हनुमानगढ़ की इस बच्ची की कला पर आप भी करेंगे नाज़, देखें हनुमानगढ़ के हुनरबाज

Aasji Choti Kalakaar in Hanumangarh: आशु छोटी कलाकार, भट्टा बस्ती, हनुमानगढ़।
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पूर्व जन्म का रिश्ता है या,
है कोई कला का योग।
गरीब मजदूर की बेटी में है,
कला का अपूर्व संजोग।

नन्ही कलाकार का अद्भुत करिश्मा।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी नन्हीं कलाकार से रूबरू करवा रहा हूं,जिसकी कला को देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। मजदूर मां बाप की बेटी ने बिना किसी से सीखे छोटी सी उम्र में ऐसी कलाकारी की है, जिसको देखकर हर कोई दंग रह जाता है। हुबहू फोटो बनाना, दिन में तीन-चार मूर्तियां तैयार करने वाली इस नन्ही कलाकार ने अपनी कला के बलबूते सभी का मन मोह लिया है। इसके बारे में मैं आपको नीचे विस्तार से बता रहा हूं।

परिवार और परिचय।
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Aasji Choti Kalakaar in Hanumangarh
हनुमानगढ़ जिले के हनुमानगढ़ जंक्शन (Hanumangah Junction) की भट्ठा बस्ती (Bhatta Basti) में रहने वाले श्रमिक मां-बाप की बेटी आशु ने हमारे संवाददाता से बात करते हुए अपनी चित्रकारी और अपनी कला के बारे में विस्तार से बताया। उसने बताया कि मुझे बचपन से ही पेंटिंग बनाने का बहुत शौक रहा है। मेरे पापा मकानों के ऊपर पेंटिंग करने की मजदूरी करते हैं और मां दिहाड़ी मजदूर है। हम चार भाई बहन हैं।
गुड़िया ने बताया की मैंने पेंटिंग बनाना कहीं से भी नहीं सीखा है। यूट्यूब पर जब कभी देख लेती हूं। मैं कोई भी मूर्ति, पेंटिंग या बैठे हुए आदमी की फोटो सब बना देती हूं। कोई भी एक मूर्ति बनाने में मुझे दो-तीन घंटे का समय लगता है। उसके लिए मुझे मिट्टी और कलर चाहिए। आशु की बनाई हुई बहुत सी पेंटिंग उन्होंने देखी और सभी दर्शकों को दिखाई। गुड़िया ने बताया की पेंटिंग बनाने के लिए मुझे पेंसिल, रबर और कलर चाहिए,उसके बाद में कोई भी पेंटिंग बना सकती हूं।
गुड़िया ने बताया की मम्मी पापा मुझे पेंटिंग बनाने में बहुत सहयोग करते हैं। किसी प्रकार की गलती होने पर वह मेरा मार्गदर्शन करते हैं। किसी व्यक्ति का स्केच बनाने में कितना समय लगता है,और कितने रुपए लेती हो। जवाब में गुड़िया कहती है कि एक स्केच बनाने के मैं सौ रुपए लेती हूं। जिसमें मेरे दो-तीन घंटे का समय लग जाता है।

आगे क्या करना चाहती हो।
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आप आगे क्या करना चाहती हो। इसके जवाब में गुड़िया कहती है कि मैं एलएलबी (LLB) कर के वकील बनना चाहती हूं। पेंटिंग मेरा शौक है। गुड़िया की मम्मी ने कहा इसका बचपन से ही पेंटिंग बनाने का शौक है। हम भी इसके लिए जो भी सामान मांगती है,वह लाकर देते हैं। चाहे भूखे रह जाए, लेकिन इसको सामान उपलब्ध करवाते हैं। यह 18 वर्ष की हो गई है, किसी भी प्रकार की सिलाई करने में सक्षम है। जो देखती है वही डिजाइन बना लेती है।
गुड़िया के मम्मी पापा ने कहा कि हम चाहते हैं कि इसका कोई सहयोग करें, और यह आगे बढ़े। इसके रोम-रोम में कला है। गुड़िया की बनाई हुई 3D पेंटिंग, जिसमें लगभग एक पेंटिंग में एक दिन का समय लगा था, रात के अंधेरे में चंद्रमा कैसे पानी में अपनी परछाई दिखाता है। ताजमहल और उसके नीचे बहती हुई यमुना में उसकी छाया का दिखना, एक अजूबे से कम नहीं है। Aasji Choti Kalakaar in Hanumangarh
गुड़िया ने छोटा भीम सीरियल के सभी पात्रो को दीवार पर इस तरह संजोग कर बनाया कि देखने वाला एक बार आश्चर्यचकित रह जाए।

अपने विचार।
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जज्बा जुनून और जोश है,
ना धन है ना धन का साया।
कोई भामाशाह सहारा दे तो,
हुनर है माया ही माया।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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