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झुंझुनू

मिस राजस्थान हिमांशी गौड़ बॉलीवुड में दिखाएगी टैलेंट के जलवे, देखें मॉडलिंग के सफर की कहानी

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कोई भी जगह अच्छी नहीं है,
कोई भी नहीं है बुरी।
हर स्थान अच्छा होता है
ना हो माता पिता से दूरी।

सात वर्ष की उम्र से ही मॉडलिंग में तहलका।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको उस शख्सियत से मिलवाने जा रहा हूं। जिसने मॉडलिंग के क्षेत्र में सात वर्ष की उम्र में कदम रख दिया था। और मिस राजस्थान रह चुकी है।

मिस राजस्थान का खिताब जीतने वाली, अब फिल्मों में।
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सवाई माधोपुर जिले के नोहटा गांव की रहने वाली हिमांशी गौड़ सन दो हजार अट्ठारह में मिस राजस्थान रह चुकी है। गिरीश कुमार के निर्देशन में बनने वाली राजस्थानी फिल्म” पीसो सैंको बाप ” में मुख्य नायिका का अभिनय कर अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। अपनी पहली ही फिल्म में हिमांशी ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने पांव जमा लिए हैं।

इस फिल्म की शूटिंग गुढ़ा गोडजी के मझाऊ गांव में हुई है। उसने दीप से बात करते हुए बताया कि मुझे बचपन से ही मॉडलिंग का बहुत शौक था। मैंने बचपन में सात वर्ष की उम्र में ही मॉडलिंग के क्षेत्र में कदम रख दिया था। मेरी मम्मी का सपना था कि मैं फिल्मों में जाकर अपने परिवार का नाम रोशन करूं। अभी मैंने ज्वेलरी तथा फर्नीचर के लिए फोटो शूट किए थे, मुझे मेरे मम्मी पापा का पूरा समर्थन और सहयोग है।

मेरी पहली ही फिल्म राजस्थानी है, इससे पहले मैंने स्कूल तथा कॉलेज में नाटक वगैरा में भाग लिया था। अभी मैंने फिलिप कार्ड के लिए एक एड फिल्म की है। मैं पढ़ाई में होशियार थी तथा डॉक्टर बनना चाहती थी। लेकिन मम्मी की इच्छा थी कि मैं एक्ट्रेस बनू। अभी मैं मिस इंडिया के लिए भी तैयारी कर रही हूं।

आपने इस लाइन का चुनाव कैसे किया।
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इस लाइन में शुरुआत कैसे हुई के उत्तर में हिमांशी कहती है कि उस समय मुझे मालूम नहीं था।अखबार में एक ऐड देखकर मेरी मम्मी ने मुझे सात वर्ष की उम्र में ही मॉडलिंग के क्षेत्र में उतार दिया था। उसके बाद में उस समय से लेकर आज तक मैंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

बचपन से लेकर आज तक आपका कैरियर कैसा रहा।
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बचपन से लेकर आज तक के कैरियर के बारे में पूछने पर हिमांशी की मम्मी ने बताया की शुरुआत में मैं नर्वस थी। लेकिन यह कभी भी नर्वस नहीं हुई। इसमें कॉन्फिडेंस का गुण कूट कूट के भरा हुआ है। जब भी कोई रिजल्ट सुनाता है, तो मैं नर्वस हो जाती हूं। लेकिन ये नहीं।

सभी बच्चों को संबोधित करते हुए हिमांशी कहती है कि जो भी इस क्षेत्र में आना चाहता है, उसका पहला काम स्वयं कॉन्फिडेंट होना है। इसमें कई राउंड होते हैं। बोलने का , टैलेंट का राउंड, पर्सनैलिटी का राउंड , जी के का राउंड। लेकिन सबसे बड़ी जीत उसकी होगी जो अपने आपमें कॉन्फिडेंट होगा।

अन्य।
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हिमांशी ने बताया कि मैंने रिश्तेदारों से या अन्य लोगों से तरह तरह के कमेंट सुने हैं लेकिन मेरे मम्मी पापा ने एक बार ही कहा था कि कहां नहीं जाना है यह हम आपको बता देंगे। उसके बाद में मैंने किसी की नहीं सुनी।जैसा वह कहते हैं, वैसा ही मैं करती हूं। वह मेरे आदर्श है, मेरे भगवान है। वह मेरी बैकबोन है।

हिमांशी की मां ने कहा कि कोई भी फील्ड अच्छा नहीं है। और कोई भी फील्ड बुरा नहीं है। यदि परिवार का पूरा सहयोग हो। वह कहती हैं की शुरुआत में यह नर्वस नहीं थी मैं नर्वस थी।सोच रही थी कि कैसे होगा क्या होगा वगैरा-वगैरा।

अपने विचार।
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माता पिता की निगरानी में,
खुले मन से काम करो।
पाठ पढ़ा है अच्छाई का,
तो बुरे काम से हरदम डरो।

विद्याधर तेतरवाल ,
मोतीसर।

 

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