झुंझुनू में मौजूद यह मंदिर है हजारों साल पुराना, होती हैं चमत्कारिक घटनाएं…

Bheronji Mandir Khetdi Jhunjhunu: भेरुजी मंदिर खरकड़ा खेतड़ी झुंझुनू।
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मन बड़ा, मंजिल बड़ी,
सबसे बड़ा विश्वास।
चमत्कार एक काज है,
सब जीवन के खास।

हजारों साल पुराने मंदिर की अनछुई कहानी।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे स्थान पर ले चलता हूं, जहां की कहानी अद्भुत है, वह स्थान जिस की कहानी सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। वह मंदिर हजारों साल पुराना है और उसके कारनामे भी उसी प्रकार के हैं। उसकी अद्भुत कहानी और स्थापना के विषय में मैं आपको नीचे विस्तार से बता रहा हूं।

स्थान और परिचय।
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झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के खेतड़ी कस्बे के पास में खरखड़ा गांव में स्थित मतवाला भैरू जी मंदिर के पुजारी जी ने खुशबू से बात करते हुए उसकी स्थापना और चमत्कारी घटनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बातें बताइ। पुजारी जी ने बताया कि अब से हजारों साल पहले जब पांडव भ्रमण करते हुए काशी जी पहुंचे, तो वहां से मतवाला भैरू जी को साथ में लेकर चलने लगे। भैरू जी ने उसी समय कह दिया था कि जिस वक्त मुझे नीचे उतार दोगे मैं वहीं पर स्थापित हो जाऊंगा। इसलिए मुझे नीचे सोच समझकर उतारना।

स्थापना।
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पांडव घूमते हुए खेतड़ी के पास से खरकड़ा गांव की पहाड़ियों में पहुंचे, तो भेरुजी महाराज का कहा हुआ वचन भूल गए और नीचे उतार दिया। जैसे ही नहा धोकर चलने लगे तो भेरुजी महाराज को उठाने लगे तो भेरुजी ने कहा कि अपना वचन याद करो। अब मैं नहीं उठूंगा। तब वहीं पर भैरू जी महाराज को स्थापित करके पांडव आगे चले गए।
वहां पर एक औरत अपने दो बच्चों के साथ तातीजा गांव जा रही थी वह अपने पीहर जा कर भूल गई कि मुझे वापिस जाना है क्या। वहां पर उसके दो भाइ रोज बकरी चराने के लिए भेरुजी महाराज के पास पहाड़ियों में आते थे। वहां उन बकरियों का दूध रोज भैरू जी पी जाया करते थे।
एक दिन जब बकरी का दूध पीते हुए देख लिया तब परिचय हुआ व भेरुजी महाराज ने कहा कि मेरी पूजा किया करो। तब उन्होंने कहा कि हम छः छः महीने तक नहाते नहीं हैं, मल मूत्र के हाथ भी नहीं धोते हैं, हम आप की पूजा कैसे कर सकते हैं। तब भेरुजी महाराज ने कहा कि मेरे यहां पर सब चलता है आप इसकी चिंता मत करो। Bheronji Mandir Khetdi Jhunjhunu

भक्तगण।
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भेरुजी महाराज के दिल्ली से आगे तक के भक्त आते हैं, और शनिवार को बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। शनिवार के दिन तीन हजार से पांच हजार तक भक्तों की यहां पर भीड़ रहती है। सब यहां अपनी मन्नत पूरी करने हेतु आते हैं। सबकी मन्नत पूरी होती व भेरुजी महाराज के प्रसाद के रूप में मखाणा, लड्डू, पेड़ा, बर्फी तथा सभी प्रकार प्रकार की मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
भेरुजी महाराज का मेला माघ मास की शुक्ल पक्ष के द्वादशी और त्रयोदशी को भरता है। यहां पर बहुत से भक्तों को पुत्र रत्न प्राप्ति होती है,तब बड़ी-बड़ी सवामणी लेकर आते हैं और अपने मनमाफिक प्रसाद चढ़ाकर जाते हैं। भेरुजी की मूर्ति के चार मुख दर्शाए गए हैं वह उसकी प्रारंभिक अवस्था ही है। पूरा निर्माण कार्य सोलाना के एक व्यापारी घराने का कराया हुआ है। ” 52 भैरव 64 जोगनी ” यह भैरू जी महाराज की पुरानी कहानी है।

अपने विचार।
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सत्कर्म के अंश बड़े,
हजारों वर्ष तक उड़ते हैं।
ज्यों ज्यों धरती पलटा मारे,
त्यों त्यों आगे जुड़ते हैं।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

कद छोटा मगर हौसलों में है जान- सीकर की बबीता तैराकी में करती हैं अच्छों-अच्छों को फेल!

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