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चूरू

चूरू की गौशाला में वह चम’त्कारी गाय जो करती है हर समस्या का निवारण

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चुरू जिले की एक गौशाला जहां पर मान्यता है कि एक चम’त्कारी गाय हर समस्या का निवारण कर देती है। गौशाला की स्थापना की बात करे तो 14 अगस्त 2015 को इसकी स्थापना की गई। 15 मित्रों की एक मंडली ने बीमार गायों की सेवा को ध्यान में रख कर इसकी शुरुवात की जो अब धीरे धीरे लोगों में आस्था का विषय बनती जा रही है।
गौशाला की सबसे रोचक बात ये है कि यहां पर जो भी गाय लाई जाती है वो बीमार ही होती है और उसकी सेवा की जाती है, उसकी देखभाल की जाती है और जब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाती है तब उसे दूसरी गौशाला में स्थान्तरित कर दिया जाता है।

गौशाला के नामकरण की बात करें तो चुरू जिले में बालाजी के प्राचीन मंदिर हनुमानगढ़ी के नाम पर ही गौशाला का नाम हनुमानगढ़ी गौशाला रखा गया है। इसके पीछे का कारण है कि हनुमानगढ़ी मंदिर का राजस्थान में बहुत नाम है दूर डर से श्रद्धालू यहां दर्शन करने के लिए आते रहते है। बालाजी की शरण मे स्थापित होने के कारण ही इसका नाम हनुमानगढ़ी गौशाला रखा गया।

गौशाला में जैसे ही हम प्रवेश करते है तो सामने की तरफ हमे गायों की पानी पीने के लिए हौद, चारा खाने के पात्र आदि बने हुए है। उनके बैठने की व्यवस्था भी बहुत अच्छे तरीके से की गई है। थोड़ा अंदर जाते है तो माँ गंगा आरती स्थल नाम से के छोटा सा मंदिर दिखाई देता है। यह मंदिर भी अपने आपमें रोचकता का विषय है। इस मंदिर में किसी देवी, देवता की पुजा अर्चना नहीं कि जाती और न ही किसी मूर्ति को स्थापित कर उसकी पूजा अर्चना की जाती हैं। दरअसल इस मंदिर में साक्षात गौं माता की आरती की जाती है।गौ माता की आरती की जाती है। गौशाला की स्थापित करने वालो की मान्यता है कि इन्ही गौ माता के आशीर्वाद से, इन्ही की अनुकम्पा से हर समस्या का निर्वाण हो जाता है। इतनी बड़ी गौशाला को चलाने के लिए पैसों की व्यवस्था कब कहा कैसे होती है इसकी जानकारी किसी को नहीं है, सबकी मान्यता है कि गौ माता के आशीर्वाद से सारे काम अपने आप हो जाते है। सुबह शाम दोनो वक्त गौ माता की विधिवत पूर्वक पूजा की जाती है।

जन मानस के ह्रदय में आस्था स्थापित कर चुकी यह गौशाला अब राजनेताओं के आस्था का विषय भी बन रही है। बहुत से स्थानीय नेता अक्सर यहां का दौरा करते रहते है, यहां पर अपना जन्मदिन मनाते है उस दिन गायों की सेवा करते है। गौशाला संचालक का मानना है कि गौ माता का सनातन धर्म मे एक विशेष महत्व है। प्राचीन काल से गौ माता की पुजा हम करते आए है । कालांतर में आकर कुछ समय के लिए लोग इससे दूर जा चुके थे पर अब धीरे धीरे लोग इस और पुनः लौट रहे है ये खुशी की बात है, आज लोग अपने जीवन में विशेष महत्व रखने वाले दिन यहां आकर गौ माता की सेवा का लाभ उठाते है ये खुशी की बात है।

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