हनुमानगढ का सांई बाबा मंदिर जहाँ ठीक होती लाईलाज बीमारियां और मन्नत पूरी

सांई बाबा एक आध्यात्मिक गुरु थे।बहुत पूजा पाठ करने वाले।चूंकि वे जिनके गुरु थे,वो लोग उन्हें बहुत मानते थे और इस प्रकार उनके अनुयायियों की एक बड़ी संख्या बनती गयी। हनुमानगढ (Hanumangarh) का सांई बाबा मंदिर (Sai Baba Mandir) जहाँ ठीक होती लाईलाज बीमारियां। भारत का बड़ा सच धर्म और जाति है, उससे भी उन्होंने दूरी बनाए रखी।उनके अनुयायियों में हिंदू-मुस्लिम दोनों हैं।उनका कहना था – “सबका मालिक एक”

रेगिस्तान जहां लगभग पूरा होने को होता है उस इलाके में भी सांई बाबा का मंदिर (Sai Baba Mandir) अवस्थित है।हम बात कर रहे हैं हनुमानगढ के सांई बाबा मंदिर की।यह मंदिर हनुमानगढ टाउन और जंक्शन के बीच रास्ते में स्थित है।हर गुरुवार को श्रद्धालुओं धोक लगाने आते हैं।मंदिर के पुजारी रामकुमार अवस्थी बताते हैं कि – “मंदिर कोई खास पुराना नहीं है यही कोई पांच-छह साल हुए होंगे बने को लेकिन बाबा से जो कोई कुछ भी मांगता है बाबा उसकी मन्नत पूरी करते हैं”।बाबा ने अपने जीवन में ग्यारह वचन दिए जिनका गूढार्थ कुछ यों है –

“चढै समाधी की सीढी पर, पैर तले दुख की पीढी़ पर, त्याग शरीर चला जाऊँगा, भक्त हेत दौड़ा आऊंगा, मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस, मुझे सदा जिवित ही जानों, अनुभव करो सत्य पहचानो, मेरी शरण आ खाली जाय, हो तो कोई मुझे बताये”

भारत के गांवों की लोक में गहरी आस्था होती है, वह अपने लोक गायकों से भी उतना ही प्रेम करते हैं जितना ईश्वर से।उनका ईश्वर स्वयं उसी लोक का होता है जैसा पाबूजी, गोगाजी, तेजाजी, आवड़ मां, करणी माँ आदि लेकिन महाराष्ट्र जिनकी कर्म भूमि उनका राजस्थान के उस इलाके में मंदिर बनना अचरज वाली बात।सम्भव है किसी भक्त ने अपनी मन्नतें पूरी होने के बाद बनाया हो।गुरुवार को इस मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही भी होती है।प्रसाद के रूप में खिचड़ी, रेवड़ी आदि चढाये जाते हैं।स्थानीय लोगों का कहना कि बाबा उनके लिए विश्वास का बड़ा केंद्र है।मंदिर प्रवेश में कोई जाति-पाति जैसा मसला नहीं है।यह इसकी अपनी खूबसूरती है।सांई का कहना था कि जो कोई उसे मानता है उसकी मनोकामना वह पूरी करते हैं।

टाउन स्थित इस मंदिर में कपड़े भी चढाये जाते हैं।पुजारी जी का कहना कि कोई भक्त यहाँ से खाली हाथ नहीं जाता।पुजारी जी से यह पूछने पर कि क्या चम’त्कार है इस मंदिर में तो पुजारी जी कहते है कि इनका तो सब चम’त्कार ही चम’त्कार है।मंदिर में सब मिल जुलकर आते हैं, सभी संप्रदायों के लोग प्रसाद चढ़ाते और अपनी मन्नतों को बाबा के सामने रख जाते हैं।

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