झुंझुनू की IAS बेटी निशा चाहर की इमोशनल कहानी पढ़ के आ जाएंगे आंसू, दादा का सपना किया पूरा

विश्वास में भगवान बसे,
कर देखो विश्वास।
ढील दो पतंग को,
छूने दो आकाश।

बचपन से ही कलेक्टर का सपना।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको ऐसी शख्सियत से मिलाने जा रहा हूं। जिसने 5 साल की उम्र में ही कलेक्टर का बंगला, गाड़ी घोड़े, और पावर देखकर मन बनाया था कि बनूंगी तो केवल कलेक्टर ही बनूंगी।

झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के खेतड़ी (Khetri) उपखंड के चारावास गांव (Charawas Village) के सामान्य किसान परिवार में जन्मी निशा चाहर (Nisha Chahar) पुत्री श्री राजेंद्र जी अध्यापक यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया में 117 वी रैंक हासिल करके गांव का और माता-पिता और दादा-दादी का सपना साकार किया है। निशा ने बताया कि उनके दादाजी श्री झंडू राम जी चाहर का सपना था कि उनकी पौत्री आईएएस (IAS) बनकर गांव और शेखावाटी (Shekhawati) का नाम रोशन करें।

वह बताती है कि जब मेरा जन्म हुआ था तो मैं मेरे माता पिता की प्रथम संतान लड़की होने पर मेरी दादी नानची देवी बहुत दुखी हुई थी। लेकिन आज मेरी दादी जी 80 साल की उम्र में भी पूरी रात डीजे पर डांस करते हुए नहीं थक रही है।

निशा ने 2020 में दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (Delhi College Of Engineering) से बीटेक की परीक्षा प्रथम प्रयास में ही पास की थी। निशा के पापा राजेंद्र जी अध्यापक तथा माताजी चंद्रकला देवी ग्रहणी है। निशा ने अपनी सफलता का श्रेय दादा दादी, नाना नानी, व माता-पिता को दिया है।

निशा की दादी बताती है की जब इसका जन्म हुआ तब मैं बहुत दुखी थी। लेकिन इसके नटखट पन ने मेरा मन मोह लिया और मैं प्यार करने लग गई। एक बार की बात है, जब वह 5 साल की थी तब गांव में कलेक्टर की बात चल रही थी। तब बचपन में ही सही लेकिन कहा कि क्या कलेक्टर कलेक्टर कर रही हो, एक दिन तेरे को कलेक्टर बन कर दिखाऊंगी। और आज उसने अपना और दादी का सपना साकार कर दिया।

उस समय बचपन में निशा को पता भी नहीं था कि कलेक्टर क्या होता है। लेकिन धीरे-धीरे जब बडी हुई तब उसे मालूम पड़ा कि कलेक्टर जिले का सबसे बड़ा अधिकारी होता है। उसने अपने मन में यह सपना पाल लिया और पहले ही प्रयास में सफल होकर गांव और जिले का नाम रोशन कर दिया। घर वालों ने उसके लिए अगले वर्ष की तैयारी के लिए किताबें भी खरीद ली थी, लेकिन दादी को पूरा विश्वास था कि मेरी पोती इसी वर्ष आईएएस बनेगी।

निशा के पापा ने 11वीं क्लास में बायोलॉजी (Biology) दिलाने चाही।लेकिन निशा ने मैथ्स लेकर यह जता दिया कि वह IAS ही बनेगी। जबकि उनके पापा राजेंद्र जी अध्यापक की यह इच्छा थी कि बेटी डॉक्टर बन जाए और जल्दी से उसकी शादी कर दूं। उनके मन में यह चल रहा था कि आई ए एस के चक्कर में बेटी बड़ी हो जाएगी तो शादी करने में बहुत दिक्कत होगी।

निशा ने कलेक्टर का बंगला भी घूम कर चारों तरफ से देखा था। निशा ने अपने मन में पक्का बैठा लिया था कि मैं केवल कलेक्टर ही बनूंगी।

निशा की ताकत।
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निशा में कार्य करने के समय, वह समय चाहे पढ़ाई का हो, चाहे परीक्षा देने का हो, चाहे अन्य कोई कार्य हो उस वक्त ताकत और एकाग्रता सौगुनी हो जाती है।
निशा ने आगे भी बालिका शिक्षा पर काम करने पर जोड़ दिया है।

अपने विचार।
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जीवन क्षणभंगुर है,
और सुहाना सपना।
इसको कर लो मुट्ठी में,
सपना होगा अपना।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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