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झुंझुनू

आठ फ्रेक्चर के बावजूद झुंझुनूं के इस युवक ने फतह की माउंट एवरेस्ट, जज्बे और जुनून की गजब कहानी

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अगर किसी के शरीर में आठ फ्रेक्चर हों, कंधा दर्द से कराह रहा हो, पैर टूट जाए और एक कदम चलना भर भी नामुमकिन लगे ऐसे में आपको हम कहे कि एक शख्स ने दुनिया की सबसे ऊंटी चोटी पर फतह पा ली, तो आप एक बार के लिए यकीन नहीं करेंगे।

लेकिन आज हम जिसकी कहानी आपको बताने जा रहे हैं वो जिद और जज्बे की है जिसके आगे माउंट एवरेस्ट जैसी चोटी भी नतमस्तक हो गई। झुंझुनूं के सोलाना निवासी अनिल धनखड़ जिन्होंने अपने शरीर में आठ फ्रेक्चर होने के बावजूद बीते 1 जून को सुबह 6:30 बजे साथियों के साथ माउंट एवरेस्ट फतह किया एवं राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराया।

झुंझुनू जिले के चिड़ावा कस्बे के पास सोलाना निवासी अनिल कुमार धनकड़ ने 17 वर्ष की उम्र में सेना में हवलदार की नौकरी की।

फ्रेक्चर के बाद देखा माउंट एवरेस्ट फतह करने का सपना

अनिल जब माउंटिंग के लिए तैयारी कर रहे थे तो उस दौरान एक पहाड़ से गिरने के कारण उन्हें फ्रेक्चर आया और वह 3 दिन तक होश में नहीं आ सके। इस घटना के बाद उनके हाथ, पैर, गर्दन सबकुछ टूट चुके हैं, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और खुद को हमेशा माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए तैयार करते रहे।

तूफानों से नहीं हारी हिम्मत

अनिल बताते हैं कि जब उन्होंने माउंट एवरेस्ट की चढाई शुरू की तो कई तूफानों ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की लेकिन वह नहीं रूके। कई साथियों ने बीच में उनका साथ छोड़ दिया लेकिन वो टिके रहे।

अभी कई पहाड़ करने है फतह

अनिल धनखड़ माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद खुद का सफर खत्म नहीं मानते हैं वह कहते हैं कि दुनिया के 8 हजार मीटर से ऊपर ऊंचाई के हर पहाड़ वो वह फतह करना चाहते हैं। अनिल की इस उपलब्धि के बाद जब वह पहली बाक गांव लौटे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ।

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