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चूरू

चूरू का 10वी पास युवा होनहार कारीगर जो पूरी दुनिया में बेच रहे है लाखों की कला

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दोस्तों जीवन में सब कुछ सरकारी विभाग पर निर्भर नहीं होता है।जीवन इतना सरलीकृत नहीं होना चाहिए।जिस काम में जो रुचि हो वह करना चाहिए।रुचि साहित्य में हो और तैयारी अभिनेता बनने की तैयारी कर रहे, मामला बैठता नहीं है।राजस्थान में तो सरकारी नौकरी ही लगभग अंतिम सत्य है। गली-गुवाड़ में बूढ़े-बडेरे कहते मिलेंगे – “पढ़ल्यौ लाडी, नौकरी बिना, के करोगा? छोरी कुण द्यैगो थानै?” लेकिन लड़कियों को यह भी नहीं पूछा जाता।उनको तो कई इलाकों में पढ़ाया ही नहीं जाता सो सवाल ही नहीं उठता ऐसा।

ख़ैर आज हम बात कर रहे चूरू के एक परिवार की जिसने सूक्ष्म कारीगरी से अपना लोहा मनवाया।इन दो कारीगर भाइयों का यह धन्धा पुश्तैनी नहीं है, हां इनकी माताश्री जरूर कुछ कारीगरी का काम करती रहती थी लेकिन वह प्रोफेशनल नहीं था।एक भाई बताते हैं कि दसवीं-ग्यारहवीं करके पढ़ाई तो छोड़ दी अब यही है जो है।जिन मूर्तियों का निर्माण ये लोग करते है और वे चंदन की लकड़ी से निर्मित हैं।ये मूर्तियां राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर तक आयोजनों में भ्रमण कर आती हैं, कुछ वहीं ठहर जाती हैं तो कुछ का मन नहीं लगता वहां।ये मूर्तियां दिखने में छोटी लगती हैं और छोटी हैं भी लेकिन खरीदने वाला मोटा होना चाहिए।माने कि पैसों वाला।एक कलाकृति तीन लाख की।कोई लाख की।यह कला का मूल्य है।

कारीगर जी बताते हैं कि शुरू से ही मुझे इस काम में बहुत रुचि थी और मैं इसे पढ़ाई के साथ इसे करता रहता था और बाद में जब ज्यादा ध्यान इधर बढ़ता गया तो पढ़ाई छोड़ दी और इसको ही अपना पैशा बना लिया।आज हम इनसे खूब अच्छा कमा लेते हैं।आ रही पीढिय़ां इन सब कामों से दूर भागती हैं, उनको तत्काल पैसा चाहिए जो कि इसमें सम्भव नहीं है।हालांकि मेरा भतीजा पढ़ाई के साथ साथ हम दोनों से यह काम सीखता है।चूरू में एक जांगिड़ परिवार और एक दो और को छोड़कर यह काम कोई नहीं करता।मुख्य कारीगर जी बताते हैं कि उनके गुरु परमेश्वर लाल जी भी यह कार्य करते थे।

वे बताते हैं कि ऑर्डर के हिसाब से हम वस्तु का निर्माण करते हैं।हम एक मूर्ति में उसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व भरने की कोशिश करते हैं।जैसे एक मूर्ति महाराणा प्रताप की है, इसमे उनके समय और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं के चित्र हैं।इसी प्रताप वाली कलाकृति को नेशनल अवार्ड भी मिला।मुकेश अम्बानी, हेनरी क्लिंटन, रतन टाटा, लक्ष्मी मित्तल, सचिन तेंदुलकर विशाल सिक्का सहित देश-विदेश के तमाम हस्तियों के घर तक हमारी कलात्मकता पहुंच चुकी है।तानसेन, कृष्ण आदि की जीवनी को एक ही कलाकृति में इन दो भाइयों की मेहनत ने समाया है।कुछ आइटम तो ऐसे अद्भुत बनाए हैं कि दर्शक देखते ही रह जाय।एक घड़ी, उसमें लालकिला, उसमें इंडिया गेट। एक बादाम उसमें निर्मित अलग अलग दृश्य। खूबसूरत कारीगरी किए हुए दृश्य।

   
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