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चूरू

नहीं देखा होगा ऐसा गौ भक्त जिसकी बांसुरी सुन गायें हो जाती है दीवानी, थनों से सीधा पीता दूध

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जो करता है गाय की भक्ति,
उसकी बढ़ती अंदर की शक्ति।
गौमाता तो सब की माता है,
जन्म मरण से दिलाए मुक्ति।

गौ सेवा का अनूठा रिकॉर्ड धारी गौ भक्त।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे गौ भक्त से मिलवाना चाहता हूं जिनका नाम रवि लुनिया (Ravi Lunia) है। जिसने गौमाता से संबंधित लगभग सभी वस्तुओं का कलेक्शन कर रखा है। जिस पर गौ भक्ति का जुनून सवार है। सरदारशहर (Sardarshahar) के रहने वाले बड़े दिल के भक्त के पास इस समय 56 गाएं हैं। अपने घर के ही एक बाड़े में इन सब 56 गायों का भरण पोषण करते हैं। यह सामान्य प्रवृत्ति की देसी नस्ल की एक ही गाय की पैदाइश है।

आपके मन में यह विचार कैसे आया।
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शुरुआत के बारे में अपने विचार रखते हुए भक्त ने बताया कि मुझे जन्म से ही गोभक्ति का शौक था। हमारे घर में एक देसी गाय थी। उससे ही आज मेरे पास में 56 गाएं हैं। मैं सब का नामकरण तथा जन्म दिवस का रिकॉर्ड रखता हूं। उन्होंने बताया की किसी भी गाय या बछड़े को जब मैं नाम लेकर पुकारता हूं, तो वह मेरे पास दौड़कर आता है। मैं जिस प्रकार उनसे प्यार करता हूं, उसी प्रकार वह भी मुझसे प्यार करते हैं।

यदि कोई व्यक्ति मुझे नुकसान पहुंचाना चाहता है, और किसी गाय ने या बछड़े ने देख लिया तो वह कुत्ते की सेवा भक्ति की तरह दौड़ कर मेरे पास आती है, और उस व्यक्ति को भगा देती है, एवम् उसको नुकसान पहुंचाने का पूरा प्रयास करती है।

गायों का पालन पोषण।
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गायों का खर्चा उठाने की बात पर वह बताते हैं, कि मैं इनका खर्चा मेरे घर से ही उठाता हूं। और घरवाले मेरा पूरा साथ देते हैं। मुझे गाय की मूर्तियां, गाय की फोटो की कोई भी वस्तु, पुस्तक, अखबार की कटिंग जो गाय से संबंधित हो, वह मैंने 15 साल की उम्र से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया। आज मेरे पास में बहुत बड़ा इनका कलेक्शन है। बाजार में मिलने वाले गाय के पोस्टर, गाय की फोटो के खिलौने आदि वस्तुओं को मैं बड़ी शिद्दत से संभाल कर रखता हूं। वर्तमान में गाय के टिकट, गाय के नोट, गाय के सिक्के, गाय पर लिखी हुई अनेकों लेखकों की पुस्तकें आदि मेरे पास में है।

गाय की किस्म के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि यह सब चूरू (Churu), सरदारशहर, हरियाणा (Haryana) की राठी से मिक्स नस्ल की गाय हैं जिनकी सब की उत्पत्ति मेरी एक ही गाय से हुई है। गायों की परवरिश की बात करने पर उन्होंने बताया, और नाम ले लेकर बुलाकर भी दिखाया।उन्होंने कहा की गाय अपने बच्चे से भी ज्यादा मुझको स्नेह करती है। मैं इनको ज्यादा से ज्यादा स्वतंत्र रख ने की कोशिश करता हूं ।क्योंकि गाय आपस में लड़ती हैं, खेलती है, अपने आप पानी पीती हैं, उतनी ही स्वस्थ रहती हैं।

अन्य।
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उन्होंने बताया कि मैं सुबह 5:00 बजे उठता हूं। उसके बाद में गायों का दूध निकालना इनको चारा डालना आदि काम करता हूं। और दिन में जैसे ही मेरे को समय मिलता है,। इनसे संबंधित वस्तुओं का संग्रहण करता हूं जिससे मुझे आत्मिक शांति मिलती और मुझे अच्छा लगता है।

अपने विचार।
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गो भक्ति का जुनून ऐसा,
वह ऐसा काम कर जाएगा।
रिकॉर्ड ऐसा बना देगा,
एक दिन झंडा वही फहराएगा।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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