अनोखी पहल- 40 हजार गायों को पाल रही गोशाला, 562 अलमारी वाले पुस्तकालय से दी ज्ञान को उचित दिशा

जैसेलमेर: गोवंश के संरक्षण और लोगों के ज्ञान के विस्तार के लिए भादरिया (Bhadariya) गांव से आए एक संत के अनुयायियों ने एक अनोखी पहल की है। दरअसल, वर्षों पहले संत हरवंशसिंह निर्मल यहां भादरियाराय माता मंदिर में दर्शन (Bhadariya maharaj) के लिए आए थे। उन्होंने यहां देखा कि इलाकों में अकाल के दौरान गोवंश के हालात बेहद दयनीय बन चुके हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संत यही रुक गए और मंदिर में रहकर भक्ति करना शुरू कर दिया।

यहां उन्होंने जगदंबा सेवा समिति की स्थापना भी की। समिति के जरिए उन्होंने गोवंश के सरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रायस किए एवं विशालकाय गोशाला का निर्माण करवाया। मौजूदा वक्त में गोशाला में 40 हजार से भी ज्यादा गोवंश का संरक्षण किया जाता है। वक्त ढलने के साथ-साथ संत हरवंशसिंह निर्मल क्षेत्र में भादरिया महाराज का नाम सुप्रसिद्ध हो गया। इसके साथ ही उन्होंने सन् 1971-83 के बीच एशिया के सबसे बड़े ग्रांथागार पुस्तकालय की आधारशिला रखी और तकरीबन 15 सालों में यानी सन् 1998 में इस विशालकाय पुस्तकालय का निर्माण हो सका। भादरिया महाराज (Bhadariya Maharaj) की ख्वाहिश थी कि इस पुस्तकालय को इतना समृद्ध किया जाए कि शोधकर्ताओं को इधर-उधर भटकना न पड़े। हर किसी को अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए हर प्रकार की पुस्तक एवं सामग्री यहां मिल सके।

Bhadariya

भादरिया महाराज की तरफ से यहां शोधकर्ताओं के लिए कई प्रकार की पुस्तकें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई गईं। इन सबके अलावा प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को भी इस लाइब्रेरी का बड़ा फायदा पहुंचता है। यहां 18 कमरों का निर्माण करवाया गया है, जिसमें भोजनालय और अन्य प्रकार की सुविधाएं प्राप्त करवाई जाती है ताकि अध्ययन कर रहे किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो।

jaisalmer

पुस्तकालय में विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का संग्रह किया गया है। यहां विश्व की दुर्लभ पुस्तकों को भी संग्रहित किया गया है। पुस्तकालय में दुनिया भर की कुल 11 धर्मों में से 7 धर्मों का संपूर्ण साहित्य पुस्तकें यहां उपलब्ध है। कानून की आज तक प्रकाशित सभी पुस्तकें आपको यहां मिलेंगी। इसके अलावा सभी वेद, भारतीय संविधान, विश्व के देशों का संविधान, जर्मन लेखक एफ मैक्स मुलर की रचनाएं, पुराण, इन साइक्लोपीडिया पुस्तकें, आयुर्वेद, इतिहास, स्मृतियां, उपनिषेद, सभी प्रधानमंत्रियों के भाषण, शोध की पुस्तकें सहित पुस्तकालय में हजारों किताबें मौजूद है। यहां विश्व के ऐसे दुर्लभ साहित्य को इकट्ठा किया गया है जिनसे माइक्रो सीडी बनाने का मेथेड बताया गया है।

जमदंबा सेवा समिति की तरफ से यहां पुस्तकों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए तकरीबन 562 अलमारियां बनाई गई हैं, जिसमें लाखों पुस्तकें रखी हुई हैं। यहां 16 हजार फीट की रेंक भी बनाई गई है, जिमें पुस्तकों को कतारबद्ध तरीके से रखा जाता है। यहां बने चार गलियारों में दो करीब 275 फीट और दो करीबन370 फीट लंबी है। पुस्तकालय में अध्ययन के लिए अलग से एक 60X365 फीट के विशाल हॉल का निर्माण करवाया गया है। जिसमें तकरीबन 4 हजार लोग एक साथ बैठ सकते हैं। ऐसा अनुमान है कि यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा छतीय हॉल हो सकता है।

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