इस जगह दुल्हे का सिर काट लिया करता था शैतान, लोगों ने इस प्रकार मिला छुटकारा!

Jalore Khimaj Mata Mandir: खीमज माता मंदिर भीनमाल जालौर।
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देव दानव युद्ध,
यह रीत बहुत पुरानी है।
बुद्धिमता से हल करो,
यह सदियों पुरानी कहानी है।

ऐसा दानव जो लड़कियों की शादी नहीं होने देता था।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे देव स्थान में ले चलता हूं, जहां की कहानी को सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जहां पर लड़कियों की शादी होने से पहले ही दूल्हे का सिर काट लिया जाता था! घबराइए मत- कहानी कुछ और भी है।

स्थान का परिचय।
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जालौर जिले के भीनमाल (Bhinmal) तहसील से तीन किलोमीटर दूरी पर पहाड़ियों के ऊपर खीमज माता (Khimaj Mandir) के मंदिर में पहुंचने पर हमारी संवाददाता खुशबू ने वहां की सुंदरता और आने जाने के रास्ते की विस्तृत जानकारी देकर बताया की ऐसी सुंदरता बीरली ही देखने को मिलती है। पहाड़ी के ऊपर सुबह शाम की सुंदरता और ठंडी ठंडी हवा के बारे में जानकारी देकर सभी दर्शकों का मन मोह लिया
खीमज माता के मंदिर में खुशबू से बात करते हुए वहां के पंडित जी ने बताया कि यह मंदिर भीनमाल (Bhinmal) की स्थापना के समय से ही है। पहले भीनमाल का नाम श्री श्रीमाल फिर, आल माल फिर, फूलमाल और उसके बाद भीनमाल हुआ। यहां पर पहले ब्राह्मणों का राज था दूसरी कोई भी जाति यहां पर नहीं थी।
यहां पर पहले कन्याओं की शादी होना बहुत ही दुर्लभ बात थी क्योंकि उस समय यहां पर एक राक्षस रहा करता था। जिस किसी भी कन्या की शादी होती तो उस दूल्हे का सिर धड़ से अलग कर दिया जाता था। तो यहां पर कोई भी लड़का शादी करने के लिए नहीं आता था। इसलिए आस-पास के गांव वाले बहुत दुखी हुए और उन्होंने मीटिंग बुलाई और सब मिलकर राजा के पास में गए।
राजा ने माता से गुहार लगाई और माता ने उनको वरदान दिया कि जाओ जब तक रात्रि में शादी होती है खड़े रहना, कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। इस प्रकार गांव की लगभग सभी लड़कियों की शादी करवा दी।

श्रीमाली (Shrimala) की उत्पत्ति।
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Jalore Khimaj Mata Mandir
एक दिन एक कन्या का विवाह हो रहा था, तो राजा को नींद आ गई। उसी समय दूल्हे का सिर काट लिया। नींद खुलते ही राजा ने माता के सामने फिर गुहार लगाई। तो माता ने कहा कि जावो दौड़ कर जो भी रास्ते में पहला व्यक्ति मिले, उसी का सिर काट कर ले आवो। तो उस समय रास्ते में एक माली जाति का व्यक्ति आ रहा था उसका सिर काट कर ब्राह्मण के धड़ के ऊपर लगा दिया। इस प्रकार श्रीमाली जाति की उत्पत्ति हुई और इनसे उनका वंश चला।

मेला और पूजा उपासना।
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माताजी का मेला कब लगता है इसके जवाब में पंडित जी कहते हैं कि सावन माह की चौदस को इनका मेला लगता है। वैसे हर दशमी को यहां पर काफी लोगों की भीड़ और पूजा पाठ की मान्यता देखने को मिलती है।
जो भी व्यक्ति यहां पर जात जडूला करने आता है, तो नारियल, मावा, लड्डू, लापसी का भोग चढ़ा कर लाभ प्राप्त करता है। यहां पर पूरे भारतवर्ष से दर्शनार्थी दर्शन कर लाभ उठाते हैं। क्योंकि यह 36 कौम की कुलदेवी है। जो भी व्यक्ति अपनी मान्यता लेकर आता है। उसकी यहां पर मान्यता पूरी होती है।

अन्य
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दर्शको ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहां पर बहुत ही शांति मिलती है। पॉजिटिविटी हजार गुना बढ़ जाती है,और बहुत सुकून मिलता है। हम यहां पर बार-बार आते हैं और यहां की ऊंचाई और अनुपम दृश्य देखते ही बनता है। Jalore Khimaj Mata Mandir

अपने विचार।
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शिखर शिरोमणि खीमज माता,
देख रहा खुला आसमान।
रोम-रोम पुलकित हो जाता,
जब बैठो लगाकर ध्यान।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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