राजस्थान का दबंग IPS अमित लोढ़ा जिनसें अपराधी कांपे थर्र थर्र, पढ़ें!! आईपीएस की पूरी कहानी

अपनी सोच और अपना विश्वास,
कहां से कहां पहुंचाता है।
जीवन में वही सफल होता है,
जो अपने ऊपर विश्वास कर जाता है।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं, जिसके काम करने के तरीके से अच्छे-अच्छे धुरंधर कांपते हैं। आतंक के सूरमाओं के पसीने छूट जाते हैं। जहां भी स्थानांतरित होकर जाते हैं, वहां से गंदी वारदात को अंजाम देने वाले या तो खिसक लेते हैं, या फिर बंद कर देते हैं। ऐसे पुलिस अधिकारी का पूरा लेखा-जोखा और शिक्षा का विवरण नीचे दिया जा रहा है।

परिवार और परिचय।
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जयपुर (Jaipur) जिले के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (Sawai Man Singh Hospital) में सेवारत डॉक्टर के पुत्र अमित लोढ़ा (IPS Amit Lodha) ने दीप से बात करते हुए बताया कि मेरा जन्म जोधपुर (Jodhpur) में हुआ था। मेरे पापा जयपुर (Jaipur News) में रहते थे इसलिए मेरी पढ़ाई जयपुर के सेंट जेवियर स्कूल से हुई थी। उसके बाद में मैंने IIT दिल्ली से बीटेक किया और उसके बाद में मेरा चयन आईपीएस (IPS) में हो गया।

दिल्ली IIT में एडमिशन होने के बाद की अपनी पढ़ाई के बारे में बताते हुए अमित ने बताया कि इंजीनियरिंग में और मैथ्स में बहुत अंतर है। मेरी रुचि ज्योग्राफी हिस्ट्री में थी तो मैं वहां जाकर पढ़ाई में कमजोर हो गया व अपने आप में नर्वस फील करने लग गया। मैं अपने आप को कमजोर और लूजर महसूस करने लग गया और हारा हुआ मान लिया।यह काफी दिनों तक चला, लेकिन उसके बाद में मैंने अपने आप को आशावादी बनाया, और अपने पर विश्वास जताया कि मैं सब कुछ कर सकता हूं और वैसा ही हुआ। मैं सफल होकर आपके सामने बैठा हूं।

भूत उतर गया।
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आपकी सोच सकारात्मक कैसे हुई।इसके जवाब में अमित कहता है, कि मेरा छोटा भाई जो मेरे से छः वर्ष छोटा है। उसने मुझे मोटिवेट किया कि आप पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे हैं।और आज भी अब्बल हैं।आप अपनी सोच को बदलो, खुद पर विश्वास करो। जिस दिन आप अपने ऊपर विश्वास करोगे,उसदिन आपके सब कुछ समझ में आ जाएगा। और मेरे साथ वही हुआ। जिस मैथ्स में मैं आईटी में फेल हुआ था, उसी मैथ्स के कारण आज इस वर्दी में आपके सामने दिखाई दे रहा हूं। मेरे ऊपर मैथ्स का भूत सवार था जो एक झटके में उतर गया।

बिहार कैडर।
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अमित ने बताया आईपीएस बनने के बाद मुझे बिहार (Bihar) कैडर मिला। बिहार और राजस्थान में बहुत अंतर है। राजस्थान एक शांत एरिया है। बिहार में नक्सलिज्म भी है और जनसंख्या भी बहुत ज्यादा है।लेकिन काम करने वालेको मान सम्मान बहुत ज्यादा मिलता है। आईएएस और आईपीएस का बहुत सम्मान करते हैं।

अमित ने बताया कि मैंने बिहार में 14 वर्ष लगातार काम किया है। उसके बाद में मैंने राजस्थान में सात वर्ष काम किया है, जिसमें बीएसएफ के साथ मेरा अनुभव बहुत बढ़िया रहा है। और काम करने में बहुत मजा आया है। आपने बिहार डायरी नाम की पुस्तक लिखी है, जिसमें आपने अपने कई किस्से बताएं। उसके बारे में चर्चा करते हुए अमित ने बताया कि मैंने एक दुर्दांत अपराधी को पकड़ा। जिसने लगभग 50 से 60 कत्ल कर रखे थे। जिसका राजनीति में भी हस्तक्षेप था। वह कई जिलों को प्रभावित करता था।

अमित ने बताया एक बार वह नवादा जेल से जब भागा तो उसने तीन चार पुलिस कर्मियों की भी हत्या कर दी थी। उसका मैंने फोन टेप किया। कई औरतों से उसके संबंध थे, उनकी भी पूरी जानकारी ली, और मैंने उसको तीन महीने के अथक प्रयास के बाद में पकड़ लिया। उस समय मेरे ऊपर और मेरे बच्चों के ऊपर कितना प्रेशर था, वह एक पुलिसकर्मी या उसके परिवार से ज्यादा कोई नहीं जान सकता।

ब्यूटी कुमारी।
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एक दिन एक ब्यूटी कुमारी नाम की महिला का मेरे पास फोन आया। उसने मेरे से कहा कि मैं आपसे मिलना चाहती हूं। यह सिलसिला दो तीन महीने तक चलता रहा।लेकिन एक दिन वह मेरे ऑफिस में अपने पिताजी को लेकर आ गई। अपने पिताजी को बाहर भेजा और टेबल के ऊपर चढ़ गयी और मेरा हाथ जबरदस्त पकड़ लिया। वह ताकतवर थी, उसने कहा कि मैं आप से शादी करना चाहती हूं। आप शादीशुदा हैं मैं एडजस्ट कर लूंगी। कैसे जैसे करके उसको बाहर भेजा और मामला शांत हुआ।

युवकों के नाम संदेश।
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अमित लोढ़ा (IPS Amit Lodha) ने युवकों को संदेश देते हुए कहा कि यदि आप किसी सुख सुविधा के लिए आईपीएस बनना चाहते हैं, तो मत बनना। आपको पूरे मन से सोच विचार कर इस लाइन में आना होगा।आपको यदि देश की सेवा करनी है और कठोर निर्णय लेने की क्षमता रखते हो, तो आपको इस कैडर में आना चाहिए। आपका एक गलत निर्णय लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है।

अमित लोढ़ा ने बताया कि मेरी लिखी हुई पुस्तकों और मेरे विचारों से मेरी दोस्ती फिल्म स्टार अक्षय कुमार से हो गई। अक्षय कुमार एक बहुत ही होनहार दानवीर और देश प्रेमी एक्टर है। इस आधार पर नीरज पांडे ने एक पिक्चर बनाने का निर्णय लिया है। इससे पहले उन्होंने इस प्रकार की कई पिक्चर बनाई है। उन्होंने बताया कि यह पिक्चर इस वर्ष के अंत तक आ जाएगी।बीएसएफ के अनुभव के बारे में उन्होंने बताया कि इस तरह की टीम के साथ काम करना मुझे बहुत अच्छा लगा।उनकी एकजुटता और बहादुरी का मैं कायल हूं।

अपने विचार।
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सोच ने लूजर बनाया,
सोच ने लेखक और हीरो।
आप भी अपनी सोच बदलो,
नहीं रहना है जीरो।

विद्याधर तेतरवाल, मोतीसर।

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