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झुंझुनू

अन्नदाता धर्मवीर खीचड़ की देशी कहानी जानें!! कैसे जैविक खेती से कमाते लाखों रूपए

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गाय गहना शोभा घर की,
सुख समृद्धि आय।
देसी शुद्ध भोजन हो जहां पर,
गरीबी घर से जाए।

देसी गाय और पर्यावरण संरक्षण।
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दोस्तो नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको अन्नदाता के नाम से प्रसिद्ध, नए नए नवाचार करने वाले, शुद्धता की पहचान देने वाले, झुंझुनू जिले के नवलगढ़ तहसील के देलसर खुर्द गांव के रहने वाले धर्मवीर जी खीचड़ से रूबरू करवा रहा हूं। धर्मवीर जी ने पिछले 15 साल में कृषि के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। एक नई मिसाल कायम की है।

नवाचार करने का विचार कैसे आया।
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खुशबू से बात करते हुए धर्मवीर जी ने बताया कि 2008 में मोरारका फाउंडेशन वाले जो कृषि उत्पाद को बढ़ाने का और जैविक खेती को बढ़ावा देने के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।वो यहां पर आए थे जिन्होंने बताया कि आप जैविक खेती करो। उसमें बहुत फायदा होगा।

उस समय हमारी जमीन यूरिया व डीएपी से काफी प्रभावित हो चुकी थी। इसलिए हमने पूरा मानस बनाया कि अब हमको जैविक खेती करनी है। जैविक खेती में किसी भी प्रकार का खर्चा नहीं लगता है। गायों से खाद उत्पन्न होगी और खाद से खेती। इस प्रकार यह चक्कर चलेगा और जैविक खेती का उत्पाद भी महंगा बिकेगा और स्वास्थ्यवर्धक होगा। इस प्रकार हमें यह कार्य शुरू किया। पहले आप क्या करते थे के जवाब में उन्होंने बताया कि पहले मैं कुएं की मोटर ठीक करता था वह काम अब लगभग बंद हो गया है।

गायों के बारे में।
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उन्होंने बताया कि सबसे पहले मैं तीन चार गाय लाया। तीन चार गायों से बढ़ाते बढ़ाते मेरे पास इस समय 40-45 गाय हैं जिनमें सात आठ देसी गाय हैं। जिनका घी ₹2000 किलो और दूध ₹60 लीटर बिकता है। उनका गो मूत्र बड़ी बड़ी बीमारियों के अंदर बहुत ही लाभप्रद है। उनके मूत्र से कीटनाशक बनाया जाता है, जो बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है।

उन्होंने बताया की शुरुआत में दो-तीन वर्ष तक लाभ नहीं हुआ लेकिन अब 15 मण बीघा की गेहूं होती हैं। जो उच्च भाव में बिकती है। एक काली गेहूं है जो ₹8000 क्विंटल बिकती है। मैंने सरसों के तेल की मशीन भी लगा रखी है सरसों का तेल ऑर्गेनिक होने के कारण ऊंचे भाव में बिकेगा।

खाद और कीटनाशक।
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उन्होंने बताया कि हम यहां पर केंचुआ खाद तैयार करते हैं। गोबर गैस की सैलरी तैयार करते हैं। आक, धतूरा, गोमूत्र,नीम आदि से मिलाकर कीटनाशक तैयार करते हैं। जो बहुत ही कारगर है। बाजार का रासायनिक उत्पाद बिल्कुल भी प्रयोग में नहीं लेते हैं। एक जीवामृत का प्लांट लगा रखा है। जो खेती के लिए बहुत ही लाभदायक है।

बगीचा।
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उन्होंने बताया कि इस समय मेरे पास में 450 पेड़ मौसमी के, 200 पेड़ थाई एप्पल के, 80 पेड़ अंजीर के, 50 पेड़ अमरूद के, नींबू के और इसके अलावा किन्नू , बेर आदि के पेड़ हैं। इसके अलावा इस वर्ष से नर्सरी भी तैयार कर रहा हूं। जिससे खेत में पेड़ लगाए जा सकेंगे और दूसरे लोगों को भी सप्लाई करूंगा।

आमदनी।
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उन्होंने बताया कि इस समय पांच हजार रुपए प्रतिदिन का शुद्ध लाभ कमा रहा हूं। अर्थात एक लाख से ऊपर डेढ़ लाख रुपए तक का प्रति माह शुद्ध लाभ है। हमारा उत्पाद प्रतिदिन यहां से ऑर्डर के ऊपर जाता है और टेंपो वाला पेमेंट लाकर दे देता है। हमको कहीं भी नहीं जाना पड़ता। ऑर्गेनिक गेहूं चना या फल फ्रूट सब पहले से ही बुक हो जाते हैं।

अन्य।
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धर्मवीर जी की पत्नी ने बताया कि शुद्ध भोजन खाते हैं। इसलिए हमारे घर में किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं है।

अपने विचार।
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जज्बा हो मन में कुछ करने का,
तो धरती मां सोना उगलती है।
पड़े रहोगे आलस्य में तो,
सिंचित धन भी निंद्रा निगलती है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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