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झुंझुनू

झुंझुनू की बेटी बनी गुजरात की लेडी सिंघम, वुमन आइकन आईपीएस सरोज कुमारी के जज्बे कहानी

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गुजरात कैडर की आईपीएस अफसर सरोज कुमारी ने कुछ दिनों पहले ही जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। आईपीएस सरोज कुमारी के यहां बेटा और बेटी ने जन्म लिया है। सरोज कुमारी ने इस बात की जानकारी खुद अपनी सोशल मीडिया अकाउंट शेयर की। उन्होंने दोनों बच्चों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि भगवान ने आशीर्वाद के स्वरूप उन्हें बेटा-बेटी दिए हैं। सरोज कुमारी के जुड़वा बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही है और लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं।

एक ऐसी महिला पुलिसकर्मी की जिनकी कहानी हम सब मे जोश भरती हैं। राजस्थान के झुंझुनू जिले के चिड़ावा तहसील गांव बुडानिया की रहने वाली IPS सरोज कुमारी की कहानी हरेक उस व्यक्ति को प्रेरित करती है,जो जीवन में कुछ करना चाहता है। सरोज कुमारी का जन्म चिड़ावा तहसील के बुडानिया गांव में हुआ। शुरुआती शिक्षा उन्होंने गांव के ही सरकारी स्कूल में की,जिसके बाद ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए जयपुर गई।

जयपुर में डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने चूरू के सरकारी कॉलेज से एमफिल किया। साल 2010 में यूपीएससी का एग्जाम दिया और साल 2011 में बन गई सरोज कुमारी से आईपीएस सरोज कुमारी। जनवरी 2016 में सरोज गुजरात के बोटाद जिले की एसपी बनी। वहां उन्होंने एक ऐसा काम किया जिसे सुनते ही सभी लोगों ने उनकी तारीफ की। एसपी सरोज ने वहां उज्ज्वला योजना की शुरुआत की,जब उन्हें यह पता चला कि गधंडा तहसील के गांव में कई महिलाओं को जब’रद स्ती दे’ ह व्या’पा र में घसीटा जा रहा है। उन्होंने उस गांव में जाकर 30 से ज्यादा महिलाओं को इस घि’नौ ने काम से छुड़वाया। साथ ही उन्होंने उन महिलाओं को घर चलाने के लिए सिलाई मशीन भी दिलवाई। इसके बाद गुजरात में सरोज को लेडी सिंघम के नाम से जाना जाने लगा। उस जिले की एसपी रहते हुए उन्होंने फि’रौ ती और वसू’ ली करने वाले लोगों को भी जे’ ल में भिजवाया था।

इसके बाद सरोज को वडोदरा जोन 4 में डीसीपी के पद तैनात है। वहां भी उन्होंने समाज के कल्याण के लिए एक ऐसा कार्य शुरू किया जो वाकई काबिले तारीफ है। आईपीएस सरोज कुमारी ने वहां बच्चों को यौ’न शिक्षा के बारे में जागरूक करने का काम शुरू किया। इस मुहिम को नाम दिया *समझ स्पर्श अभियान*।बच्चों को गु’ड ट’च व बै’ड ट’च के बारे में समझाना शुरू किया। इस काम में उन्हे पुलिसकर्मीयों के साथ, 800 आंगनवाड़ी वर्कर, 500 कॉलेज के छात्र और वडोदरा के 80 से ज्यादा स्कूलों के लगभग 400 शिक्षकों की मदद मिली।

यह कार्य उन्होंने 19 जुलाई 2018 को को शुरू किया। वडोदरा शहर में सरोज कुमारी की टीम ने लगभग 1लाख बच्चों से ज्यादा को इस बारे में बताया, इसके अलावा 46000 से ज्यादा अभिभावको को, 300 से ज्यादा शिक्षक और 80 से ज्यादा स्कूलों को कवर किया हैं। सरोज कुमारी ने इसके माध्यम से सुरक्षा सूत्र नामक एक प्लेइंग कार्ड भी लॉन्च किया उस प्लेइंग कार्ड में एक qr-code छपा हुआ है।

उस के माध्यम से जब भी बच्चे उसे स्कैन करते हैं तो उनके मोबाइल फोन पर जागरूकता और बच्चों के हौसले को अफजाई करने वाली वीडियो चल जाती है। ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह के माध्यम से यह काम किया जा रहा है। राजस्थान के छोटे से गांव से अपना सफर तय करने वाली सरोज कुमारी को इस नेक काम के लिए तमिलनाडु के गवर्नर माननीय श्री बनवारी लाल पुरोहित ने वुमन आइकन का पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही उन्हें वूमेन इन यूनिफॉर्म श्रेणी में भी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका हैं। जिसके बाद गुजरात में ही नहीं राजस्थान में भी उनकी खूब तारीफ हो रही है।

लॉक डाउन में भी नही रुका मदद का सिलसिला

सरोज कुमारी की समाज कल्याण की नीति यहीं नहीं रुकी। पिछले वर्ष जब देश में कोरोना महामारी आई तो उन्होंने लोगों की मदद के लिए एक नई योजना बनाई। सरोज ने एक रसोई योजना की शुरुआत की जिसमें सड़क किनारे, कच्ची बस्ती में रहने वाले लोग व फ्लाई ओवर, ओवर ब्रिज के नीचे रहने वाले लोगों को भोजन पहुंचाया जाता था। रोजाना करीब एक हजार से ज्यादा लोगों को सरोज कुमारी व उनकी पुलिस विभाग की टीम भोजन पहुंचाती थी। इसके लिए अलग-अलग जगहों पर पुलिस वैन तैनात की गई और वह सभी को भोजन कराती थी। यह अभियान 11 जून 2020 तक चला क्योंकि 11 जून के बाद देश में अनलॉक वन की शुरुआत हुई जिसके बाद सभी लोगों को काम शुरू हो गया था। इसके साथ ही यह सरोज ने वरिष्ठ निर्भयम योजना की शुरुआत की जिसमें वरिष्ठ नागरिकों का खास ख्याल रखा जाता था। उन्हें मानसिक तौर पर भी प्रेरित किया जाता था। साथ ही उनकी काउंसलिंग भी करवाई जाती थी।

इसी के साथ सरोज ने उन सभी को रोजगार दिलाने के लिए मास्क बनाने के लिए कहा और मास्क बनाने के बदले उन्हें मेहनताना भी दिया जाता था। उन मास्को को गरीब लोगों में बांट दिया जाता था। इससे जनकल्याण के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को रोजगार भी मिला। इस नेक काम के लिए गुजरात की लेडी सिंघम को राष्ट्रीय महिला आयोग ने 29वें स्थापना दिवस पर 31 जनवरी 2021 को दिल्ली के विज्ञान भवन में कोविड महिला अवार्ड देकर सम्मानित किया।

इस पुरस्कार को जीतने के बाद सरोज ने कहा कि यह अवार्ड उन्हें पुलिस रसोई, वरिष्ठ निर्भयम और पुलिस परिवार की बहनों को लोगों की सेवा के जरिए रोजगार देने के लिए मिला है। इस अवार्ड के उन्होंने अपनी पूरी टीम का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि उनके साथ उनकी पूरी टीम इस पुरस्कार की हकदार है।

यह कहानी है राजस्थान झुंझुनू जिले के चिड़ावा तहसील गांव बुडानिया की रहने वाली सरोज कुमारी की। जिन्होंने एक सरकारी स्कूल में पढ़ कर डीसीपी पद तक का सफर तय किया। जो समाज कल्याण में अपनी भूमिका निभा रही है। इस समय सरोज सूरत के पुलिस हेड क्वार्टर में डीसीपी पद पर कार्यरत है। उनकी कहानी सुनकर यह तो साफ हो गया है कि सपनों को उड़ान तभी मिलती है जब आप उसके लिए उड़ना सीखते हैं।

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