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जालौर

1220 मी. ऊँचे सुंधा पहाड़ पर स्थित राजस्थान की प्रसिद्ध चामुंडा माता का रहस्य, पढ़ें पौराणिक कथा

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jalore sundha chamunda mata mandir

आज हम आपको मां शारदे के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जिसकी ऐतिहासिक और पौराणिक कथा उसे एक अलग स्थान देती है। हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जिस मंदिर में जाने से लोगों की मुरादे तो पूरी होती ही है साथ ही लोगों को वहां का नजारा इतना भाता है कि लोगों का मन करता है कि बस वही पर बस जाएं। हम बात कर रहे हैं राजस्थान (Rajasthan) के जालोर (Jalore) जिले में ऐतिहासिक एवं पौराणिक सौगंध पर्वत जिसे सुंधा पहाड़ (Sundha Pahad) कहते हैं, वहां स्थित मां चामुंडा के मंदिर (Maa Chamunda Mandir) की।

मां चामुंडा का मंदिर आस्था का केंद्र है,यहां राजस्थान के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व देश भर के तमाम लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। चामुंडा माता मंदिर (Chamunda Mata Mandir) की इतिहास की कहानी हम आपको बताएं उससे पहले हम आपको वहां के नजारे के बारे में बताना चाहते हैं। कहते हैं कि बारिश के समय में मां चामुंडा के आसपास का इलाका इतना सुंदर हो जाता है कि मानो स्वर्ग का नजारा आप अपनी आंखों से देख रहे हो।

वहां की हरियाली, झरने बहते हुए इतने सुंदर और मनमोहक लगते हैं कि भक्तों का मन वही बस जाता है। बारिश के समय बादलों का झुकाव इतना सुंदर नजर आता है कि बादल भी मां के दर्शन करने के लिए जमीन पर उतर आए हो।

मां चामुंडा के मंदिर के इतिहास की बात करें तो बताया जाता है कि सुंधा माता का मंदिर (Sundha Mata Temple) शासक नरेश चाचिगदेव ने संवत 1319 में अक्षय तृतीया के दिन स्थापना करके बनवाया था। इसके अलावा बताया जाता है कि 2 जुलाई 1986 को मालवाड़ा के ठाकुर दुर्जन सिंह देवल ट्रस्ट भी वहां बनवाई गई। वही कहते है कि हम मंदिर 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के पास सागी नदी जो 40 से 45 फीट ऊंची सुरंग से गुफा में स्थित मां चामुंडा के मंदिर के पास बहती है।

महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने भी ली शरण

बताया जाता है कि साल 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध के समय महाराणा प्रताप ने भी माता के मंदिर में शरण ली थी।

मां अघटेश्वरी की महिमा अपरंपार

चामुंडा मां की मंदिर में संगमरमर के स्तंभों की जो कलाकृति और कारीगरी की गई है वह भक्तों को मनमोहित कर देती है। इसके अलावा मां की प्रतिमा इतनी सुंदर है कि जब भी भक्त दर्शन करने आते हैं तो मानो ऐसा लगता है कि मां उनके सामने उन्हें साक्षात दर्शन दे रही है। इसके अलावा मंदिर के इतिहास के बारे में हम आपको बताएं तो चामुंडा मां के धड़ कोटडा में पूजा जाता है।

कहते हैं कि राजा दक्ष से यहां यज्ञ को विध्वंस के बाद शिव जी ने यज्ञ देवी के जले दुस पत्नी सती के शव को कंधे पर लेकर तांडव नृत्य किया था। इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के टुकड़े-टुकड़े कर उसे भिन्न- छीन कर दिया था। इसके बाद सुंधा पर्वत पर सती का सिर आकर गिरा था। जिसके बाद उस जगह मंदिर का नाम अघटेश्वरी पड़ गया और वहां मां चामुंडा की पूजा होने लगी।

बकासुर का किया था सर्वनाश

मां चामुंडा के मंदिर में आज भी एक शिवलिंग की पूजा होती है। वही बताया जाता है कि मां के मंदिर में एक सुरंग भी है,जो बहुत लंबी है। सुरंग को अभी आम भक्तों के लिए बंद कर दिया गया है। लोग कहते हैं कि उस सुरंग में सांप व अन्य जानवरों का घर है। लेकिन अगर सुरंग के अंदर कुछ हिस्से को देखें तो देखा जा सकता है। वही कहते हैं कि राज परिवार यहां मां के दर्शन के लिए सुरंग के रास्ते से आया करते थे।

मां चामुंडा के इतिहास के बारे में बताएं तो कहा जाता हैं कि बकासुर राक्षस का वध करने के लिए 7 शक्तियों ने एक साथ अवतार लिया था और बकासुर का वध किया था।

नेता भी करते है दर्शन

मां चामुंडा का आशीर्वाद आम भक्त तो लेते हैं साथ-साथ नेता भी यहां मां के दर्शन करने के लिए आते हैं। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी मां चामुंडा के दर्शन के लिए आती है। साथ ही साथ अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) भी मां चामुंडा में अपनी आस्था रखते हैं। इसके अलावा सचिन पायलट (Sachin Pilot) राजस्थान और देश के तमाम बड़े नेता मां चामुंडा के दर्शन के लिए सुंधा पर्वत पर आते हैं।

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