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राजस्थान

देश के पहले स्मार्ट गांव (Smart Village) में है हर सुविधा, पीएम मोदी ने भी किया सम्मानित

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आज हम आपको देश के पहले स्मार्ट गांव (India’s First Smart Village) के बारे में बताएंगे। राजस्थान के धौलपुर (Dholpur) जिले के धनौरा (Dhanaura) गांव देश के पहले स्मार्ट गांव (First Smart Village) का दर्जा मिला है। अपराध मुक्त, अल्कोहल मुक्त गांव धनौरा सभी के लिए प्रेरणा बना है। यह सब संभव हो पाया है तो गांव वालों की एकजुटता की वजह से, बाड़ी कस्बे में स्थित यह गांव एकजुटता की एक बेहतरीन मिसाल बनकर पूरे भारत के सामने आया है।

समस्या का निकाला समाधान

लगभग 2200 लोगों की आबादी वाले इस गांव में पिछले सात-आठ सालों में विकास की नई गाथा रची गई है। गांव में एक समय ऐसा था जब शौचालयों की कमी थी, कीचड़ से भरे रास्ते,पतले संकरे रास्ते थे। गांव में पानी की कमी थी,बेरोजगारी (Unemplyoment) थी शिक्षा (Education) का अभाव था। वही आम जीवन की समस्याएं मौजूद थी,लेकिन उसके बाद गांव में स्कूल पंचायत व दूसरी चीजों का जीर्णोद्धार किया गया। री डेवलपमेंट की एक बेहतरीन मिसाल गांव के लोगों ने सबके सामने पेश की है।

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महिला पंचायत की हुई शुरुआत

धनौरा गांव में सरपंच, जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और एनजीओ (NGO) के सहयोग से कायाकल्प की शुरुआत की गई। इस गांव को सबसे पहले शौचालय (Toilet) मुक्त बनाया गया। प्रथम महिला पंचायत (Women Panchayat) भी इस गांव में ही बनाई गई। इसके लिए गांव की बुजुर्ग महिलाओं को मनाना बहुत मुश्किल था और उसके लिए गांव के हर घर में जाकर युवाओं ने सर्वे (Survey) कर लोगों को समझाया गया। इस गांव में 822 शौचालय बनवाए गए,सभी शौचालय ग्राम सरपंच (Gram Panchayat) के सहयोग से बनवाए गए।

आज हर सुविधा है मौजूद

आज भारत के पहले स्मार्ट गांव में हर एक सुविधा उपलब्ध है। गांव में री डेवलपमेंट (Re-Development) के माध्यम से सड़के बनवाई गई, बिजली, पानी,शिक्षा,कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था की गई। इसके अलावा ग्रीन फील्ड पानी पेड़ो और हरित आवरण का प्रबंध किया गया। वहीं गांव में ई-पेन (E-pan) से डिजिटल स्मार्ट (Digital Smart) होने के तरीके को भी अपनाया गया। लाइवलीहुड (Livelihood) यानी गांव में उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से रोजगार को पैदा करने का भी काम किया गया। वही गांव में शौचालय बनाने के साथ-साथ सीवरेज लाइन सिवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया। वहीं गांव वालों ने गांव के रास्ते को चौड़ा करने के लिए अतिक्रमण हटाए और रास्तों को 8 से 10 फीट चौड़ा किया गया। इसके बाद जब राज्य सरकार ने गांव में सहयोग किया तब गांव के लोगों ने राज्य सरकार को स्वेच्छा से जमीन देकर रास्तों को 20 से 25 फुट तक चौड़ा करने में सरकार की मदद की।

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सामुदायिक भवन है आकर्षण

धनौरा गांव में राज्य सरकार ने भी सहयोग दिया और यह गांव एक सामाजिक जनचेतना और विकास के जन सहभागिता का बड़ा उदाहरण बन कर सामने आया। वही आपको बताए तो गांव में प्रवेश करते हुए आपको एक मुख्य द्वार (Main Gate) भी दिख जाएगा। यह भी गांव वालों के सहयोग से बनवाया गया। गांव में सामुदायिक भवन (Community Hall), लाइब्रेरी (Liabrary) भी बनवाई गई, यहां 200 से 300 लोगों पर बैठने की व्यवस्था सामुदायिक भवन में की गई है। गांव में ढाई किलोमीटर (2.5 KM) लंबी मानव निर्मित नहर और 8 तालाबों का निर्माण किया भी गया है। वही दीवारों पर प्रेरणादायक चित्र (Inspiring Photos) ,स्लोगन,प्रेरक पंक्तियां लिखकर सकारात्मक सोच भरने का कार्य किया गया है।

dhanoura

प्रधानमंत्री ने की तारीफ

धौलपुर जिले की इस गांव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narender Modi) ने 16 जुलाई 2018 को विज्ञान भवन नई दिल्ली (Vigyan Bhavan New Delhi) में आयोजित कार्यक्रम में आदर्श ग्राम सम्मान (Adarsh Gram Samman) से सम्मानित किया था। वहीं इस गांव से प्रेरणा लेकर ही राजस्थान की राज्य सरकार ने स्मार्ट विलेज योजना (Smart Village Yojna) की शुरुआत की थी इसके अलावा राजस्थान ने भी राज्य पंचायत का पुरस्कार धनौरा गांव को दिया। इस गांव के कायाकल्प करने में आईआरएस अधिकारी डॉक्टर सत्यपाल मीणा (IRS Dr. Satyapal Meena) का बेहतरीन सहयोग रहा। उनकी योजना सोच बदलो गांव बदलो (Soch Badlo Gaanv Badlo) ने इस गांव के कायाकल्प में एक बेहतरीन योगदान दिया।

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