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झुंझुनू

झुंझुनूं में बहती है यमुना पर सिर्फ कागजों में आखिर कब मिलेगा शेखावाटी को यमुना का पानी !

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पांच चुनावों से देख रहा हूं,

नदी उफान में रहती है।

जब चुनावों का मंडप सजता,

झुंझुनूं में यमुना बहती है

ऊपर लिखी चार पंक्तियां झुंझुनूं जिले के लोगों का एक अधूरा सपना बयां करती है जो ना जाने कितने ही सालों बाद भी कागजों में अटका पड़ा है. जिलेवासी सालों से यमुना के पानी की आस लगाए बैठे हैं लेकिन हर बार उन्हें चुनावी मौसम में वादों का पिटारा थमा दिया जाता है।

जिले में यमुना का पानी एक ऐसा मुद्दा हो गया है जिसकी आड़ में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने समय-समय पर चुनावी रोटियां सेकी है।

वर्तमान की स्थितियों की बात करें तो अभी तक यह साफ नहीं है कि शेखावाटी को यमुना का पानी कब मिलेगा लेकिन कई सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा यह लड़ाई जारी है।

हाईकोर्ट ने दिए थे जल्द हल निकालने के आदेश

यमुना नहर प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सहित यमुना नहर समझौते में शामिल पांच राज्यों के मंत्रियों से बैठक कर शीघ्र हल निकालने के आदेश जारी कर चुका है।

यमुना नहर प्रोजेक्ट में सरकारों की लचर व्यवस्थाओं के खिलाफ जनहित याचिकाकर्ता यशवर्धन सिंह शेखावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने यह आदेश दिए थे कि मामले को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गंभीरता से लें और तय सीमा में इस मुद्दे पर बैठक बुलाएं।

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आगे टिप्पणी कर कहा था कि हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के मंत्रियों सहित इस मुद्दे से संबंधित विभाग के सिंचाई विभाग के सचिव, चीफ इंजीनियर नहर एवं सिंचाई विभाग केंद्रीय जल आयोग के शीर्ष इंजीनियर व शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर कोर्ट को सूचित करें।

क्या है पूरा मामला

वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में 5 राज्यों के बीच यमुना नहर का पानी शेखावाटी क्षेत्र को मुहैया कराने के लिए समझौता हुआ था जिसमें हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश शामिल थे।

इस समझौते में हरियाणा के ताजेवाला हेड से 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी शेखावाटी को देने का समझौता हुआ था जो समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

वहीं नवंबर 2017 में सामाजिक कार्यकर्ता शेखावत ने पानी की समस्या से जूझ रहे शेखावाटी को पानी मुहैया कराने के लिए इस समझौते को जल्द लागू करने के लिए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। इसके बाद से लगातार हाईकोर्ट राज्य सरकारों व केंद्र सरकारों को लगातार निर्देशित कर रहा है।

नेताओं द्वारा किए गए सिर्फ चुनावी वादे

वैसे देखा जाए तो यह मामला दो दशक से भी ज्यादा पुराना है जब जिले के कद्दावर नेता रहे शीशराम ओला ने यमुना नहर का पानी लाने के नाम पर वोट बटोरे लेकिन नहर कभी नहीं आई। ओला ने 2012 में गांधी चौक में इस मुद्दे पर धरना तक दिया था।

भाजपा सरकार सत्ता में आने पर सांसद संतोष अहलावत ने भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से आग्रह किया तो राजे ने सरकार के कार्यकाल के आखिरी दिनों में 20 हजार करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि से इसकी डीपीआर बनवाई।

सरकार ने पूरे क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी करवाया और बाद में यह सहमति बनी कि यमुना का पानी शेखावाटी तक लाने के लिए 270 किलोमीटर लंबी स्टील पाइप लाइन डाली जाएंगी। पानी को इकट्ठा करने के लिए चूरू जिले के राजगढ़ तहसील के गोट्या बड़ी गांव में सात किलोमीटर लंबा और सात किलोमीटर चौड़ा तालाब बनाया जाएगा।

फिलहाल ताजा हालात यह है कि अब केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने झुंझुनूं को जल्द यमुना नहर का पानी उपलब्ध करवाने का फिर आश्वासन दिया है।

उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी जिसके लिए हमनें सभी बाधाओं को दूर कर लिया गया है। आखिर में जनता अपने जनप्रतिनिधियों से फिर उम्मीद लेकर कहती है –

सदा नहर काम आई है,

अब भी यही विशेष।

मालिक कुछ तो सोचना,

बाकी बचा न कुछ शेष।

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