बादलगढ़ किले की कहानी जब राजा ने बिड़ला परिवार को दिया सैनिक स्कूल के लिए गढ़

इस किले का निर्माण कायमखानी नबाबों के सहयोग से हुई थी. 16वी शताब्दी में कयामखानी शासक नवाब फैजल खान द्वारा इस किले का निर्माण करवाया गया था, जिसे उस समय फैजलगढ़ के रूप में भी जाना जाता था. इस किले के निर्माण का कार्य 17वीं शताब्दी में पूरा हुआ. बाद में जब शेखावत शासक महाराजा शार्दुल सिंह ने झुंझुनू को अपने अधीन कर लिया, तब उन्होंने इस किले पर भी कब्जा कर लिया और तब से इस किले को बादलगढ़ किले के रूप में जाना जाता है.

झुंझुनू का अन्तिम नवाब रुहेल खान जो आस-पास के अपने ही वंश के नवाबों से प्रताड़ित था, उसने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए शार्दूल सिंह शेखावत को यहाँ बुलाया था. रुहेल खान की मृत्यु के बाद विक्रम सम्वत 1787 में झुंझुनू पर शेखावत राजपूतों का अधिपत्य हो गया जो भारत की आजादी के बाद हुए अधिग्रहण तक चलता रहा.

बादलगढ़ का किला ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है. इसके साथ ही यह किला चट्टानी पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से में स्थित है जिससे इसकी प्राचीर से झुंझुनू शहर का व्यापक नजारा देखने को मिलता है. यह किला नेहरा पहाड़ी की चोटी के एक भाग पर मौजूद है. किले में माँ दुर्गा और बजरंग बली जी के दो मंदिर भी हैं, जो इस किले की शोभा बढ़ाते हैं. बादलगढ़ किले की दिवारों पर किया गया काम काफी खूबसूरत और मनमोहक है, जो पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है.

तो यहाँ खुल जाता 1965 में ही झुंझुनू का खुद का सैनिक स्कूल

राव शार्दूल सिंह शेखावत के पांचवे पुत्र केसरी सिंह के समय यहाँ पर लक्ष्मीनारायण मंदिर का निर्माण हुआ जिससे इस गढ़ की शोभा बढ़ गयी। केसरी सिंह के उस वक़्त हिस्से में डूंडलोद क्षेत्र आया जहाँ पर उन्होंने 1750 ईस्वी में डूंडलोद गढ़ का निर्माण करवाया। परिवार के वंशजो के अनुसार डूंडलोद के अंतिम शासक रावल हरनाथ सिंह बहादुर ने 1965 में यह गढ़ सैनिक स्कूल के लिए बिड़ला परिवार को दे दिया। लेकिन कुछ कारणों से सैनिक स्कूल नहीं खुल पाया।

यह किला राजस्थान के अधिकांश किलों की तरह आज भी एक विरासत होटल के रूप में नहीं चलाया जा रहा है, बल्कि किले की प्राचीर से झुंझुनू शहर को देखने के लिए पर्यटकों के लिए खुला हुआ है. झुंझुनू में बादलगढ़ का किला रमणीय दर्शन स्थलों में एक है, जो सभी पर्यटकों को लुभाता है. अगर आप झुंझुनू में घूमने जा रहे है तो इस किले का जरूर भ्रमण करें.

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