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झुंझुनू

झुंझुनू के बामलास गांव की बामलास माता के मंदिर की कहानी

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माता का यह मंदिर लगभग चार सौ साल पुराना है।यह मंदिर झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के उदयपुरवाटी (Udaipurwati) तहसील में स्थित है।बामलास माता का मंदिर (Bamlas Mata Mandir) गांव से थोडी़ दूरी पर एक पहाड़ी पर बना हुआ है। पहाडी़ की चोटी पर एक गुम्बद बना हुआ है जो दूर-दूर से दिखाई देता है। गुम्बद की चोटी पर माता की ध्वजा लहरा-लहरा कर माता के भक्तों को रास्ता दिखाती है। कहते हैं माता का यह मंदिर यहां के बासिंदो को शुरू से ही लोगों को आपदाओं से बचाता आया है। पूर्व काल में जब चो’र-डा’कू आदि का हम’ला होने वाला होता था तब मात स्वयं पहाडी़ पर से आकाशवाणी के माध्यम से लोगों को साव’धान कर देती थी और लोग-बाग अपनी और धनपशु की सुरक्षा को लेकर सजग हो जाते थे। मंदिर के पुजारी और वहां पर आए हुए श्रद्धालुओं से बातचीत के दौरान हमें माता कुछ और पर्चों (घट’नाओं) का पता भी चला।

कहते हैं एक बार माता के मंदिर में कुछ चो’र घुस आए और उन्होनें माता की मूर्ति में लगी नाक जो कि सोने की बनी हुई थी, उसको का’टकर चु’राकर भागने लगे। उनकी उस उद्दंडता से बामलास माता क्रो’धित हो गई और उन्हें माता का प्र”कोप झेलना पडा़। माता की प्रेरणा से दो बडी़ शिलाऐं उन चो’रों के पीछे- पीछे गिरने लगी और वो उसके नीचे दबकर अपने अंजाम को प्राप्त हो गए। इसी तरह एक और किवदंती है कि एक बार एक पत्थर के ठेकेदार ने माता के मंदिर वाली पहाडी़ से पत्थर खोदकर निकालना चाहा तो उसे भी माता के गु’स्से का सामना करना पडा़। कहते हैं जब ठेकेदार बार-बार प्रयास करके हार गया तब माता स्वयं पहाडी़ पर प्रकट हुई और पास की दूसरी पहाडी़ पर खुदाई करने का आदेश दिया।

मंदिर के पुजारी के अनुसार वर्तमान बामलास गांव हमेशा से यहां नहीं था। बुजुर्ग बतातें हैं कि पहले का बामलास गांव आज की बस्ती से लगभग 1 किलोमीटर पूर्व में बसा हुआ था। वहां से चूहों की बिमारी (प्ले’ग) फैलने के बाद लोग यहां(वर्तमान बस्ती) पर आकर बस गए। यहां के लोग और आने वाले श्रद्धालु जन चे’चक (माता) ओरी आदि से रक्षा के लिए भगवती दुर्गा रूपी माता बामलास को दही, छाछ, राबडी़ और भेंट चढाते हैं। नवरात्रा के समय माता के मंदिर मेन भंडारा होता है हजार-पंद्रह सौ भक्त रोजाना भोजन करते हैं। माता की महिमा आसपास के गांवों में भी खूब है यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का तातां लगा रहता है। माता के भक्तों का कहना है कि नाक काटने वाली घ’टना के बाद भले ही माता ने बोलकर चे’तावनी देना बंद कर दिया हो पर अगर आप सच्चे मन से माता से कुछ अरदास करते हैं तो माता जरूर पूरा करती है।

भारत में, विशेष कर राजस्थान में ऐसी देवियों की कई पीठ रहीं हैं जिनको लगातार लोक में आराध्या माना जाता है।शादी, खर्च, जन्म आदि में इनकी धोक के बिना कोई शुरू नहीं करते।प्रदेश जाना हो तो लोग इन लोक के देवताओं की आज्ञा लेकर ही घर से निकलते हैं।श’कुन देखते हैं, अप’श’कुन होने पर थैला लिए बस स्टैंड से भी वापिस लौट आते हैं।बहरहाल यह नितांत निजी और उनकी आस्था का प्रश्न है। बहस का विषय तो बिल्कुल नहीं।

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