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राजस्थान

काका भतीजा री जोड़ी रो कमाल, डूंगजी जवाहरजी री जोड़ी री अन्याव रे खिलाफ संघरष री कहाणी

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सीकर सूं बीकानेर जावण वाळी रोड़ पर एक गांव आवै बठोठ-पाटोदा।इण गांव रो नांव इतिहास रे पानां मांय लिख्योडो़ है।अंग्रे’ जां सू चल री झलाझली में छाती ठोक’न आगै आया इणी’ ज गांव रा दोय सपूत।डूंगजी अर जवाहरजी।डूंगजी जवाहरजी आपसरी में काकाई हा। डूंगजी जवाहरजी बठोठ ठिकाणै रा ठाकुर हा।अर अंग्रे’ जां सूं जब्बरी नफ’रत ही, उआंनै कींया ई करगै इण देस सूं निकालण खातर वै आपरौ संघरष छेड़यौ।

इलाके में बाणियाँ रा खूब घर हा, जद ई इण संघरष खातर पैसां री जरूत पड़ी, सेठां सूं अरज करी पण सेठ अं’ गरेजां सूं डरता, आपरा दर खुला इण मुजब बंद राख्या।इण कारण आं सेठां रै अठै धाडौ़ न्हांख्यौ।आपरी मर्जी सूं लू’ ट्या।एकर सेठां अं’ गरेजां सूं अरज करी के-“साब ए तो म्हांनै लू’ टे, कीं समाधान निकाळौ।जद अं’ गरेजां डूंगजी रै साळै भैरोसिंह नैं कीं लालच दियौ अर उण आदमी धोखो दियौ।डूंगजी नैं सूत्यां नैं पकड़वा दिया।

अं’ गरेजां वांनै के’द कर लीन्हा अर आगरा किले में भेज दिया पण जवाहरजी छे मी’नां में ई उणा नैं छुडा़ लाया।अर पछै रामगढ़ रे उआं सेठां नै पकड़या जकां अं’ गरेजां सूं सिकायत करी फेर माफी मांगण रै बाद में सेठां नैं छोड़ भी दिया।सन सैंताळीस में डूंगजी जवाहरजी छा’पा मारी ल’ डा़यां ये अं’ गरेजां नैं परेशान कर दिया।बेजां।देसी राजा रजवाड़ा अं’ गरेजां नैं मदद देवण में लाग्यैडा़ हा।

पण आं दोनां सपूतां एक ई बात रट राखी के इण गुला’ मी नैं काढ फेंकणी।18 जून 1847 मांय वां नसीराबाद छा’वणी लू’ टी जकी घटना उआं माथै चर्चा रो विसै बणी।अं’ ग्रेजां उआं नैं झालण री खूब आफळां कीन्ही, घे’ राबंदी करी पण शेखावाटी रा सपूत घेरा’ बं’ दी तोड़ निकळ पड़या।जवाहरसिंह बीकानेर दरबार महाराजा रतनसिंह खनै चल्या गया जकां अं’ ग्रेजों रै दबाव रै पछै ई जवाहरजी नै सूंपण सू मनाही कर दी हर जगै सू घिरयोडौ़ देख जोधपुर राज्य रै आश्वासन पर कै उआंनै अं’ गरेजां नैं नीं सूंपसी।

एक दूहो बडौ़ चाव सूं सुणाइजै के– “जे कोई जणती राणियाँ डूंग जिस्यौ दीवाण तो इण हिंदुस्तान में पळतौ नीं फिरंगाण”

कहाणी में आगे मोड़ इण भांत है के ठाकुर डूंगर सिंह घड़सीसर रै सैनि’ क घेरे सू निकल परा जैसलमेर दीसा जावण लागा पण से’ नावां ने जैसलमेर के रे एक गावं खने मेडी में फिर जा’र घेरा दे दियौ दिन आखौ की ल’ ड़ा’ई अर बाद में ठाकुर प्रेम सिंह व निम्बी ठाकुर आद रै ठावा परयासां सू म’रण रौ संकल्प त्याग’ न डूंगर सिंह आत्मसमर्पण कर दियौ, डूंगर सिंह नै जोधपुर किले में ताजिमी सरदारों रै जिंया नजर कै’ द री स’ जा मिली अर उणी थिति में वे सुरगवास हुय ग्याग।वे सुरगवास भलें हूग्या पण आज ई वांनै वांरौ लोक जाद करै, पूजै।कोई के मांयनै इण भांत री सगती कीकर आवै के एक सगत भरी वैव्सथा ऊं टकराइजै? ओ एक बडौ सवाल है।छेकड़ली एक दूहे नैं उल्लेख कर’न बात पूरी करां-

म’रे नहीं भड़ मारका, धरती बेडी धार गयी जे जस गित्डा, जग में डुंग जवारराजस्थान रा चाचा भतीजा डूंगजी जवाहरजी री जोड़ी री अन्याव रे खिलाफ कहाणी

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