह कर दिखाया जिसके चर्चे दूर-दूर तक सुगंध फैला रहे हैं। माता-पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।

परिवार और परिचय।
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चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के बैजवा गांव के रहने वाले हेमंत स्वामी ने अनीता से बात करते हुए अपनी उपलब्धि के विषय में विस्तार पूर्वक बताया। हेमंत ने बताया कि मैं मेरे माता पिता के साथ में बेंगलुरु में रहता हूं। और वर्ष में एक बार गांव आता हूं। मैंने अभी 2021-22 में एनडीए क्लियर किया है। और अभी फ्लाईंग ऑफिसर के पद पर ज्वाइन करने वाला हूं।
हेमंत ने बताया कि मेरी बचपन से ही रूचि थीकि मैं पायलट बनूं।जैसे-जैसे बड़ा होता गया तो इंटरनेट पर सर्च (Bejwa Hemant Swami)  करने लगा कि पायलट कैसे बना जाता है।उसके बाद में एनडीए का एग्जाम दिया और मैं उसमें सफल रहा। उन्होंने बताया कि मैं बचपन से ही एयरक्राफ्ट वगैरह को जब देखता था तो उनसे बहुत प्रभावित होता था।मेरे दिमाग में उनकी उड़ान और उनकी सुंदरता घर कर गई और मैं उसी जज्बे के साथ आगे बढ़ने लगा।

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मुझे प्रोत्साहित करने वालों में मेरी बड़ी बहन प्रीतम स्वामी और मोनू स्वामी और मेरे माता पिता का पूरा (Bejwa Hemant Swami)  सहयोग रहा है। मैंने 12th और एनडीए दोनों की एक साथ तैयारी कीऔर उसमें सफल हुआ। उन्होंने बताया कि मैं दिन में ट्वेल्थ की तैयारी करता था और रात को सात आठ घंटे एनडीए की तैयारी करता था। मेरे ट्वेल्थ में भी 95% नंबर आए हैं। और एनडीए की लिखित परीक्षा पास करने के बाद में मैंने फिजिकल पर ध्यान देना शुरू किया और दोनों में सफल हो गया मैं बहुत खुश हूं।

बच्चों के नाम संदेश।
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बच्चों के नाम संदेश देने पर हेमंत कहते हैं कि यह कोई सपना नहीं है इसमें सोच समझ कर एक लक्ष्य सेट करना पड़ता है। सपने रात को लिए जाते हैं और लक्ष्य दिन में सोच समझ कर सेट किया जाता है। इसमें व्यक्ति प्लानिंग के तहत हार्ड वर्क करता है और एक लक्ष्य पर निशाना लगाना होता है। इसमें गाइडेंस बहुत जरूरी होती है। परिवार के सकारात्मक विचार की मोटिवेशन की जरूरत है।

माता पिता के विचार।
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हेमंत के पिताजी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार जन्म के समय खुशी हुई थी,वैसीही खुशी आज पूरे परिवार को हो रही है।क्योंकि हम बच्चे कोअच्छी पढ़ाई कर वा रहे थे,लेकिन अचानक इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल हो जाएगी, यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। मैं बहुत ही खुश हूं।
ट्रांसपोर्ट लाइन में अपना व्यवसाय जमाने वाले हेमंत के पिताजी ने कहा , कि मैंने बच्चों को अच्छी से अच्छी स्कूल में पढ़ाई करवाई है।लेकिन कभी ट्यूशन कोचिंग सेंटर में नहीं भेजा, क्योंकि बच्चों ने इसके लिए साफ मनाकर दिया कि हम घर पर ही पढ़ाई करेंगे। ट्यूशन कोचिंग सब दिखावा है।उन्होंने बताया कि मैंने बच्चे को अभी तक मोबाइल नहीं दिया है। अपनी मम्मी के मोबाइल से ही कार्य करता है।
अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करता। फौजी नहीं हूं लेकिन अनुशासन घर में फौजी जैसा ही है। हेमंत ने आज अपनी दादी का सपना पूरा किया है, क्योंकि दादी को हमेशा कहता था कि मैं हवाई जहाज उड़ाऊंगा।

अन्य
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दादी जब ढेरे पर सूत कातती थी तब हेमंत कहता था, दादी (Bejwa Hemant Swami) यह हवाई जहाज मुझे देदे, मैं इसको उड़ाऊंगा। दादी ने कहा कि हम तो खेती करते थे लेकिन मेरे पोते ने आज हमारा नाम रोशन कर दिया। दादी ने कहा कि मैं आज 12 साल की हो गई। दोनों बहनों ने भाई के सफल होने पर अपने अपने अनुभव साझा किये और खुशी जाहिर की।

अपने विचार।
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लक्ष्य साधो मेहनत करो,
बिना मेहनत सब बेकार।
लगन मेहनत सब साथ हो,
तो होगा बेड़ा पार।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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