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चूरू

राजस्थान का लाल 13वी रैंक के साथ बना IAS, लहराया पूरे देश में परचम बताये!पढाई करने के तरीके

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दोस्तों नमस्कार। दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से मिलाने जा रहा हूं। जिसने चूरू का राजस्थान में और भारत में नाम रोशन किया है। उनका कहना है कि जिसने घड़ी की और समय की इज्जत नहीं की और वह चाहता है कि समाज मेरी इज्जत करें ऐसा नहीं हो सकता। उनका नाम है गौरव बुडानिया चूरू राजस्थान। इन्होंने आरएएस में 12वा स्थान और आईएएस (IAS) में ऑल इंडिया रैंक में 13वा स्थान प्राप्त कर चूरु, राजस्थान का नाम रोशन किया है।

राजस्थान में प्रथम रैंक प्राप्त करने वाले गौरव का कहना है कि अंडे के अंदर जोर पड़ता है तो चूजा निकलता है। और जब बाहर से जोर पड़ता है। तो केवल आमलेट बनती है। इसलिए पढ़ाई अंदर की आवाज और मेहनत से करो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

शिक्षा : IAS गौरव बताते हैं कि मेरी आठवीं तक की पढ़ाई आदर्श विद्या मंदिर से यहीं पर हुई थी। नौवीं और दसवीं क्लास सिंघानिया स्कूल से तथा बाद में 11वीं और 12वीं क्लास के लिए सीकर चला गया। उन्होंने बताया की 11वीं में आईआईटी जेईई की तैयारी शुरू की थी। 12वीं के साथ में जेईई मेंस में मेरा चयन हो गया था। उसके बाद में उनका एडमिशन आईआईटी बीएचयू में हुआ। वहां से ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ साथ में प्रशासनिक सेवा की पढ़ाई की तैयारी भी जारी रखी।

पिता का सपना : IAS गौरव के परिजनों का कहना है कि इन्होंने अपने पिता कबीरसर चूरू के वरिष्ठ अध्यापक राम प्रताप जी बुडानिया एवं ताऊ स्वर्गीय श्रवण कुमार जी बुडानिया का सपना साकार किया है। गौरव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया है। माताजी संतोष देवी ग्रहणी है। सब्जेक्ट के बारे में पूछने पर गौरव बताते हैं की लड़कों को खुद अपना एक टारगेट फिक्स करना चाहिए कि मुझे आगे क्या बनना है उसी के अनुसार सब्जेक्ट लेना चाहिए। बच्चों के ऊपर सब्जेक्ट थोपना नहीं चाहिए।

उनकी रूचि के अनुसार ही उसे सब्जेक्ट दिलवाना चाहिए। गौरव बताते हैं कि मैंने मैथ्स ली थी लेकिन आर ए एस और यूपीएससी की एग्जाम क्लियर की है। अर्थात सब्जेक्ट इतना मायने नहीं रखता है, जितना आप की मेहनत और आपका जज्बा रखता है। और आप यदि मेहनत से नहीं पढ़ोगे तो कोई सरल नहीं है और कोई कठिन नहीं है।

वह बताते हैं अपने यहां के लोग डॉक्टर, इंजीनियर, पटवारी, मास्टर से आगे की सोचते ही नहीं है। उनको यह मालूम नहीं है कि आगे भी एक बड़ी दुनिया है। अब मैं इन सब को मोटिवेट करूंगा और बताऊंगा की आगे की तैयारी कैसे करनी है, और कब करनी है। लोग बाग बहानेबाजी बनाते हैं कि मेरे पास साधन नहीं है, मैं गरीब हूं, ऐसे हैं वैसे है। अब मैं खुद का मेरा चैनल बनाऊंगा और पढ़ाऊंगा कि पढ़ो। जितना मैं पढ़ा सकता हूं मैं पढ़ाऊंगा या मेरे दूसरे साथी को ले आऊंगा। लेकिन अब पढना तो खुद को ही पड़ेगा।

मैं साइकिल का स्टेरिंग पकड़वा सकता हूं लेकिन पैडल तो खुद को ही मारने पड़ेंगे। कोचिंग के बारे में पूछने पर गौरव बताते हैं कि मैं जहां तक सोचता हूं। कोचिंग में जाना जरूरी नहीं है। आज यूट्यूब पर ऐसी कौन सी पढ़ाई है जो नहीं है। फिर भी आप चाहो तो कुछ समय के लिए कोचिंग जा सकते हो अन्यथा कोई जरूरी नहीं है।

आगे आपका क्या विचार है आप किस प्रकार काम करेंगे : इसके जवाब में गौरव बताते हैं कि मेरा पहला काम यह होगा कि मैं बच्चों को बताऊंगा की पढ़ाई कैसे की जाती है। किस प्रकार की जाती है। शहर के बच्चों और गांव के बच्चों के दिमाग के वजन में, उसकी साइज में कोई अंतर नहीं है। तो फिर फर्क कहां है। इसलिए सबसे पहले मेरा काम यह होगा कि उनको पढ़ाई के बारे में बताऊंगा।

इसके आगे बताते हैं कि मेरा पहला फॉक्स पीने के पानी पर होगा जो हम खारा पानी पीते हैं। दूसरा महिला शिक्षा पर, बाल अपराध पर, जो बोलकर नहीं बताते हैं। रिश्वत बाजी और नकल बाजी के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि हम जो पानी पीते हैं वह 10 परसेंट सही है। तो क्या हम पानी पीना छोड़ देंगे। दो पर्सेंट सीट उनकी निकाल दो।

आप 98% के ऊपर फॉक्स करो। वह बताते हैं कि मुझे देखो मैंने भी दोनों बड़े एग्जाम किस प्रकार अच्छी रैंक से पास किए हैं। यह सब मेहनत पर निर्भर करता है। अपनी गलती को सुधारने की कोशिश करो। दूसरे की तरफ मत देखो। जिस दिन देखने लायक हो जाओ उस दिन सिस्टम में सुधार करवा देना। पढ़ाई किस प्रकार करनी चाहिए का जवाब देते हुए गौरव बताते हैं की एक कठोर मेहनत और दूसरी स्मार्ट तरीके से।

मुझे भी 25 साल बाद में मालूम पड़ा है कि पढ़ाई किस प्रकार करनी चाहिए। पैदल चाल और मोटरसाइकिल से चलने का उदाहरण देकर इसका सटीक जवाब दिया। अंत में नकल गिरोह का विरोध करते हुए गौरव ने बताया कि मैं इसका सख्त विरोधी हूं। उन माता-पिता का विरोधी हूं जो अपने बच्चों को भ्रष्टाचार के द्वारा पास करवाते हैं।

अपने विचार। 

दूसरे की गलती निकालोगे, तो निकालते ही रह जाओगे। अंदर देखो अपने, सफल हो जाओगे।

विद्याधर तेतरवाल, मोतीसर।

   
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