बलवंतपुरा रेलवे स्टेशन की कहानी जिले गांववालों ने अपने पैसों से बनवाया था, पढ़ें यह किस्सा!

Balwantpura Railway Station Story: बलवंतपुरा रेलवे स्टेशन झुंझुनू राजस्थान।
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जज्बा और जुनून तो देखो ,
जब मिल्खा ट्रेन संग भागा था।
गांव वालों ने स्टेशन बनाया,
जब उनका जमीर जागा था।

भारत का पहला रेलवे स्टेशन ग्रामीणों के नाम।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे रेलवे स्टेशन पर ले चलता हूं।जहां के लोगों का जनून देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। तेरह वर्ष के अथक प्रयास के बाद ग्रामीणों को जो सफलता मिली, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी गई।

बलवंतपुरा रेलवे स्टेशन।
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Balwantpura Railway Station Story
रेलवे स्टेशन के कर्मचारी ने हमारे संवाददाता अरुण से बात करते हुए ग्रामीणों की सफलता के बारे में विस्तार पूर्वक बात की। उन्होंने बताया सन् 1992 को बलवंतपुरा रेलवे स्टेशन (Balwantpura Railway Station Story) बनाने के बारे में फाइल चलाई गई।लेकिन इसे मंजूरी साल 2002 में मिली और 2005 में क्रियान्वित हुई। रेलवे की शर्त अनुसार रेलवे स्टेशन बन जाएगा, लेकिन रेल विभाग एक पैसा भी खर्च नहीं करेगा। यदि आप पैसा खर्च कर सकते हो, तो आगे की पूरी कार्यवाही रेल विभाग कर सकता है।
उन्होंने बताया की कुछ अलग हटकर करने की मुहिम चलाने में बजरंग लाल जांगिड़ तथा उनके पुत्र सांवरमल जांगिड़ का मुख्य योगदान रहा है।उन्होंने आसपास के लगभग पन्द्रह गावों में इस मुहिम को चलाकर सब की स्वीकृति ली तथा इसमें हर व्यक्ति का योगदान रहा है किसी ने मिट्टी भराई है, किसी ने सीमेंट दी है, किसी ने लोहा दिया है, किसी ने कंकरिट दी है। किसी ने ट्रैक्टर से काम किया है,किसी ने मजदूरी की है। लेकिन भारत का यह पहला रेलवे स्टेशन है जो बिना रेलवे के योगदान के बना हुआ है।

मुख्य उद्देश्य क्या है।
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इसके उद्देश्य के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि सबसे ज्यादा फायदा फौजी जवानों को होता है। मुंबई, कोलकाता,सूरत आने जाने वाले व्यापारियों को होता है।स्कूल के बच्चों को होता है। किसानों को होता है,जो कम खर्चे यातायात का लाभ प्राप्त करते हैं।
यहां पर साधारण रेलगाड़िया ही रुकती हैं। द्रुतगामी रेल नहीं रुकती है। इसलिए इसको आदर्श रेलवे स्टेशन बनाने की मुहिम चल रही है। इसके लिए वह कहते हैं कि यदि रेल विभाग इस पर खर्चा नहीं करेगी। तो ग्रामीण फिर खर्चा करने के लिए तैयार हैं। यहां पर सुबह 7:50 पर एक रेलगाड़ी रूकती है, और शाम को 6:50 पर वही वापस आते समय रूकती है।
जिला परिषद सदस्य बीरबल जी गोदारा ने बताया कि पहले यहां तीन गाड़ियां रूकती थी।और अब एक गाड़ी रूकती है।इसलिए यदि ठहराव सुनिश्चित हो जाए तो जन सहयोग के द्वारा हम सब कुछ करने के लिए तैयार है।

अन्य
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चेलासी बलवंतपुरा रेलवे स्टेशन भारत का पहला रेलवे स्टेशन है, जो जन सहयोग से बना हुआ है। यह G K के पेपर में भी सवाल आता है।

अपने विचार।
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आगे होने की हिम्मत चाहिए,
साथ देने को सब तैयार है।
उसको कौन मना करेगा,
जिसके रोम रोम में प्यार है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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