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हनुमानगढ़

मस्ताना बाबा का अद्भुत चमत्कार जिन्होंने की सोने चांदी की बारिश,देखें फेफाना आश्रम की कहानी

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गुरु गोविंद दोऊ खड़े,
काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने,
गोविंद दियो बताए।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे स्थान पर ले चल रहा हूं। जो राजस्थान में अपने आप में अकेला है। तथा उसके तार ईश्वर से जुड़े हुए हैं। उस स्थान का नाम फेफाना सच्चा सौदा डेरा हनुमानगढ़ है।

सच्चा सौदा डेरा के गुरु जी ने हनुमान से बात करते हुए बताया कि आज से लगभग सौ वर्ष पहले बलूचिस्तान से इस सच्चा सौदा के संस्थापक मस्ताना साहब यहां पर आए थे। जिन्होंने सोने और चांदी की बरसात कर लोगों को अपने पथ पर ईमानदारी से चलने की शिक्षा दी थी। उन्हीं के कर कमलों के द्वारा डेरे की स्थापना की गई थी।

उन्होंने बताया की 8 –9 की साल में अकाल पड़ा था और उसी समय मस्ताना साहब यहां पर आए थे। उन्होंने लोगों को सोने चांदी की बरसात कर अपनी ओर आकर्षित किया था। सच्चि राह पर चलने के लिए नाम दान दिया था।वहां के गुरु जी बताते हैं कि मेरी उम्र 80 साल से ऊपर हो गई है लेकिन ना कभी सिर दुखना, ना कोई बीमारी होना, बस एक ही नाम है, धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा। हाजिर नाजिर जिंदा राम तेरा ही आसरा।

उन्होंने बताया कि एक दिन गांव में सबको कहलवा दिया, कि आज रुपया पैसे बांटूंगा। तो उन्होंने रुपए पैसों की खूब बरसात की। लोगों ने खूब लूटा और सब ने गांव आकर बोल दिया कि आज उस फकीर का सब कुछ लूट लिया। लेकिन दूसरे दिन सुबह फिर उसने चांदी सोना बरसाना शुरू कर दिया। तो गुरुजी कहते हैं कि उनकी लीला अपरंपार थी। वह मस्ताना साहेब सच्चे गुरु थे। सच्चे बादशाह थे।

वहां के गुरुजी ने बताया कि जब मैं 19 साल का था तो सिरसा के मुख्य डेरे में गया और नामदान लिया था। मैं मेरे दोस्तों के साथ में गया था। वह तो मस्तानी मोज थी उनके साथ में 12 साल रहा था। वहां पर आने वाले एक बुजुर्ग आदमी ने कहा कि हमको डेरे से बहुत लाभ मिलता है। यहां पर सब तरह के फलों के पेड़ हैं। सब्जी है दूध है यह सब हमको यहां पर खाने को मिलती है।

उन्होंने बताया कि हमने पांच ट्यूबवेल किए थे, लेकिन किसी में भी मीठा पानी नहीं निकला। तब मस्ताना साहब से पूछा कि हम क्या करें। तो उन्होंने कहा कि यहां कर लेना । और वहां किया तो पानी मीठा निकला। आज तक हम सब उस मीठे पानी का लाभ ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सच्चे पातशाह मस्ताना साहब ने 1960 में चोला छोड़ दिया था। तब उन्होंने कहा था कि सच्चे पातशाह का सुमिरन किया करो, नहीं तो यह काल नहीं छोड़ेगा। डेरे के बाहर एक बड़ी सी आकृति का काल का चित्र बना हुआ है। जो मुंह फाड़े खड़ा है।

मस्ताना साहब के घर में तीन बच्चियों ने जन्म लिया था। तब एक फकीर आया था उसने बताया कि, लड़का तो होगा लेकिन वह काम नहीं आएगा। और वह थे मस्ताना सच्चा बादशाह । जिसने 9 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। उनके पिताजी की मिठाई की दुकान थी। तो मस्ताना साहब नौ साल की उम्र में दुकान में गए। सबको मिठाई यूं ही खिलाने लग गए और पूरी दुकान को लुटा दिया।

दुकान में एक फकीर आया और उसने खाने की फरमाइश की। तो मस्ताना साहब ने उनको खाना खिलाया तो उन्होंने कहा कि व्यास जी आ जाना। तब मस्ताना साहब बलूचिस्तानी से व्यास के डेरे में आए और वहां पर गद्दी पर वही फकीर बैठा था जिसको कल भोजन करवाया था।

“” धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा। ”

अपने विचार।
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शक्स नहीं सत बड़ा,
सत से बड़ा न कोई।
उसकी शरण जो आए,
तर जाए हर कोई।

विद्याधर तेतरवाल ,
मोती सर।

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