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जयपुर

भेड़ बकरी चराने वाला अनोखा अलगोजा वादक रामनाथ चौधरी जिन्हें अमेरिका राष्ट्रपति ले गए अपने साथ

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साफे नीचे मूछ राखें,
नाक से बजावे अलगोजा।
ऐसे अजूबे कलाकार को,
बिल क्लिंटन ने भी खोजा।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे अजूबे कलाकार से मिलवाने जा रहा हूं। जिसने कला के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।जयपुर (Jaipur) के पदमपुरा (Padampura) निवासी रामनाथ चौधरी (Ramnath Choudhary) कला के क्षेत्र में किसी अजूबे से कम नहीं है।

आपका परिचय कैसे हुआ।
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अपना परिचय देते हुए रामनाथ चौधरी बताते हैं कि जब मैं 8 वर्ष का था तो मैं खेत में गया। खेत में मेरे दादाजी अलगोजा (Algoja) बना रहे थे , और बजा बजा कर देख रहे थे। तब मैंने दादा जी से अलगोजा सीखने की जिद्द की।उस उम्र में मैं भेड़ बकरी चलाया करता था। मैंने उस उम्र में अलगोजा बजाना सीख लिया।

थोड़ा समय गुजर जाने के बाद में मेरे साथ एक अजीब घटना घटी, और अलगोजा मुंह के पास में नहीं जाकर, नाक के पास में चला गया और जैसे ही सांस खींचा अलगोजा बजना शुरू हो गया। उसके बाद में मैंने भी अलगोजा नाक से बजाना शुरू कर दिया।

एक दिन की बात है,मैं भेड़ बकरियां चरा रहा था और अलगोजा बजा रहा था, तभी कुछ व्यक्ति मेरे पास में आए और मेरी कला को देखने लग गए। वो व्यक्ति कला मंच जयपुर के थे, जिन्होंने जोधपुर के मेले में मेरे पोस्टर लगा कर मेरा सबसे परिचय करवा दिया। मेले में मेरा परिचय आकाशवाणी वालों से हुआ और उस समय से लेकर आज तक मैं आकाशवाणी से जुड़ा हुआ हूं। उन्होंने बताया कि मेरा जुड़ाव टूरिज्म डिपार्टमेंट वालों के साथ में भी है। उन्होंने जहां भी मुझे आज तक याद किया है, मैं वहां गया हूं और उनके साथ में जुड़ा हुआ हूं।

बिल क्लिंटन (Bill Clinton) से मुलाकात कैसे हुई।
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अमेरिका (America) के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन एक बार भारत की यात्रा पर आए थे। उस समय नायला (Nayla) में उनका प्रोग्राम था। पर्यटन विभाग का एक विशेष जत्था प्रदर्शनी हेतु नाइला में पहुंच चुका था। लेकिन मुझे किसी दूसरे प्रोग्राम में आमेंर भेज दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमान अशोक जी गहलोत मय पुलिस जाब्ते के स्वयं मेरे पास पहुंच गए। और मुझे राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के सामने अपनी कला प्रदर्शित करने हेतु ले गए।

उस प्रदर्शनी में मैंने मेरी दोनों तरफ की मूछें तेरह तेरह फुट की खोल कर दिखाई और अलगोजा वादन का प्रदर्शन किया। उस प्रोग्राम में मेरा घोड़ी के ऊपर, दोनों तरफ लहराती मूछें, सिर पर साफा, नाक से अलगोजा वादन किसी अजूबे से कम नहीं दिख रहा था। मेरे चारों ओर सैकड़ों कैमरा वाले उस सीन को कवर कर रहे थे।

प्रोग्राम कर रहा था उस समय श्रीमान गहलोत जी ने मुझे रोक दिया। और अपने पास बुला कर मुझसे परिवार में कौन-कौन है के बारे में पूरी जानकारी ली। कार्यक्रम खत्म होने के बाद में सीधे सांगानेर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से बिल क्लिंटन मुझे अपने साथ अमेरिका ले गए।

अन्य।
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रामनाथ जी चौधरी का अलगोजा वादन के ऊपर दो-तीन बार परीक्षाओ में प्रश्न भी आ चुका है। धोती अंगरखी और रुमाल बांधने वाले लंबी मूछों के रामनाथ चौधरी के शरीर पर छैल कड़ा,फूल,कड़ा,मोचड़ी,छल्ला,खंगाली,झाला मुरकी आदि शिशोभित कर रहे थे।

अपने विचार।
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लिक लिक गाड़ी चले,
लिक ही लिक भेड़।
बिना लिक रामनाथ है,
उसको मत ना छेड़।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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