बेटी ने IPS बनकर पूरा किया पिता का सपना, 3 बार असफलता के बाद मिली कामयाबी

Hanumangarh: हनुमानगढ़ जिले के छोटे से गांव चक हरिपुरा (Chak Haripura) की बेटी प्रतिभा गोदारा (Pratibha Godara) यूपीएससी (UPSC) एग्जाम क्लीयर कर IPS बनी हैं। प्रतिभा ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 355वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले प्रतिभा ने तीन बार UPSC का एग्जाम दिया था, लेकिन उनके हाथ सफलता नहीं लगी। इस लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इस बार और भी बेहतर तरीक से पढ़ाई की और सफलता हासिल की।

प्रतिभा ने बताया कि – ”सफलता हासिल करने का कोई शॉर्ट कट नहीं है। मेहनत, लगन और परिश्रम से ही सफलता मिलती है। अगर आपकी मेहनत और लगन सच्ची है तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती है। सिलेक्शन का एक ही आधार है कि भरपूर मेहनत करनी होती है। किसी भी स्थिति में गिव अप नहीं करना है। अंतिम पेपर के अंतिम सवाल तक मेहनत करनी होती है। असफलता का मतलब ये नहीं होता कि हम कर नहीं सकते, बल्कि हम और ज्यादा मेहनत करके उसे सफलता में बदल सकते हैं।”

गांव से पहली बार कोई प्रशासनिक सेवा में हुआ सिलेक्ट

हरिपुरा (Haripura) के पूर्व सरपंच भागीरथ ने बताया कि प्रतिभा अपने गांव से प्रशासनिक सेवा में चयनित होने वाली पहली स्टूडेंट है। इससे पहले गांव का कोई भी बेटा या बेटी प्रशासनिक सेवाओं में नहीं था। उनका कहना है कि प्रतिभा के आईपीएस (IPS ) बनने से गांव की अन्य बेटियों और बेटों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही कोई भी बेटी को बोझ नहीं समझकर शिक्षित करने का प्रयास करेगा।

पूरे गांव का सपना हुआ सच

प्रतिभा के पिता दयाल सिंह का कहना है कि प्रतिभा को आईपीएस बनाने का सपना उनका नहीं उनके पिता श्योकरण गोदारा का था। जिस कारण उन्होंने अपनी बेटी को आईपीएस बनाने का सपना देखा था। उनके पिता उस जमाने में भी बेटियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रयास करते थे और पूरे गांव में शिक्षा की अलख जगाने के लिए कार्य करते थे। उन्होंने कहा कि आज केवल मेरा और मेरे पिता नहीं बल्कि पूरे गांव का सपना सच हुआ है।

पिता की आंखें हुई नम

मंगलवार को जब यूपीएससी एग्जाम क्लियर कर प्रतिभा गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों, रंग गुलाल और पटाखों के साथ प्रतिभा का स्वागत किया। बेटी के यूपीएससी एग्जाम क्लियर कर घर लौटने पर पिता दयाल सिंह की आंखें नम हो गई। इस दौरान प्रतिभा ने बताया कि – ”मेरा गांव सबसे प्यारा है। मैं बहुत कम समय यहां रही, लेकिन हमारा परिवार आज भी यहां है। कोई भी त्योहार हो, माता-पिता वहीं रहते हैं। वो हर छोटे बड़े आयोजन में गांव पहुंच ही जाते हैं।”

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