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चूरू

गरीब परिवार का व्यक्ति बना दुनिया का स्टील किंग, लक्ष्मी मित्तल के फौलादी इरादों की कहानी

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आज आपको बताते हैं एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिसने एक ऐसे गांव में जन्म लिया जहां बिजली तक नहीं आती थी। लेकिन वह बन गया दुनिया का स्टील किंग। हम बात कर रहे हैं, लक्ष्मी मित्तल 15 जून 1950 को राजस्थान के चुरू जिले के सादुलपुर कस्बे में जन्मे लक्ष्मी मित्तल आज दुनिया का जाना माना नाम है। लक्ष्मी मित्तल सादुलपुर में रहा करते थे, तब बताते हैं कि 1960 तक उस गांव में बिजली तक नहीं आई थी।

उनका एक छोटा सा घर था,जिसमें 25 लोग रहा करते थे और वह खुद भी दरी पर सोते थे। इसके बाद उनके पिता मोहनलाल मित्तल ने कोलकाता जाने की सोची और वहां जाकर मेहनत करके स्टील मिल लगाई। स्कूल के बाद लक्ष्मी भी अपने पिताजी की मदद करवाते थे। इसी कोलकाता में एक बढ़िया किस्सा लक्ष्मी मित्तल का है, कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज में जब लक्ष्मी मित्तल एडमिशन लेने गए तो कॉलेज ने दाखिला देने से मना कर दिया। लेकिन उसके बाद किसी तरीके से उनका एडमिशन हुआ और लक्ष्मी मित्तल ने अपनी समझदारी का सबूत कॉलेज में टॉप करके दिया।

संघर्ष भरी जिंदगी

जब देश में आपातकाल की स्थिति थी। जब सब काम रुक गया था,तब भारत के एक छोटे से गांव का रहने वाला लड़का इंडोनेशिया के सिदोअरजो में पीटी इस्पात इंडो की स्थापना कर रहा था। साल 1990 तक नागपुर में शीट स्टील की कोल्ड रोलिंग मिल मित्तल परिवार के पास थी। पुणे में भी उनके पास एलाय स्वरल संयंत्र था।

हर क्षेत्र में किया काम

लक्ष्मी मित्तल ने हरे क्षेत्र में काम किया है। वह शिक्षा के क्षेत्र में,स्वास्थ्य के क्षेत्र में, जनहित के काम करते रहते हैं। साल 2003 में राजस्थान सरकार के साथ मिलकर जयपुर में एमएनएम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की स्थापना की। वहीं लंदन में ग्रेट ओरमोड़ स्ट्रीट अस्पताल को डेढ़ करोड़ पौंड का चंदा दिया। मित्तल ने मित्तल चिल्ड्रन मेडिकल सेंटर की स्थापना भी की।
साथ ही उनके गांव के निवासी बताते हैं कि वह गांव के लिए भी जनहित में कार्य करते रहते हैं। लक्ष्मी मित्तल ने अपने गांव में एक कंप्यूटर केंद्र की स्थापना की है। जहां गांव की,जिले की सभी लड़कियों को 50 पर्सेंट की छूट पर कंप्यूटर सिखाया जाता है। साथ ही स्वरोजगार केंद्र भी वहां पर स्थित है। इसी के साथ गांव में उनकी मां के नाम पर उन्होंने सामुदायिक भवन की भी स्थापना की है। लक्ष्मी मित्तल कोलकाता जाने के बाद दुनिया में नाम कमाने के बाद गांव में तीन बार गए हैं। वह अपने बेटे आदित्य मित्तल की जडूला उतरवाने भी गांव गए थे।

कई पदों पर रह चुके हैं लष्मी मित्तल

लक्ष्मी मित्तल प्रधानमंत्री के वैश्विक सलाहकार,साथ ही कजाकिस्तान के फॉरेन इन्वेस्टमेंट काउंसिल, इंटरनेशनल बिजनेस कमेटी के सदस्य भी रह चुके है।साथ ही विदेश के भी कई पदों पर लक्ष्मी मित्तल रह चुके हैं।

लक्ष्मी मित्तल को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। बिजनेस पर्सन ऑफ द ईयर, पर्सन ऑफ द ईयर,वहीं विश्व के 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में भी लक्ष्मी मित्तल का नाम दर्ज किया जा चुका है। फोर्ब्स ने विश्व के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में साल 2006 में लक्ष्मी मित्तल को चौथा स्थान दिया था।

इस समय लक्ष्मी मित्तल ने लंदन किंग्सटन पैलेस गार्डन में रहते हैं। साल 2004 में उन्होंने यह घर 865 करोड रुपए का खरीदा था, जो उस वक्त दुनिया का सबसे महंगा घर था। लक्ष्मी मित्तल आर्सेलर मित्तल कंपनी के अध्यक्ष है। 2लाख कर्मचारियों वाली यह कंपनी का सालाना टर्नओवर 4.5 लाख करोड रुपए का है। लक्ष्मी मित्तल को भारत सरकार द्वारा 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। लक्ष्मी मित्तल की कहानी हरेक गरीब व्यक्ति को प्रभावित करती है जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता है। लक्ष्मी मित्तल एक छोटे से गांव से उठकर विश्व मैं स्टील किंग बन कर सामने आए हैं ।

लक्ष्मी मित्तल की कंपनी स्टील उत्पादन में दुनिया का 10वा का हिस्सा रखती हैं। पेशेवर इंग्लिश फुटबॉल क्लब की क्वींस पार्क रेंजर्स में उनकी 33% हिस्सेदारी हैं। जिस गांव में बिजली नहीं आती थी वहां का लड़का आज विश्व में स्टील किंग बन गया। जीवन को प्रभावित और प्रेरित करने वाली यह कहानी है लक्ष्मी मित्तल की।

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