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झुंझुनू

सिलाई कढ़ाई कर पेट पालने वाले माँ बाप के 2 बेटों ने लाखों की नौकरी छोड़ किया ऐसा काम,सब रह गए दंग

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वह कहते हैं ना जिनके सपनों में उड़ान होती है उनके लिए हर मुकाम छोटा हो जाता है। एक पंछी अपने छोटे से पंखों से पूरे आसमान का सफर तय कर लेता है। कुछ इसी तरह की कहानी है राजस्थान के एक दर्जी के दो बेटों की। एक साधारण परिवार जिसमें पिता टेलर है और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनके पत्नी भी उन्हीं के साथ काम में हाथ बटाती हैं। टेलर पिता कपड़े सिलते हैं, मां कपड़ो पर तुरपाई करती हैं। लेकिन माता-पिता के दो बच्चे पंकज कुमावत और अमित कुमावत तो कुछ और ही करना चाहते थे।

आज आपको बताएंगे सुभाष कुमावत के दो बच्चों की कहानी,उनके दो बेटों की कहानी जिन्होंने एक नहीं दो दो बार यूपीएससी का एग्जाम पास किया और आईपीएस बनकर देश के सिविल क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे हैं। दरअसल सुभाष कुमावत झुंझुनू जिला मुख्यालय के गुढा मोड पर एक छोटी सी टेलर की दुकान चलाते थे, उनकी पत्नी भी उनके साथ इस काम में उनका हाथ बटाती थी।

बात करे परिवार की तो सुभाष के दो बच्चे पंकज और अमित कुमावत है। पंकज का जन्म 22 दिसंबर 1992 को हुआ और अमित का जन्म 4 नवंबर 1993 को हुआ। दोनों की प्राथमिक शिक्षा झुंझुनू जिला मुख्यालय पर जाट बोर्डिंग के पास स्थित भारती विद्या स्कूल से हुई। बारहवीं कक्षा दोनों ने झुंझुनू अकादमी से की, इसके बाद दोनों दिल्ली आ गए। दिल्ली में आकर दोनों ने दिल्ली आईआईटी में मेडिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरे की।

इसके बाद पंकज कुमावत दिल्ली के नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करने लगे। फिर 2 साल तक नौकरी करने के बाद छोटे भाई अमित के साथ यूपीएससी की तैयारी करने लगे। दोनों भाइयों ने दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की और साल 2018 में दोनों ने यूपीएससी का एग्जाम पास कर लिया।

2018 में पंकज को 443वी रैंक और अमित को 600वी रैंक हासिल हुई। इसके बाद अमित को भारतीय रेलवे यातायात सर्विस में भेज दिया गया और पंकज आईपीएस ऑफिसर बन गए। लेकिन इतने में भी कहा दोनों थमने वाले थे। दोनों ने अगले साल फिर तैयारी शुरू कर दी और साल 2019 में एक बार फिर यूपीएससी एग्जाम पास कर लिया। इस बार अमित को 423वी रैंक हासिल हुई और पंकज को 424वी रैंक हासिल हुई। दोनों आईपीएस कुमावत ब्रदर्स बन गए। पंकज इस समय में महाराष्ट्र कैडर में आईपीएस अफसर है और धुले जिले में एसपी पद पर कार्यरत हैं।

दोनों भाइयों की बात करे तो दोनों ने बिना कोचिंग के यूपीएससी, आईपीएस एग्जाम पास किया है। दोनों भाई बताते हैं कि उनके मां-बाप का उनके जीवन में बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता टेलर हैं और उनकी मां भी उनके साथ काम करती हैं। दोनों हमारी पढ़ाई के लिए दिन रात मेहनत करते थे, पापा थोड़ी सी आमदनी के लिए ओवरटाइम भी करते थे। वह चाहते थे कि वह नहीं पढ़ पाए लेकिन उनके बच्चे पढ़ लिखकर अच्छे पद पर देश की सेवा करें। अमित और पंकज के तीसरे भाई की बात करें तो उनके भाई डॉक्टर हैं। कुमावत परिवार की कहानी हमको बताती है कि एक सरल और सीधा साधा परिवार मेहनत और लगन से देश के बड़े अधिकारी बनकर देश की सेवा कर सकते हैं।

सुभाष कुमावत की मेहनत ने बताया कि एक टेलर होने के बावजूद भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और देश का सबसे बड़ा पुलिस अधिकारी बना दिया। सालाना 10 लाख की नौकरी छोड़कर यूपीएससी के एग्जाम की तैयारी करने वाले पंकज कुमावत और अमित कुमावत की कहानी वाकई प्रेरणा देने वाली है।

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