1971 की जंग के हीरो झुंझुनू के कर्नल देवीसिंह उनकी बहादुरी देख खुद इंदिरा गाँधी खुद उनसे मिली

शहीदों की जन्मभूमि जिला झुंझुनू पूरे हिंदुस्तान में अपनी पहचान रखता है, इस धरती से बहुत सारे वीर जवान निकले है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में पीछे नहीं हटे, लेकिन आज के इस लेख हम जिस हीरो की बात करने जा रहे है वो है 1971 के भारत पाकिस्तान जं’ग के हीरो कर्नल देवीसिंह की जिनका दिल्ली में इलाज के दौरान मृ’ त्यु हो गई और उनका झुंझुनू जिले में ही अपने पैतृक गाँव में उनका पूरे जोश और जूनून के साथ श्रृद्धांजलि दी गई।

कर्नल देवीसिंह झुंझुनू जिले के खेतड़ी तहसील के हरड़िया गाँव में हुआ था और कुछ समय से वो जयपुर में रह रहे थे जिनका इलाज के लिए दिल्ली लेके गए और वहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। पूरे गाँव में उनके जाने से शोक का माहौल था जिन्हे जवानों के द्वारा गार्ड ऑफ़ ऑनर और पुष्प चक्र चढ़ाये गए और उनके देश सेवा में बलिदान को सबने अपनी आँखों में संजोये हुए उनको नम आँखों से श्रृद्धांजलि दी।

कर्नल देवी सिंह वतन के लिए कार्य करते करते 1993 में सेवानिवृत हुए थे जिसके बाद 1994 से भूतपूर्व सैनिक कल्याण सहकारी समिति (जयपुर) में कार्य शुरू किया और वे लगातार पूर्व सैनिकों के वेलफेयर के लिए काम करते रहे जो सेना के कभी न हार मानने वाली भावना को उजागर करती है चाहे वो ऑन ड्यूटी हो या ऑफ ड्यूटी।

कर्नल देवी सिंह एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने 1971 में जंग लड़ा था और जीत भी हासिल की थी। आज वही व्यक्ति अपने इलाज के दौरान अपनी जान से हार गया और हमेशा के लिए इस भारत भूमि को छोड़कर चला गया। सन 1971 साल में भारत और पाकिस्तान के बीच में एक बहुत बड़ी जंग हुई थी। इस जंग में कर्नल देवी सिंह का बहुत बड़ा योगदान था। इनके संबंध में कहा जाता है कि सन 1964 साल में 9 फरवरी के दिन कर्नल देवी सिंह को 13 कमान में शामिल किया गया था। अपने पराक्रम का प्रमाण इन्होंने भारत पाकिस्तान के यु’ द्ध के बीच प्रमाणित किया था।

कर्नल देवी सिंह के इस वीरता के कारण है उन्हें वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। जब करनाल देवी सिंह भारत और पाक यु’ द्ध में अपने दुश्मनों से यु’ द्ध लड़े थे उस समय वे जख्मी भी हुए थे और अस्पताल में भर्ती भी थे ऐसे समय में उनसे इंदिरा गांधी भी मिलने गई थी और उनके वीरता की प्रशंसा भी उन्होंने किया था।

हरड़िया में कर्नल देवी सिंह को पूरे सैन्य सम्मान के द्वारा अंतिम विदाई दिया गया। हरड़िया कर्नल का पैतृक गांव है जहां पर सभी लोगों ने बड़े ही शोक के साथ अपने हृदय में पत्थर रखते हुए कर्नल देवीसिंह को सभी ने विदा किया। अपनी झुंझुनू की मिट्टी के लाल कर्नल देवी सिंह को हम नम आँखों से श्रृद्धांजलि देते है

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