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झुंझुनू

सरकारी नौकरियों वाला गुलाबी रंग का अनूठा गाँव जहाँ हर घर से एक सरकारी अधिकारी पद पर काबिज

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आज हम आपको राजस्थान के झुंझुनू जिले के ऐसे गांव की कहानी बताएंगे हर घर से एक न एक व्यक्ति सरकारी अधिकारी हैं। हम बात कर रहे हैं झुंझुनू जिले के मंडावा तहसील के हरनाथपुरा गांव की। इस गांव को कृष्णिया का बास के नाम से भी जाना जाता है। 25 घरों का यह गांव है। गांव के इतिहास के बारे में बताएं तो गांव को दो भाइयों ने बसाया था। नाथाराम और लिखमाराम ने बताया था खुद बसने के बाद दोनों भाइयों ने अपने पूरे परिवार को भी इसी गांव में बसा लिया था।

इसके बाद गांव में धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई और खाती परिवार तथा जाट परिवार इस गांव में आकर रहने लगे थे। गांव के रहने वाले लोग जब बाहर गए तो उन्होंने देखा कि पढ़ाई लिखाई करना जीवन में बहुत जरूरी है। तभी लोगों ने पढ़ाई करना शुरू कर दिया।

गांव के निवासी है हर क्षेत्र के अधिकारी : गांव के निवासी नवरंग राय बताते हैं कि पहले गांव में सभी लोग खेती करते थे। लेकिन पायनियर ने सभी लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। साल 1950 में उनकी मौत हो गई थी, वो कहते हैं कि पायनियर पकड़ पकड़ कर गांव के बच्चों को स्कूल ले जाया करते थे। बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करते थे, इससे प्रेरित होकर खुद नवरंग गाय ने भी 1956 में दसवीं कक्षा में 76% मार्क्स लाकर टॉप किया था। इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया और राजस्थान में टॉप किया था। इसके बाद उन्होंने इंग्लिश लेक्चरर के तौर पर जयपुर सीकर जैसे कई जगहों पर जाकर विभिन्न कॉलेज में पढ़ाया था।

वह बताते हैं कि शायद हरनाथपुरा गांव राजस्थान का एकमात्र गांव है जहां हर क्षेत्र में हर घर से कोई ना कोई व्यक्ति अधिकारी है। उनका खुद का भतीजा भी आज आईएएस है। साथ ही उनका भाई आईपीएस था और आईजी पद से रिटायर हो चुका है। उनका एक भाई दिल्ली में आज भी डीजीपी है। इसके अलावा गांव में कई आरएसएस अफसर है और वह खुद भी आरएसएस अफसर थे। गांव में 2 डॉक्टर है, दो कर्नल थे, साथ ही इंजीनियर भी है और आरपीएस भी थे। साथ ही गांव में अन्य क्षेत्रों में भी लोग नौकरी कर रहे हैं। वे कहते हैं कि गांव में ज्यादातर जाट परिवार है। इसके अलावा खाती परिवार भी रहते हैं। सभी लोग मिलजुल कर इस गांव में रहते हैं।

टांग टूटने के बाद बने आईएएस अफसर : गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि गांव में आज सभी लोग हर क्षेत्र में सरकारी अफसर हैं। उन्होंने बताया कि उनके खुद के घर के एक व्यक्ति की टांग टूट गई थी। टांग टूटने के बाद उन्हें किसी सहारे से स्कूल तक ले जाया गया और उन्होंने तब बोर्ड की परीक्षाएं दी थी। उनके परिवार का वह सदस्य आईएएस अफसर बना था, अब रिटायर हो चुका है।

गांव में एक अनूठी बात, साथ ही कुछ समस्याएं : इसके अलावा गांव के सभी 25 घरों में गुलाबी रंग का कलर करवाया गया है। इसके बारे में एक गांव के निवासी बताते हैं कि साल 2016 में गांव में शताब्दी मनाई गई। इसीलिए ऊपर भाईचारा और एकता को प्रस्तुत करने के लिए सभी घरों में पिंक कलर का पेंट करवाया गया था।

इसके अलावा गांव में कुछ समस्याएं भी है गांव निवासी बताते हैं कि गांव में पक्के रास्ते की सबसे बड़ी समस्या है। गांव को शहर से जोड़ने के लिए पक्के रास्ते की बेहद जरूरत है। इसके अलावा गांव में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की भी समस्याएं हैं, राजस्थान परिवहन निगम की एक भी बस यहां नहीं चलती है। इसके लिए लोगों को समस्याओं का सामना उठाना पड़ता है। इसके अलावा गांव के सभी निवासी भाईचारे और एकता के साथ खुशी-खुशी रहते हैं। हर त्योहार और हर खुशी साथ मिलकर मनाते हैं।

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