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चूरू

घटिया कंकरीट से बना था चूरू का ROB पुल, 4 साल में हुई 4 बार मरम्मत- आमजन के लिए हो गया है बंद!

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Churu ROB Bridge News

Churu ROB Bridge News: चूरू और जयपुर को जोड़ने वली आरओबी (ROB) का नाम पूरे राजस्थान में मशहूर है।  चूरू जिले की यातायात सहूलियत को देखते हुए इसका लोकार्पण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने किया था। लगभग 30 करोड़ रुपए इस रोड़ को बनाने में लगे थे। लेकिन कुछ समय बाद ही इस रोड़ के क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आने लगीं। इसका लोअर हिस्सा गिर गया जिसके चलते इस बंद कर दिया गया। जांच तो की गई मगर उस पर कोई संजीदगी नहीं बरती गई और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई की गई। बस आरओबी (ROB) को आमजन के लिए बंद कर दिया गया ताकि किसी बड़े हादसे को न्योता न मिले।

चार साल में चार बार हुई मरम्मत

चूरू (Churu) और जयपुर (Jaipur) को लिंक करने वाली इस रोड़ की महज साढ़े चार साल के अंतराल में चार बार मरम्मत की गई है। गौरतलब है कि इस आरओबी को लगभग 28.58 करोड़ रुपए की लागत से बनवाया गया था। मगर अब यह रोड़ मरम्मत और इलाज की दरकार लिए खड़ा है। सवाल है कि आखिर इस रोड़ पर इतनी बड़ी राशि खर्च की गई तो मजबूती का नामोनिशान क्यों नही है? क्षतिग्रस्त होने पर इसकी उच्च स्तर पर शिकायत की गई तो जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और इसे फिर से मरम्मत के लिए सुपुर्द कर दिया गया। काफी मरम्मत और फिर एक बार रुपए खर्च करने के बाद भी हालात ऐसे हैं कि इसे भारी वाहन के लिए बंद किया हुआ है। हालांकि छोट वाहनों के आने-जाने के लिए इसे खोला हुआ है।

जांच नहीं, होते हैं ढकोसले

Churu ROB Pool News

आरओबी (Churu ROB Pool News) के निरीक्षण के लिए मुख्य इंजीनियर ने 28 सितंबर, 2018 को आदेश जारी किए। जिसमें इसकी जांच के लिए कमेटी का भी गठन किया गया- इसमें ब्रिज की कंकरीट की गुणवत्ता की जांच, ब्रिज कंसलटेंट की सर्विस के लिए आरयूआईडीपी (RUIDP ) को निर्देश दिए गए कि इसकी जांच बेहद करीब से की जाए लेकिन RUIDP ने इस जांच को सड़क को सानिवि खंड चूरू को सौंप कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद आरओबी के निर्माण में निष्कर्ष निकला कि इस्तेमाल की गई कंकरीट डांवांडोल है। जानकारी के मुताबिक दिनांक 17 जनवरी, 2019 को इस बाबत मीटिंग हुई जिसमें आरओबी की गुणवत्ता की टेस्टिग कराने का निर्णय किया गया था। जयपुर की फर्म ने इसका निरीक्षण कर दिनांक 5 अगस्त, 2019 को इसकी रिपोर्ट पेश की जिसमें कंकरीट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए गए तथा कंकरीट को संदेहास्पद घोषित कर दिया गया मगर तब से लेकर आज तक न तो इस पुल से संबंधित ठेकेदारों और फर्म से जुड़े हुए अधिकारियों पर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है।।

21 अप्रैल, 2013 को हो गया था काम खत्म

आरओबी का निर्माण कार्य 21 अप्रैल, 2013 को समाप्त हो गया था। इसक पश्चात सानिवि के राष्ट्रीय राजमार्ग विंग को आरओबी को सौंप दिया गया था।  दिनांक 21 अप्रैल, 2018 को पुल की डिफेक्ट लाइबिलिटी भी समाप्त हो गई थी। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, एक पुल की आयु कम से कम 50 साल होती है लेकिन यह पुल तो 6 साल भी टिक नहीं सका- यह पुल अब इंजीनियरों, ठेकेदारों और सरकार की दक्षता, योग्यता तथा ईमानदारी पर सवाल खड़े कर रहा है।

आरओबी (ROB) का कोई फायदा नहीं

आरयूआईडीपी (RUIDP) द्वारा निर्मित इस आरओबी पुल के क्षतिग्रस्त होने से डेली तकरीबन 10 हजार वाहन आते और जाते हैं। इस पुल की बहुत सालों से डिमांड थी- लेकिन चूरू और जयपुर की जनता को इसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि कुछ समय के लिए इस पुल से राहत भी मिली लेकिन जब इसका मलबा गिरने लगा तो जिला प्रशासन ने इस पुल के आवागमन पर रोक लगा दी। कलेक्टर की सूचना पर ही आरयूआईडीपी (RUIDP) को जांच के लिए कहा गया जांच के बाद टीम ने माना की छोटे वाहनों के आवागमन के लिए मंजूरी दी जा सकती है। मगर प्रदेश की जनता के जेहन में अभी तक यह सवाल बरकरार है कि इतने बड़े पुल (Churu ROB Bridge News) जिसे करोड़ों की लागत से बनाया गया था, क्या वह इतना कमजोर ठहरा कि वह चार पहिया वाहन का भार भी वह नहीं झेल सकता। मौजूदा वक्त मे आरओबी पुल लोगों को खूब निराश कर रहा है।

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