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दौसा

जहां बाला जी करते है भुत प्रेतों का पक्का इलाज, यहां से प्रसाद घर ले जाना है मना

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आज हम आपको कहानी बताएंगे राजस्थान के दौसा (Rajasthan Dausa)  जिले के पास सिकराय तहसील (Sikraye Tehsil) में स्थित मेहंदीपुर बालाजी की। बताया जाता है कि मेहंदीपुर बालाजी (Mehndipur Balaji) में भूत प्रेतों का इलाज होता है। जिस व्यक्ति के ऊपर ऊपरी साया या भूत प्रेत मंडराते आ जाता है उसे मेहंदीपुर बालाजी में भगाया जाता है। मेहंदीपुर बालाजी के बारे में यह मान्यता है कि यह स्थान हनुमान जी के 10 सिद्ध पीठों (Hanuman ji Sid Pith) में से एक है। इस मंदिर को सिद्धि प्राप्त है। वही हनुमान जी यहां जागृत अवस्था (Awake State) में रहते हैं और यहां जिनके भी अंदर भूत प्रेत और बुरी आत्माओं का वास होता है। उसे प्रेतराज सरकार (Pretraj Sarkar) और कोतवाल कप्तान (Kotwal Kaptan Mandir) मंदिर में प्रवेश करने के बाद से भगा देते हैं।

बालाजी का है गण

बालाजी के हजारों गण यानी कि अतशात आत्माएं (Evil Spirits) यहां बालाजी के नित्य लगने वाले भोग (Balaji ka Bhog) की खुशबू से तृप्त हो रही है। यही मान्यता है कि इसी वजह से जिनके ऊपर भी भूत का साया होता है इन लोगों का इलाज मेहंदीपुर में होता है। वही अगर बात करें देवी प्रधानता की तो मेहंदीपुर में बालाजी,प्रेतराज सरकार ,कोतवाल यानी भैरव (Bhairav Baba Temple) एक हजार साल पहले प्रकट हुए थे। अब तक इस मंदिर में 12 से ज्यादा महंतों (Mahants) ने पूजा की है।

ऐसी है कथा (Mehndipur Balaji Ki Katha)

मेहंदीपुर बालाजी में एक समय घना जंगल (Dense Forest) हुआ करता था। यहां जंगली जानवरों का वास भी था,जिस वजह से आम जन लोग यहां जाने से डरते थे। वहीं मंदिर की कथा के बारे में हम आपको बताएं तो जिस महंत ने सबसे पहले मेहंदीपुर बालाजी की पूजा की थी,उन्हें एक सपना आया था। उन्होंने सपने में देखा कि वह एक विचित्र जगह पहुंच गए है। जहां हजारों दीपक जल रहे ह, हाथी घोड़ों के साथ एक फौज उनकी तरफ चली आ रही है। उनके सामने आने वाली फौज ने उन्हें बालाजी की तीन मूर्ति प्रदक्षिणाए दी और प्रणाम किया और फिर वापस लौट गए। इसके बाद महंत को डर लगा और वह अपने गांव लौट गए। घर आकर उन्होंने बहुत सोचा और उनकी आंख लगी, तब उन्हें एक बार दोबारा सपना आया। तब उन्होंने इस सपने में एक आवाज सुनी जो कह रही थी कि उठो और मेरी सेवा ग्रहण करो। जिसके बाद महंत को लगा कि उनके साथ कोई अजीब वारदात हो रही है, लेकिन बाद में हनुमान जी ने खुद उन्हें दर्शन दिए और पूजा करने का आदेश दिया। जिसके बाद महाराज ने अगले दिन सभी गांव वालों को अपने स्वपन के बारे में बताया और सपने के अनुसार बताई हुई जगह पर खुदाई कराई। इसके बाद वहां से हनुमान जी की प्रतिमा निकली और लोगों ने उस जगह छोटे से मंदिर की स्थापना करवाई,भोग की व्यवस्था की और तबसे महाराज भगवान हनुमान की पूजा करने लगे।

Balaji Temple

राजा को लगा मजाक तब लुप्त हुई मूर्ति

जिस रोज महाराज ने हनुमानजी की पूजा करना शुरू किया। तभी गांव के कुछ लोगों को यह ढोंग (Pretend)  लगा और इसके बाद ऐसा चमत्कार हुआ कि सभी लोग माफी मांगने पर मजबूर हो गए। लोगों का कहना था कि यह ढोंग है ऐसा कुछ भी नहीं होता। इसके बाद जो हनुमान जी की मूर्ति लुप्त (Lost) हो गई। बाद में लोगों ने क्षमा मांगी और तब मूर्तियां वापस दिखाई देने लगी। वहीं इसके अलावा एक रोज मेहंदीपुर के राजा को महाराज ने सभी बातों के बारे में बताया। तब राजा को लगा कि महाराज मजाक कर रहे है और एक बार फिर मूर्तियां लुप्त हो गई। उसके बाद राजा ने उस जगह खुदाई करवाई लेकिन मूर्तियां नहीं मिली। उसके बाद राजा ने महाराज को क्षमा याचना (Apologies) करके भगवान की पूजा करने के लिए कहा, साथ ही राजा ने खुद को अज्ञानी (Ignorant) मानते हुए हनुमान जी से दर्शन देने के लिए कहा इसके बाद मूर्तियों ने वापस आकर दर्शन दिए। तब राजा ने मेहंदीपुर में एक विशाल मंदिर का निर्माण करवाया और महंत गोसद्र जी ने वहां सेवा की और उसके बाद उन्होंने हनुमान जी की आज्ञा से खुद समाधि ले ली।

प्रसाद के लिए भी अलग मान्यता (Mehandipur Balaji Prasad Ki Manyatta)

मेहंदीपुर बालाजी के प्रसाद को लेकर भी अलग मान्यता है। बताया जाता है कि पूजा के बाद प्रसाद को ना तो आप कहीं दे सकते,ना उसे खा सकते और ना ही घर ले जा सकते हैं। वही मंदिर में खाने पीने की चीजों को ले जाने की भी इजाजत नही है। कहते हैं कि जो लोग प्रसाद को घर ले आते हैं उन लोगों पर भूत प्रेत का साया जाता है। मेहंदीपुर बालाजी, बाला शब्द का अर्थ होता है जो सदा दुश्मनों पर जीत जाए। इसी वजह से मेहंदीपुर में दुश्मन यानि भूत प्रेत (Ghosts) से जीतकर हनुमान जी महाराज भक्तों का इलाज करते हैं।

mehndipur balaji

छाती से बहता है जल

मेहंदीपुर बालाजी में हनुमान जी की प्रतिमा के बाईं ओर से एक जलधारा (Stream, Jal Dhara) बहती है। कहते हैं कि जिस व्यक्ति के उस जल की छीट लग जाते हैं उसका कल्याण हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जल हनुमान जी का पसीना (Sweat) है। बालाजी के प्रसाद को लेकर हमने आपको बताया तो मंदिर में मौजूद बालाजी प्रेतराज सरकार और भैरव को अलग-अलग प्रसाद चढ़ता है। बालाजी को लड्डू (Mehandipur Balaji Prasad) ,प्रेतराज को चावल (Pretraj Prasad Rice) और भैरव को उड़द (Bhairav Baba Prasad Udad) का प्रसाद लगता है ।

नही खाने होते प्याज़ लहसुन

वही ऐसी भी मान्यता है कि मेहंदीपुर बालाजी में दर्शन करने के बाद भक्तों को एक हफ्ते तक लहसुन (Gralic),प्याज (Onion),शराब (Liquor),मांस (Meat),अंडा (Egg) नहीं खाने की प्रथा है। जो लोग ऐसा करते हैं उन पर भी भूत-प्रेत का साया हो जाता है। वहीं हर रोज 2 बजे प्रेतराज सरकार का दरबार लगता है कीर्तन होता है और इसी दरबार में भूत प्रेतों का भी इलाज होता है।

   
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