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चूरू

चूरू की बेटी फाइटर पायलट प्रतिभा पूनिया की 6 बार असफलता से सफलता की कहानी, जिले का किया नाम

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एक फिल्म का डायलॉग हम सभी ने जरूर सुना है कि “म्हारी छोरियां छोरों से कम है के” तो इस बात को सच्चा साबित करती चूरू की प्रतिभा पूनिया की कहानी आज हम जिक्र करेंगे। वो कहते हैं ना कि अगर मेहनत और दृढ़ निश्चय करके किसी लक्ष्य को पाने की मन में ठान लो तो वह लक्ष्य जरूर हम पा सकते हैं। राजस्थान की प्रतिभा पूनिया ने यही साबित किया।

प्रतिभा पूनिया राजस्थान के चूरू जिले की सादलपुर उपखंड के गांव नरवासी की रहने वाली हैं। उनके पिता छोटू राम पूनिया रिटायर्ड सैनिक है, उनकी मां उर्मिला पूनिया घर से संभालती हैं। गांव से पढ़ाई पूरी करने के बाद प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने राजकीय महाविद्यालय बीकानेर से बीटेक किया। बचपन से ही प्रतिभा पायलट बनना चाहती थी,वह पायलट बनना चाहती थी। इसीलिए 7 बार परीक्षा देने के बाद 6 बार तो वह केवल साक्षात्कार तक पहुंची और फेल हो गई। सातवी बार एग्जाम पास करके भारतीय वायु सेना के दस्ते में शामिल हो गई।

उनके पिता बताते हैं कि प्रतिभा बचपन से ही प्रतिभा की धनी है। पेंटिंग और घुड़सवारी का उनकी बेटी को बेहद शौक है। घुड़सवारी के चलते दिल्ली में होने वाली परेड में भी शामिल हो चुकी हैं, साथ ही इसके लिए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें सम्मानित भी किया है। वही प्रतिभा अपनी मेहनत के पीछे बताती है कि मेहनत के बल पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

वह 6 बार फेल हो गई लेकिन उन्होंने लगन और मेहनत से अपना लक्ष्य पाने की ठानी और सातवीं बाहर एग्जाम पास करके भारतीय वायुसेना में शामिल हो गई। प्रतिभा ने देहरादून में परीक्षण किया और राजस्थान की दूसरी महिला पायलट बन भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुकी हैं।

प्रतिभा पूनिया ने जनवरी 2017 में भारतीय वायुसेना में पायलट बनने का सपना लेकर एक बार फिर आवेदन किया। 2017 में उन्होंने एग्जाम दीया और 17 दिसंबर 2017 को हैदराबाद के डुंडीगल एयर बेस में ट्रेनिंग के लिए पहुंची। दरअसल हैदराबाद में स्थित डुंडीगल एयर बेस फाइटर पायलट के शुरुआत ट्रेनिंग का सबसे पहला कदम है। यहीं से पायलट की ट्रेनिंग शुरू होती है और इसी के बाद उनका चयन होता है। भारतीय वायु सेना में तीन तरह के पायलट होते हैं। पहले तो वह जो ऐसे हवाई जहाज उड़ाते हैं जो भारतीय वायु सेना के लिए सामान लाने ले जाने का काम करते हैं।

दूसरे पायलट हेलीकॉप्टर उड़ाते हैं, हेलीकॉप्टर किसी आपदा के समय भगवान का रूप लेकर लोगों की मदद करते हैं। कहीं बाढ़ आती है, कहीं सुनामी आती है या कोई अन्य आपदा हो जाती है तब भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर लोगों की मदद करने पहुंचते हैं। तीसरे पायलट होते हैं फाइटर पायलट,फाइटर पायलट जो दुश्मनों के दांत खट्टे करते हैं। जो सरहद पर भारत के तिरंगे की रक्षा के लिए जान जोखिम में डालकर लड़ते हैं। प्रतिभा ने भी हैदराबाद के एयर बेस से अपनी ट्रेनिंग शुरू की थी।

हैदराबाद के डुंडीगल एयर बेस में आयोजित आउट परेड में 105 कैडेट शामिल किए गए थे जिसमें से 15 लड़कियां शामिल हुई थी। लेकिन फाइटर पायलट केवल दो लड़कियां बन पाए जिसमें एक नाम था प्रतिभा पूनिया और दूसरा था वाराणसी की रहने वाली शिवांगी का। प्रतिभा पूनिया फाइटर पायलट बन कर एयर फोर्स में शामिल की गई थी। वह अब लड़ाकू विमान सुखोई और मिग जैसे विमान उडाती है।

फाइटर पायलट बनने के बाद जब प्रतिभा पूनिया अपने गांव पहुंची तो वहां लोगों ने उनका बड़ी धूमधाम से स्वागत किया। बधाई देने वालों का तो उनके घर का तांता सा लग गया था। लोगों ने मिठाई बांटकर, ढोल बजाकर व अन्य तरीके से खुशियां मनाई। लोगों को अपने गांव की बेटी पर गर्व था कि उनकी बेटी अब भारतीय वायुसेना में शामिल होकर भारत की रक्षा करेंगी। साथ ही दुश्मनों को जवाब देंगी कि भारत की बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं।

कैसी लगी उनकी यह कहानी हमें कमेंट करके जरूर बताए। साथ ही खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक शेयर करके उन तक भी यह जानकारी साझा करें।

   
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