डॉक्टर अनुरोध का यह व्यवहार आपको भी उनका मुरीद बना देगा, ऐसे पाया आला मुकाम

Dr Anurodh Aggarwal Churu: डॉक्टर अनुरोध अग्रवाल चूरू राजस्थान।
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हंस बोल कर ठहाके लगा लेते,
परिवार और यारों के साथ।
तो नहीं खोलना पड़ता यह दिल,
आज इन औजारों के साथ।

सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला डॉक्टर अंतर्राष्ट्रीय मंच तक।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी महान विभूति से रूबरू करवा रहा हूं, जिसने अपनी पूरी पढ़ाई सरकारी स्कूल में पढ़ने के बाद तथा अपना बचपन एक छोटे से गांव में गुजारने के बाद डॉक्टर बना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्व विख्यात हुआ।

परिवार और परिचय।
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चूरू (Churu) जिले के तारानगर (Taranagar) तहसील के सातू गांव (Satu Village) निवासी डॉ अनुरोध अग्रवाल (Dr. Anurodh Aggarwal) ने हमारे संवाददाता दीप से बात कर अपने बचपन की तथा शिक्षा से संबंधित पूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि मैं मेरे छोटे से गांव की सरकारी स्कूल में पढ़ कर ही बड़ा हुआ हूं। उन्होंने बताया कि मैंने तारानगर (Taranagar) के सरकारी स्कूल से बारहवीं पास की है। सरकारी स्कूल में भी बहुत अच्छे शिक्षक होते हैं पढ़ाई अच्छी होती है। यह केवल हमारी सोच का फर्क होता है कि जहां महंगी पढ़ाई होती है, वहां पर अच्छी पढ़ाई होती है।मेरे साथ के बहुत से सहपाठी बड़ी-बड़ी पोस्टों पर कार्य कर रहे हैं सरकारी स्कूल में पढ़ कर।
अनुरोध अग्रवाल कहते हैं कि जिसमें जज्बा होगा, अनुशासन होगा और मेहनती होगा, वह जहां भी पढ़ाई करेगा तो आगे निकलेगा,उसको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।यदि आप जीवन लक्ष्य के प्रति समर्पित भाव से आगे नहीं बढोगे तो चाहे कहीं भी पढ़ाई करो सफल नहीं हो सकते। उन्होंने बताया मेरी इच्छा मेडिकल में जाने की थी। ह्रदय रोग विशेषज्ञ बनना मेरा सपना था, तो उसकी पढ़ाई के लिए मैं कोटा (Kota)गया। Dr Anurodh Aggarwal Churu

ह्रदय रोग विशेषज्ञ बनना मेरा सपना।
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अनुरोध अग्रवाल  (Anurodh Aggarwal) कहते हैं कि मैं हमेशा से अखबार में हृदय रोग से संबंधित और उसके साथ में जुड़े हुए डॉक्टर के समाचार हमेशा पढ़ ता रहा हूं।तो मुझेभी इस लाइन में जाने का भूत सवार हो गया। मैंने मेरे घर वालों को भी बता दिया था, तो घरवालों ने कहा कि बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी और लंबा समय लगेगा।
कोटा की पढ़ाई के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि कोटा से मुझे न केवल पढ़ाई की शिक्षा मिली है,बल्कि जीवन शिक्षा भी मिली है। वहां पर परिपक्वता आती है, अनुशासन आता है और कंपटीशन की भावना पनपती है। मुझे वहां का माहौल बहुत अच्छा लगा। आपने पूरी मेडिकल की पढ़ाई अंग्रेजी में की तो उसमें आप को दिक्कत नहीं आई। उस पर वह कहते हैं कि पढ़ाई के प्रति आपका समर्पण भाव होना चाहिए।आपको लैंग्वेज में दिक्कत नहीं आएगी आज मैं मारवाड़ी में इंटरव्यू दे रहा हूं, इस पर मुझे गर्व होता है अपनी भाषा पर कमांड होना चाहिए।

MBBS की डिग्री।
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अनुरोध अग्रवाल कहते हैं कि मैंने कोटा में एक साल तैयारी की उसके बाद में 2009 में एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। फिजीशियन बनने हेतु मैंने एस एम एस हॉस्पिटल जयपुर से एमडी की डिग्री 2014 में हासिल की। उसके बाद डीएम की डिग्री मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से प्राप्त की। उन्होंने बताया कि घर वालों का सहयोग, परिवार जनों का आशीर्वाद, ईश्वर की मेहरबानी तथा दोस्तों की प्रेरणा से ही मैं आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं।

रिसर्च पेपर पब्लिश करना।
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अनुरोध अग्रवाल कहते हैं कि मैंने ह्रदय रोग से संबंधित 320 रोगियों पर रिसर्च करने के बाद में नई नई तकनीक से होने वाले उपचार पर रिसर्च पेपरभी पब्लिश किये है।पुराने जमाने में डॉक्टर नाड़ी देखकर बीमारी का पता लगाते थे, उसी नाड़ी के द्वारा एंजियोग्राफी, एनजीओ प्लास्टी करना कितना कारगर है, इस पर मैंने रिसर्च किया और मैंने इसको बहुत ही कारगर और सफल माना।
वह कहते हैं कि मैंने हमारे सेंटर पर जितने भी ऑपरेशन हृदय रोग से संबंधित किए हैं वह सब नाड़ी के द्वारा ही किए हैं, तथा अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। एक बार मैं पेरिस गया था वहां पर एक डॉक्टर जो 1992 से इस प्रकार के ऑपरेशन कर रहा है।

पत्नी का साथ।
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वह कहते हैं कि मुझे मेरी पत्नी का भरपूर सहयोग मिला। मैं जहां भी सम्मानित हुआ, मेरी पत्नी का सहयोग हमेशा मेरे साथ रहा है,इलाज करते समय आपके ऊपर कितना मानसिक दबाव रहता है, इसके जवाब में डॉक्टर अनुरोध कहते हैं कि दबाव रहता है लेकिन उसको हावी मत होने दो। आप हमेशा अपनी सकारात्मक सोच के साथ में काम करते रहो।
ह्रदय रोग बढ़ने के जवाब में वह कहते हैं कि ग्रामीण रहन-सहन और खाना पीना छोड़ना ही इसका मुख्य कारण रहा है। व्यक्ति ने मेहनत करनी छोड़ दी तथा तरह तरह के जंक फूड खाना शुरू कर दिया, यह उसीका नतीजा है।

अन्य।
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डॉक्टर बनने के लिए मैं बच्चों को यही कहना चाहता हूं कि आपकी मेहनत व समर्पण भाव यदि पढ़ाई के प्रति है, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। आपके पास जितनी ज्यादा गाड़ी घोड़े होंगे, आपका ध्यान उतना ज्यादा उनकी तरफचला जाएगा इसलिए उनका कम से कम प्रयोग करो। अपने कौशल की तरफ ध्यान दो।अंत में उसी की परीक्षा होती है। Dr Anurodh Aggarwal Churu

अपने विचार।
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भाव से भगवान मिले,
और भाव से मिलती मंजिल।
भाव विभोर जहां भी आए,
इन सब के पीछे है दिल।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

पूर इंटरव्यू देखें…

 

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