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जैसलमेर

गड़ीसर झील : रेगिस्तान में कभी नहीं सूखने वाली झील, बुझाती है पूरे जैसाणा की प्यास

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राजस्थान की रेतीली भूमि पर गिनी-चुनी झीलों का अपना महत्व है, वे यहां की आबोहवा में अहम रोल अदा करती है। गड़ीसर झील भी उनमें से एक है जो राजस्थान राज्य के जैसलमेर जिले में स्थित है।

यह झील जैसलमेर किले से लगभग 1.5 किमी दूर शहर के दक्षिण भाग के स्थित है। तत्कालीन समय में यह इलाक़ा बिल्कुल निर्जल था और दूर-दूर तक पानी नाम का नहीं था, ऐसे में जनता का सम्पूर्ण भार दरबार पर होता था। जनता की समस्याओं और जरूरतों को देखते हुए इस झील का निर्माण करवाया गया।

इस कृत्रिम झील का निर्माण जैसलमेर के संस्थापक राजा रावल जैसल ने 1156 ईस्वी में किया था। बाद में इस झील का पुनर्निर्माण महारावल गादसी सिंह द्वारा करवाया गया था। कहा जाता है कि उन दिनों यह जैसलमेर का एकमात्र जलस्त्रोत था। उस समय राजस्थान के सूखे क्षेत्रों में पानी के स्त्रोत के रूप में कोई नहरें या कोई सिंचाई प्रणाली अथवा कोई वैज्ञानिक तरीके नहीं थे।

लोगों का जीवन इसी झील पर निर्भर था और कहा जाता है कि इस झील ने एक बार पूरे शहर को जल उपलब्ध करवाया था। माना जाता है कि यह झील कभी सूखता नहीं है। इंदिरा गांधी नहर से वर्तमान में पानी निरंतर इस झील को मिलता रहता है।

शक्ति पीठ हिंगलाज माता का मंदिर

झील के अंदर कोने में आदि शक्ति पीठ हिंगलाज माता का मंदिर है जहां पूजा के लिए शहर वासी और अन्य स्थानीय लोग आते रहते हैं। गड़ीसर झील अपने सभी किनारों पर सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है। सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय का दृश्य यहां से बहुत आकर्षक दिखता है। किले के काफी नजदीक होने की वजह से देशभर के अलावा विदेशों से भी पर्यटक यहां आते हैं।

झील के इर्द गिर्द कई सारे मंदिर एवं धार्मिक स्थल हैं। झील के बीचों बीच गुम्बदनुमा इमारत झील को और अधिक आकर्षक बनाती है। सर्दी के दिनों में यहाँ कई सारे पक्षी आते हैं। यहां के खूबसूरत शांत नजारे को पर्यटकों द्वारा ख़ासा पसंद किया जाता है।

   
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